दिल्ली देहात स्थित घोगा गांव में आयोजित जीवन ज्योति यज्ञ में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला।
घोगा गांव निवासी श्री दीपक भारद्वाज जी द्वारा अपने माता-पिता के सम्मान में आयोजित यह कार्यक्रम अत्यंत प्रेरणादायी है। जो संतान अपने माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करती है, वही जीवन में सच्चे अर्थों में प्रगति और नैतिक मूल्यों को प्राप्त करती है।
उत्तर भारत की प्रमुख सामाजिक संस्था पालम 360 खाप के प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी जी के नेतृत्व में आयोजित यह पहल नयी पीढ़ी को व्यसनमुक्ति, सदाचार और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास है।
आधुनिकता के इस दौर में अपनी सनातन जड़ों से जुड़कर रहना, युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से दूर रखना और समाज में आपसी भाईचारे और समरसता को सुदृढ़ करना ही हमारे भावी भारत के निर्माण की असली कुंजी है।
मेरा युवा भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वंदे मातरम् शिविर के ऊर्जावान युवा सहभागियों के साथ गांधीनगर स्थित लोकभवन में आत्मीय संवाद हुआ।
भारत विविधताओं से भरा देश है, किंतु हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा युगों-युगों से 'वसुधैव कुटुंबकम' के सूत्र में बंधी है। 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से हमारे युवाओं में राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक समझ को नयी दिशा मिल रही है।
वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को जातिवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर अधिकारों के साथ-साथ अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।
स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक कृषि और विशेषकर व्यसनमुक्ति के लिए युवाओं को आगे आना होगा। भावी पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
इस शिविर में केरलम, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव के 150 युवा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। युवाओं के प्रश्नों और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान कर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
गांधीनगर स्थित लोकभवन में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू जी ने सौजन्य मुलाकात की।
इस अवसर पर श्री संधू जी को गुजरात में चल रहे राज्यव्यापी प्राकृतिक खेती मिशन और ग्राम कल्याण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी।
रासायनिक खाद से मुक्त, जहरमुक्त और जल-संरक्षण पर आधारित हमारी प्राकृतिक कृषि पद्धति की प्रगति की उन्होंने खूब सराहना की।
मुलाकात के दौरान देश और समाज के विकास से जुड़े विभिन्न लोक-कल्याणकारी विषयों पर महत्वपूर्ण और सार्थक चर्चा हुई।
दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू जी का गुजरात लोकभवन पधारने पर हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन!
अहमदाबाद के हाथीजण स्थित राधे उपवन में आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में समाजसेवी स्व. धरमशीभाई मोरड़िया जी के जीवन और सेवाकार्यों पर आधारित पुस्तक ‘माटी अने माणसाई' का विमोचन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रफुलभाई पानशेरिया जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री परषोत्तम भाई रूपाला जी, श्री देवुसिंह चौहाण जी, सांसदगण, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
स्व. धरमशीभाई का जीवन भगवद्गीता और उपनिषदों में वर्णित 'त्यागपूर्वक उपभोग' का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने जीवनभर सादगी और निष्काम भाव से शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्वितीय जनसेवा की।
धन-संपत्ति में लिप्त रहने वाले तो बहुत होते हैं, लेकिन संपत्ति का सदुपयोग समाज-कल्याण में करने वाले जल-कमलवत विरले ही होते हैं। इंसान के सत्कर्म और सद्गुण ही उसकी वास्तविक पूंजी हैं, जो उसे अमर बनाते हैं।
बीरेन कोठारी जी द्वारा लिखित और मोरड़िया परिवार द्वारा प्रकाशित यह जीवनचरित्र समाज और भावी पीढ़ियों को उच्च नैतिक मूल्यों और सेवा-भाव से जीवन जीने का मार्ग दिखाएगा।
गुजरात विश्वकोश ट्रस्ट, अहमदाबाद की कलाविथिका आर्ट गैलरी में अहमदाबाद कल्चरल वीक के अंतर्गत आयोजित विशेष कला प्रदर्शनी ‘फ्रॉम द बाजार टू द कैनन' का शुभारंभ किया।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति और कला भी महत्वपूर्ण चेतना जगा सकती है। यह प्रदर्शनी इसी अद्भुत विचार को जीवंत करती है।
इस प्रदर्शनी में गुजरात की कला परंपरा की पांच पीढ़ियों के 33 प्रतिष्ठित कलाकारों की उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
हमारी पारंपरिक कला और विरासत ही हमारी असली पहचान हैं। यह आयोजन नई पीढ़ी को हमारी कला-संस्कृति से जोड़ने का एक अत्यंत सराहनीय प्रयास है।
अहमदाबाद जिले के साणंद में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में प्राकृतिक कृषि उत्पादों और मूल्यवर्धित वस्तुओं के विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया तथा प्रगतिशील किसानों का उत्साहवर्धन किया।
यूरिया-डीएपी जैसे रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारी उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है तथा कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। यह सिर्फ खेती का नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का संकट है।
यह सोचना बिल्कुल गलत है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन घटता है। देशी गाय के गोबर में मौजूद करोड़ों लाभकारी सूक्ष्मजीव भूमि को जीवंत बनाते हैं, जिससे न्यूनतम लागत पर उत्तम और पौष्टिक फसल प्राप्त होती है।
यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि अहमदाबाद जिले में जिला पंचायत द्वारा प्राकृतिक सब्जियों के लिए विशेष बाजार की व्यवस्था कर किसानों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है।
आइए, हम सब मिलकर अपनी माटी और भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए रासायनिक खेती को त्यागें और देशी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाएं!
साणंद तहसील के कुंवार गांव में अनुसूचित जाति परिवार के श्री मुकेशभाई धूळाभाई वाघेला जी के निवास स्थान पर परिजनों के साथ बैठकर सुबह का अल्पाहार ग्रहण किया।
मुकेशभाई एवं उनके परिवार के सदस्यों ने अत्यंत प्रेम, आदर और खुले दिल से मेरा स्वागत किया। परिवार द्वारा बड़े प्रेम से परोसे गए ताजे थेपलों और फलों का स्वाद सचमुच आत्मीयता से परिपूर्ण था।
गांव के नागरिकों के साथ हुई विशेष बैठक में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जी के महान विचारों और आदर्शों को स्मरण किया। हम सबको मिलकर शिक्षित बनने, आपसी भाईचारे के साथ रहने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
समाज में किसी भी प्रकार के ऊंच-नीच या जातिगत भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि वह अपने बच्चों को उच्च और गुणवत्तायुक्त शिक्षा अवश्य दिलाएं, ताकि वह अपने परिवार और राष्ट्र का नाम रोशन कर सकें।
साणंद तहसील के विंछिया गांव में प्रगतिशील किसान श्री गजेन्द्रसिंह वाघला जी के कामधेनु प्राकृतिक फार्म का दौर किया। स्वयं गौ दुग्ध दोहन किया। श्री गजेन्द्रसिंह के खेत की उत्कृष्ट उपजाऊ मिट्टी और प्राकृतिक रूप से लहलहाती हरी-भरी फसलों को देखकर मन को अत्यंत प्रसन्नता हुई।
देशी गाय के मात्र 1 ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक सूक्ष्मजीव होते हैं, जो भूमि को उपजाऊ और जीवंत बनाते हैं। जीवामृत और घनजीवामृत का यह प्राकृतिक विज्ञान रासायनिक खातरों की जरूरत को पूरी तरह समाप्त कर देता है।
बाजार के महंगे और जहरीले रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से हमारी धरती बंजर हो रही है तथा लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हमें अपनी माटी और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए कम खर्च वाली देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती को संकल्प के साथ अपनाना होगा।
साणंद तहसील के विंछिया गांव की सरकारी विद्यालय के साधारण कक्ष में रात्रि विश्राम किया। प्रातःकाल विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामजनों के साथ योगाभ्यास किया।
प्राणायाम और विभिन्न योगासन करवाते हुए उनके लाभों के बारे में विस्तार से समझाया। योग और प्राणायाम से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार और एकाग्रता भी बढ़ती है।
बच्चों को प्रेरित किया कि वह अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, कठोर परिश्रम और सकारात्मक सोच को अपनाएं, ताकि वह भविष्य में देश के एक आदर्श और सक्षम नागरिक बन सकें।
साणंद तहसील के विंछीया गांव में ग्रामवासियों के साथ सहज संवाद करने का सुखद अवसर मिला।
गांव में स्थानीय नागरिकों, युवाओं, बुजुर्गों एवं अनुसूचित जाति परिवारों के साथ सहजता और आत्मीयता से चर्चा की और उनकी दिनचर्या के बारे में जाना।
ग्रामीण भारत की असली ताकत यहां के लोगों के निष्छल प्रेम, आतिथ्य-भाव और सादगी में बसती है। जब हम जनता के बीच सीधे पहुंचकर उनके सुख-दुःख के सहभागी बनते हैं, तो लोकसेवा का वास्तविक अर्थ सार्थक होता है।
साणंद तहसील के विंछीया गांव में आयोजित रात्रि सभा के दौरान ग्रामवासियों, मातृशक्ति और ऊर्जावान युवाओं के साथ अत्यंत सहजता और आत्मीयता से संवाद किया।
समाज की प्रगति के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों और बेटों में बिना किसी भेदभाव के उच्च और गुणवत्तायुक्त शिक्षा के संस्कार डालें। आज की युवा पीढ़ी को मोबाइल के अतिरेक और व्यसनों से दूर रखकर राष्ट्रभक्त और संस्कारी नागरिक बनाना हम सबका दायित्व है।
रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारी उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है। देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती से न केवल लागत कम होती है और 50 फीसदी पानी की बचत होती है, बल्कि जहरमुक्त अन्न से समाज निरोगी बनता है। आज गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान इस दिशा में आगे बढ़े हैं।
स्वच्छता ही सेवा और एक पेड़ मां के नाम अभियानों को जन-आंदोलन बनाते हुए अपने गांवों, गलियों और घरों को पूरी तरह स्वच्छ रखना है। स्वच्छता से ही उत्तम स्वास्थ्य और सुंदर समाज का निर्माण होता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत साणंद तहसील के विंछीया गांव में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहभागिता की। इस पावन अवसर पर बड़िया देव मंदिर प्रांगण में बोरसली के पौधे का रोपण किया।
सिर्फ पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि हमें मातृ-ऋण के भाव से रोपे गए प्रत्येक पौधे को कम से कम दो वर्षों तक अपने बच्चे की तरह पालना-पोसना चाहिए। पौधों की उचित देखभाल न होना और उन्हें सूखने देना नैतिक रूप से उचित नहीं है।
आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, अनावृष्टि और अतिवृष्टि जैसी समस्याओं से जूझ रही है। पेड़ हमें ऑक्सीजन देकर पर्यावरण को संतुलित रखते हैं। हमें अपने परिवार के प्रत्येक शुभ अवसर या जन्मदिवस पर एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
अहमदाबाद जिले की साणंद तहसील के विंछीया गांव में आत्मीयता और सादगीपूर्ण वातावरण में अनुसूचित जाति परिवार के श्री पांचाभाई मकवाणा जी के निवास स्थान पर परिजनों के साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया। श्री पांचाभाई मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
पांचाभाई एवं उनके परिवार के सदस्यों ने अत्यंत प्रेम और आदर के साथ सत्कार किया। परिवार द्वारा परोसी गई दाल-रोटी जैसे सात्विक भोजन में स्नेह और निश्छलता की मिठास थी।
भोजन के दौरान परिवार के सदस्यों के साथ आत्मीय चर्चा की, उनका हाल-चाल जाना तथा उनके जीवन, आजीविका और बच्चों के भविष्य के विषय में संवाद किया।
अहमदाबाद जिले की साणंद तहसील के विंछीया गांव में ग्रामजनों के साथ स्वच्छता अभियान में श्रमदान किया।
गांव के सफाई कर्मचारियों का सम्मान कर यह संदेश दिया कि गंदगी साफ करने वाला कभी छोटा नहीं होता, बल्कि समाज को स्वच्छ रखने वाले लोग अत्यंत आदरणीय हैं। काम करने से किसी की गरिमा कभी कम नहीं होती।
युवाओं से अपील की कि वह सप्ताह में कम से कम एक घंटा गांव की साफ-सफाई के लिए अवश्य समर्पित करें। जैसा आचरण हम करेंगे, वैसी ही प्रेरणा हमारी आने वाली पीढ़ी को मिलेगी।
आइए, मिलकर अपने गांवों को स्वच्छ और आदर्श बनाएं।





















































