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कहानी -
आख़िरी बेंच -
“कहानी में प्रयुक्त सभी नाम, क़िरदार और घटनाएँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं।
यदि किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से समानता हो, तो उसे केवल संयोग समझा जाए।”
शहर के पुराने स्कूल में बरामदे के आख़िरी कोने में एक लकड़ी की बेंच थी। बाकी सारी बेंचें बदल दी गई थीं, मग़र प्रधानाचार्य उसे हटाने नहीं देते थे। बच्चे अक़्सर पूछते, “सर, ये इतनी पुरानी बेंच किस काम की है?” वे बस मुस्कुराकर कहते, “इसकी कहानी किसी दिन सुनाऊँगा।”
एक दिन स्कूल में सफ़ाई हो रही थी। एक चपरासी ने बेंच हटाने की कोशिश की तो उसके नीचे से एक छोटी-सी धातु की डिब्बी मिली। उसमें कुछ पुराने कागज़ और एक पेंसिल थी। प्रधानाचार्य ने कागज़ देखा तो उनकी आँखों में अचानक चमक आ गई।
उस कागज़ पर लिखा था, “मुझे पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन मेरे पास किताबें नहीं हैं।” नीचे बच्चे का नाम था --रघु। प्रधानाचार्य ने बताया कि रघु कई साल पहले इसी स्कूल में पढ़ता था और घर की हालत ठीक न होने के कारण पाँचवीं के बाद स्कूल छोड़ गया था।
अगले दिन स्कूल में एक आदमी आया। बालों में सफ़ेदी उतर चुकी थी और हाथ में मिठाई का डिब्बा था। उसने बेंच देखते ही कहा, “सर, इसे अभी तक संभालकर रखा है?” प्रधानाचार्य ने ध्यान से देखा और पहचान गए --वह रघु था।
रघु ने बताया कि स्कूल छोड़ने के बाद वह एक छोटी-सी दुकान पर काम करने लगा था। वहाँ से लौटकर वह रोज़ स्कूल की खिड़की के पास बैठकर बच्चों को पढ़ते देखता था। एक दिन उसके शिक्षक ने उसे बुलाकर कहा था, “तुम्हारे पास किताबें नहीं हैं तो क्या हुआ, तुम्हारे पास सीखने की इच्छा तो है।”
उस शिक्षक ने अपनी पुरानी किताबें उसे दे दी थीं। रघु ने उन्हीं किताबों से पढ़ाई जारी रखी और धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। कई साल बाद उसने अपनी मेहनत से एक छोटी-सी किताबों की दुकान खोल ली थी। वह मिठाई का डिब्बा उसी शिक्षक के लिए लाया था, मग़र शिक्षक अब इस दुनिया में नहीं थे।
रघु ने बेंच पर हाथ फेरते हुए कहा, “सर, मैं उस दिन अपनी पेंसिल यहीं भूल गया था और इसी कागज़ पर पहली बार लिखा था कि मुझे पढ़ना है।” प्रधानाचार्य मुस्कुराए और बोले, “तुमने उस दिन सिर्फ़ कागज़ पर नहीं लिखा था रघु, तुमने अपनी ज़िंदगी की पहली मंज़िल लिखी थी।”
कुछ देर दोनों चुप रहे। फिर रघु ने कहा, “सर, इस बेंच को मत हटाइएगा।” प्रधानाचार्य ने पूछा, “क्यों?” वह मुस्कुराकर बोला, “क्योंकि हो सकता है किसी और बच्चे को भी यहीं बैठकर अपनी पहली मंज़िल दिखाई दे जाए।”
#अशोक_मसरूफ़
PIC Credit-ChatGPt
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तेरी ख़याल में बहता है हर एक मंज़र,
तुम पास न हो कर भी रहती है दिल के अंदर ,
गर छू न लेती तेरी यादें मेरी रूह को आ कर,
तो हम कब के बिखर चुके होते टूट कर....💔
कभी टूटा नहीं मेरे दिल से ,
तेरी यादों का रिश्ता ,
गुफ्तगू किसी से भी हो ,
ख़्याल तेरी ही रहता है......♥️
तेरा मेरा रिश्ता -
एक बात थी दिल में,
कहने को बहुत कुछ था,
मगर लफ़्ज़ कम पड़ गए
और शाम उतर आई।
कुछ बातें कही नहीं जातीं,
उनका बस एहसास होता है,
जैसे बारिश से पहले
मिट्टी की ख़ुशबू होती है।
शायद इसी को कहते हैं
दिल का रिश्ता—
जहाँ ख़ामोशी भी
एक पूरी बात होती है।
#अशोक_मसरूफ़
PIC Credit---pinterest
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ना नाम पता, ना कोई रिश्ता ,
फिर भी अपने से लगने लगी ,
ये कैसा असर है तेरी खामोशियों का ,
कि हम खुद से ज्यादा तुम्हें सोचने लगे...♥️
" वो न आये उनकी याद आकर वफा कर गयी,
उनसे मिलने की आस सुकून तबाह कर गयी,!
आहट हुयी तो सोचा असर दुआ कर गयी,,
दरवाजा खोलकर देखा तो मालूम हुआ कि,
मजाक हमसे हवा कर गयी,,!!💞
#Ishq🫶
#ShayariaLovers💖
#ऊनमुक्त_मन
#शहरयार
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फ़ायदा क्या है, ज़माने में ख़सारा क्या है
ख़ाक हो जाएंगे हम लोग, हमारा क्या है !
.
देख ए उम्र ए रवां ख़्वाहिशें रह जाएंगी
तुम गुज़र जाओगी चुप के से, तुम्हारा क्या है..!!
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When a face settles in the heart, there can be no face more beautiful than that person in the world. A person falls in love with her so deeply that he becomes devoted to her forever. ❤️🫶💞
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यह अनंत खाई और रस का दरिया का संगम है जो नहीं डूबा वो क्या खाक किया जिंदगी में ।💞
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विश्वास पर लोग आज दूसरों के आस्तिक हो गई है।
और जब यही विश्वास अपना तोड़ता हैं।
इंसान की जीने की हिम्मत टूट जाती है।
और यही हिम्मत बदले की भावना में बदल जाती है।
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हम कहा वाकिफ थे फ़रेब से,
हमें तो लगा था जो जैसे दिखते हैं,
वैसे ही होंगे।
सभी साथियों को जय समाजवाद।
जय श्री राधे कृष्णा।
सुप्रभात.
#GOODMORNİNG
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Replying to @AMushroof
न किसी को सताओ, न रुलाओ,
लाख गलत कहे कोई,
बस मुस्कुराओ और भूल जाओ। 😊
#धामनोद_मेरी_जान 🌅🧘♂️☕️
#राम_राम_जी 🙏💐🤗
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सम्मान और अपमान,अपमान या प्रशंसा की भावना को अपने हृदय में कभी भी स्थान न दे।ज़िन्दगी को एकतरफ़ा बना देते है ये एहसास-
•••परम् पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी
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Looking at her husband, it's hard to tell whether this is love or punishment! 😂😅
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Akshaye Khanna & Aishwarya Rai Bachchan ,From 1999 to 2026! Then and Now Pictures 📸✨
या आपको फिल्म आ अब लौट चलें (1999) में अक्षय खन्ना और ऐश्वर्या राय बच्चन की शानदार केमिस्ट्री याद है? 🥹❤️
90 के दशक के उनके खूबसूरत अंदाज़, शानदार अभिनय और यादगार पल आज भी बॉलीवुड की पुरानी यादें ताज़ा कर देते हैं।
आइए, दोनों सितारों के पुराने और आज के लुक की तस्वीरों के साथ उनकी खूबसूरत फिल्मी यात्रा को फिर से याद करें!
बॉलीवुड की 26+ साल पुरानी यादें उनका बदला हुआ अंदाज़ आपको पुराने दिनों में ले जाएगा! ❤️
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यह हुआ कैसे?अब पता नहीं कितने दिन में लाइट आएगी? वैसे लापरवाही का नतीजा सिर्फ़ पछताना ही होता है...
Ashok Mushroof retweeted
नेताओं की अमर्यादित भाषा पर मर्यादित टिप्पणी का आदेश…
टीवी डिबेट का असली जादू यही है! 😂
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🌞 #GoodMorning ! 🙏
May Lord Shiva bless your day with peace, happiness, and success.
🔱Har Har Mahadev! 🕉️
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वो मुझे छोडकर खुश है तो शिकायत कैसी
और मैं उन्हें खुश भी ना देखूं तो मोहब्बत कैसी....
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तुमने अधूरी छोड़ी जो कहानी
हमने उसे ख़ामोशी से पूरा किया
तुमने तो रास्ता बदला
हमने नज़रिया बदल लिया,
अब शाम ढलने का इंतज़ार नहीं
चांद दिखे तो कोई ख़याल नहीं
यादों से रिश्ता आज भी है
बस उनमें पहले सा मलाल नहीं
तू ऊंचा उड़ रहा अपने आसमान में
हमे क्यूं गिराया अब कोई सवाल नहीं.
#रूह
बड़ा ही आधा-अधूरा सा काम करते हो तुम…
मिलना था तो आधा-अधूरा मिले,
इश्क़ किया तो आधा-अधूरा किया,
कुछ सुनाया तो वो भी आधा-अधूरा।
मेरी बातें भी सुनीं तो आधा-अधूरा,
साथ निभाया तो आधा-अधूरा,
और जब गए,
तो छोड़ गए मुझे आधा-अधूरा।
सुनो, अब कोई शिकायत नहीं तुमसे,
बस इतना बदल गए हैं हम…
कि अब सब कुछ दिखता है आधा-अधूरा,
चाँद भी, उसकी रौशनी भी,
हर रास्ता भी अधूरा-सा…
और अब याद भी आते हो,
तो आधा-अधूरा।
_____डेज़ी🌼

































