बेहतरीन पत्रकार कुलदीप छंगाणी को जन्मदिन की बहुत शुभकामनाएं।
@KuldeepChhanga6
पुलिस की संवेदनशीलता जब हर्फ़ बनती है तो सीधे दिल में उतरती है...
शहर की रोशनी से दूर
बस्ती में बिजली के तारों पर लिपटा
एक बल्ब टिमटिमाता है ।
बिलखता बचपन वहाँ सिसकता है
और रोते - रोते कहता है
youtu.be/xDoVEC5Qlko?si=wgjB…
सरकारी आईडी और पासवर्ड चुराकर सरकारी योजनाओं में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम देने वाले अनगिनत चेहरों को बेनकाब करने वाला झालावाड़ पुलिस का 'ऑपरेशन शटर डाउन' अब पूरे राजस्थान के लिए नजीर बन रहा है.
22 अक्टूबर 2025 की उस दरमियानी रात मैं और देश के जाने-माने फोटो जर्नलिस्ट पुरुषोत्तम दिवाकर इस साहसिक अभियान के प्रत्यक्ष साक्षी बने थे.
अब राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया के इस अभिनव अभियान की सराहना करते हुए सरकारी योजनाओं में हो रही सेंधमारी रोकने के लिए पूरे प्रदेश में इसी तर्ज पर कार्रवाई करने की सलाह दी है.
मुख्य सचिव ने गत 1 अक्टूबर को विभिन्न विभागों की बैठक बुलाकर ऑपरेशन शटर डाउन की तर्ज पर काम करने का निर्णय लिया. बैठक में एसपी अमित कुमार बुडानिया के प्रस्तुतिकरण की उन्होंने खुलकर सराहना की.
एक जिले की पुलिस की पहल का प्रदेशव्यापी व्यवस्था में बदलाव की दिशा बनना, इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
हमारी ओर से 'ऑपरेशन शटर डाउन' की गई रिपोर्टिंग आप नीचे इनबॉक्स में देख सकते हैं.
@AmitBudania9121 @svoruganti1466 @PurushottamDiw3
Sir,
Feel truly honoured to hear from you
We have poured our hearts and energy into Operation SHUTTER DOWN . We firmly believe it can make a big difference in the fight against cyber fraud.
@svoruganti1466 @PoliceRajasthan
Anand Choudhary retweeted
Sir,
Feel truly honoured to hear from you
We have poured our hearts and energy into Operation SHUTTER DOWN . We firmly believe it can make a big difference in the fight against cyber fraud.
@svoruganti1466 @PoliceRajasthan
Shri Amir Kumar IPS SP Jhalawar made a brilliant presentation on his seminal efforts to fight cyber crime in direct benefit transfers. heartiest congratulations to @PoliceRajasthan
1 October 2026
@BhajanlalBjp
@DIPRRajasthan
@RajGovOfficial
Anand Choudhary retweeted
प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बजाय अगर जोधपुर में जाकर ज़मीन पर मेहनत की होती, तो शायद 1 वोट का अंतर 6 वोट तक नहीं पहुँचता।
हार-जीत चुनाव का हिस्सा है, लेकिन कद्दावर नेता की लगातार करारी हार निश्चित रूप से गंभीर समीक्षा का विषय है। सवाल सिर्फ एक चुनाव का नहीं, संगठन और नेतृत्व की जमीन पर पकड़ का है।
छोटा चुनाव हो या बड़ा राजस्थान में वोट प्रतिशत गिरने का पैटर्न भी अब चर्चा का विषय है। जब चेहरा एकमात्र अशोक गहलोत होते है, तभी वोट प्रतिशत में गिरावट क्यों दिखाई देती है? इस सवाल से बचने की बजाय पार्टी नेतृत्व को इसका ईमानदार विश्लेषण करना चाहिए।
जिन्होंने 2008 और 2018 में निर्दलीयों के बूते अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाई हो, वो आज निर्दलीयों के वोट शेयर पर समीक्षा करने की सलाह दे रहे हैं।
यह महानुभाव इतने बेलगाम और अनुशासनहीन हो चुके हैं कि जब इनके गृह ज़िले जोधपुर में कांग्रेस पार्टी का मेयर बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था, तब वहाँ जाना या कोई भूमिका निभाना तो दूर, ये प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निर्दलीयों को मिले वोट शेयर का हवाला देकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठा रहे थे।
पूरे नगर निगम चुनावों में ये केवल एक दिन अपने गृह ज़िले में प्रचार के लिए उतरे और उस एक दिन भी ऐसा विरोध झेलना पड़ा कि पुलिस की मदद से बाहर निकलना पड़ा।
कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं… वे उस भरोसे की गवाही होती हैं जो लोग आज भी पत्रकारिता पर जताते हैं। यह भरोसा यूं ही नहीं जीता जाता। इसके लिए लोगों की आवाज को अपनी आवाज और लोगों के प्यार व भरोसे को अपनी जिम्मेदारी बनाना पड़ता है।
आज जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में ‘हिंदी का उत्सव’ के मंच पर सौरभ द्विवेदी की संगत खूब जमी।
पत्रकारिता, भाषा और समाज पर उनकी बेबाक बातें। बातों में ठहराव भी था, तंज भी था और पत्रकारिता की वह बेचैनी भी, जो आंख में आंख डालकर सवाल पूछना सिखाती है।
अंत में जेएनयू के आजादी के नारों संबंधी सवाल का सौरभ जी ने जिस दृढ़ता, सहजता और बेबाकी के साथ जवाब दिया, उसकी गूंज जयपुर की फिजाओं में कई दिन तक रहेगी।
आज तो सच में मौज कर दी बॉस।
@saurabhtop
कभी लंदन की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर देश की सेवा करने भारत लौटीं. फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा को चुना और 13 वर्षों तक लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश करती रहीं. अब दिव्या मित्तल ने एक बार फिर अपने मन की सुनी है और अपनी इच्छा से IAS की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है. पद और प्रतिष्ठा से आगे बढ़कर अपने भीतर की आवाज को चुनने के इस फैसले के साथ दिव्या ने अपने 13 साल के प्रशासनिक सफर को याद करते हुए बेहद भावुक पत्र लिखा है. इसमें एक अफसर की उपलब्धियों से ज्यादा उस इंसान की संवेदनाएं हैं, जिसने सरकारी फाइलों के पीछे लोगों के चेहरे देखे, उनके संघर्ष को महसूस किया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना. IAS की नौकरी छोड़ते वक्त दिव्या की आंखें नम हैं, लेकिन लोगों के लिए देखे उनके सपने अब भी बाकी हैं.
पढ़िए, दिव्या मित्तल का यह भावनात्मक पत्र, उन्हीं के शब्दों में -
---
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
पत्रकार, लेखक त्रिभुवन जी की कलम से प्रख्यात कवि नंद चतुर्वेदी जी के जीवन पर लिखी गई जीवनी अब राजकमल प्रकाशन से शीघ्र ही पाठकों के बीच आने वाली है. राजस्थान की माटी से जुड़े एक संवेदनशील रचनाकार के जीवन को शब्दों में फिर से जीवंत करने का काम त्रिभुवन जैसा शब्द साधक ही कर सकता है.
मां तो मां है...
मेरे दोनों बच्चे लाई हूँ इनको भी मlर दो।
कल कितने सारे बच्चों के सर फोड़ें है आपने।
ये कहकर एक माँ #जंतरमंतर पर रो पड़ी।
#cjp #cjp_पार्टी #cjpprotest
देश के लिए गौरव का क्षण!
पहली बार भारत की किसी ग्राम पंचायत की सरपंच को BRICS जैसे वैश्विक मंच पर अपने गांव के विकास मॉडल को वैश्विक मंच के सामने रखने का अवसर मिला है। यह गौरव राजस्थान के झुंझुनूं की लांबी अहीर ग्राम पंचायत की 'हॉकी वाली सरपंच' नीरू यादव को हासिल हुआ है।
इससे पहले भी नीरू यादव संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन द्वारा स्पेशल गेस्ट के रूप में आमंत्रित की जा चुकी हैं।
गांव से ग्लोबल तक... यही है नए भारत की असली पहचान। 🇮🇳🌍
#BRICS2026 #NeeruYadav #HockeyWaliSarpanch
'द सूत्र' के पांचवें स्थापना दिवस पर बहुत बधाई और शुभकामनाएं। बहुत
कम समय में 'द सूत्र' ने राजस्थान और देश में पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कारवां लगातार बढ़ता रहे।
#Thesootr #foundationday #SootrKe5Saal














