महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
इस दिवाली हर दीपक से गूंजे #UGC_RollBack और #general_act की मांग!
कोई सवर्ण पटाखे बनाए तो एक दो पटाखे UGC ROLL BACK नाम से भी बनाए।
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
सभी क्रांतिकारी सवर्णों, समस्त देशवासियों और ज़ालिम सरकारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#UGCRollBack
#general_act
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
अब सब मुद्दों का हिसाब होगा।
दशकों तक जो जुल्म हमारे खिलाफ हुए हैं उन सब का हिसाब लेंगे।
#UGCRollBack
#general_act
अब सब मुद्दों का हिसाब होगा।
दशकों तक जो जुल्म हमारे खिलाफ हुए हैं उन सब का हिसाब लेंगे।
#UGCRollBack
#general_act
इस दिवाली हर दीपक से गूंजे #UGC_RollBack और #general_act की मांग!
कोई सवर्ण पटाखे बनाए तो एक दो पटाखे UGC ROLL BACK नाम से भी बनाए।
सभी क्रांतिकारी सवर्णों, समस्त देशवासियों और ज़ालिम सरकारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#UGCRollBack
#general_act
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए।
आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है।
#UGCRollBack
#general_act
ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए।
आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है।
#UGCRollBack
#general_act
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
क्या आपने कभी सोचा है कि इस देश में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और सवर्ण समाज को खुलेआम गाली देना कब से 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' और 'प्रगतिशीलता' का तमगा बन गया?
मंचों से माइक लगाकर, रैलियों में भीड़ जुटाकर और सोशल मीडिया के खुले प्लेटफॉर्मों पर दिन-रात "ब्राह्मणवाद", "ठाकुरवाद" की मनगढ़ंत परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं। इन तथाकथित परिभाषाओं की आड़ में असल निशाना किसी विचार पर नहीं, बल्कि उस परिवार पर होता है जिसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसने सामान्य वर्ग के घर में जन्म लिया है।
आज हर छोटे-बड़े नेता और यूट्यूबर को यह पता है कि सवर्णों को जितनी गंदी गाली दोगे, उनकी जाति और संस्कृति को जितना नीचा दिखाओगे, टीआरपी और सस्ती तालियां उतनी ही ज्यादा मिलेंगी। क्योंकि वे जानते हैं कि ऐसा करने पर उनका बाल भी बांका नहीं होगा!
इसीलिए 'जनरल एक्ट' (General Act) की ज़रूरत है।
कानूनी ढाल का एकतरफा होना:-
यदि किसी अन्य वर्ग के व्यक्ति के खिलाफ कोई असभ्य शब्द भी कह दे, तो कानून के तहत गैर-जमानती धाराएं, तत्काल गिरफ्तारी और जेल का रास्ता तय है। लेकिन जब खुलेआम सवर्ण जातियों के नरसंहार की धमकियां दी जाती हैं, उनके इतिहास और अस्तित्व को सार्वजनिक मंचों से अपमानित किया जाता है, तो प्रशासन सिर्फ मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता है।
नफ़रत की राजनीति पर लगाम:-
जब तक गाली देने वाले के मन में कानून का खौफ नहीं होगा, तब तक यह सुनियोजित अपमान कभी नहीं रुकेगा। 'जनरल एक्ट' किसी का हक छीनने के लिए नहीं, बल्कि सवर्ण समाज को उसी तरह की कानूनी सुरक्षा और स्वाभिमान देने के लिए चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति जाति के नाम पर ज़हर उगलने से पहले सौ बार सोचे।
सवर्ण समाज से एक सीधा और चुभता हुआ सवाल:-
क्या आप चाहते हैं कि यह नीचा दिखाने और गालियां सुनने का दौर यहीं खत्म हो, या आप अपनी आने वाली संतानों को भी यही विरासत सौंपना चाहते हैं?
ज़रा सोचिए, आज अगर आप खामोश रहे, तो कल आपके बच्चे जब स्कूल, कॉलेज और कार्यक्षेत्र में जाएंगे, तो उन्हें सिर्फ अपनी जाति में जन्म लेने के कारण हीनभावना, तानों और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ेगा। क्या आप चाहते हैं कि आपका बेटा या बेटी अपनी पहचान छिपाने पर मजबूर हो जाए?
अगर आपका जवाब 'नहीं' है, तो अब आत्मसंतुष्टि और कायरता की चादर फेंकनी होगी।
याचक बनकर दया की भीख मांगने का दौर बीत चुका है। अगर व्यवस्था SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने की हिम्मत नहीं रखती, तो उसे हर हाल में 'जनरल एक्ट' बनाकर सभी नागरिकों को बराबरी की कानूनी सुरक्षा देनी ही होगी।
जागो, संगठित हो और अपने बच्चों के स्वाभिमान के लिए आवाज़ बुलंद करो, अब एकतरफा अपमान बर्दाश्त नहीं होगा!
#UGCROLLBACK
#general_act
क्या आपने कभी सोचा है कि इस देश में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और सवर्ण समाज को खुलेआम गाली देना कब से 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' और 'प्रगतिशीलता' का तमगा बन गया?
मंचों से माइक लगाकर, रैलियों में भीड़ जुटाकर और सोशल मीडिया के खुले प्लेटफॉर्मों पर दिन-रात "ब्राह्मणवाद", "ठाकुरवाद" की मनगढ़ंत परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं। इन तथाकथित परिभाषाओं की आड़ में असल निशाना किसी विचार पर नहीं, बल्कि उस परिवार पर होता है जिसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसने सामान्य वर्ग के घर में जन्म लिया है।
आज हर छोटे-बड़े नेता और यूट्यूबर को यह पता है कि सवर्णों को जितनी गंदी गाली दोगे, उनकी जाति और संस्कृति को जितना नीचा दिखाओगे, टीआरपी और सस्ती तालियां उतनी ही ज्यादा मिलेंगी। क्योंकि वे जानते हैं कि ऐसा करने पर उनका बाल भी बांका नहीं होगा!
इसीलिए 'जनरल एक्ट' (General Act) की ज़रूरत है।
कानूनी ढाल का एकतरफा होना:-
यदि किसी अन्य वर्ग के व्यक्ति के खिलाफ कोई असभ्य शब्द भी कह दे, तो कानून के तहत गैर-जमानती धाराएं, तत्काल गिरफ्तारी और जेल का रास्ता तय है। लेकिन जब खुलेआम सवर्ण जातियों के नरसंहार की धमकियां दी जाती हैं, उनके इतिहास और अस्तित्व को सार्वजनिक मंचों से अपमानित किया जाता है, तो प्रशासन सिर्फ मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता है।
नफ़रत की राजनीति पर लगाम:-
जब तक गाली देने वाले के मन में कानून का खौफ नहीं होगा, तब तक यह सुनियोजित अपमान कभी नहीं रुकेगा। 'जनरल एक्ट' किसी का हक छीनने के लिए नहीं, बल्कि सवर्ण समाज को उसी तरह की कानूनी सुरक्षा और स्वाभिमान देने के लिए चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति जाति के नाम पर ज़हर उगलने से पहले सौ बार सोचे।
सवर्ण समाज से एक सीधा और चुभता हुआ सवाल:-
क्या आप चाहते हैं कि यह नीचा दिखाने और गालियां सुनने का दौर यहीं खत्म हो, या आप अपनी आने वाली संतानों को भी यही विरासत सौंपना चाहते हैं?
ज़रा सोचिए, आज अगर आप खामोश रहे, तो कल आपके बच्चे जब स्कूल, कॉलेज और कार्यक्षेत्र में जाएंगे, तो उन्हें सिर्फ अपनी जाति में जन्म लेने के कारण हीनभावना, तानों और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ेगा। क्या आप चाहते हैं कि आपका बेटा या बेटी अपनी पहचान छिपाने पर मजबूर हो जाए?
अगर आपका जवाब 'नहीं' है, तो अब आत्मसंतुष्टि और कायरता की चादर फेंकनी होगी।
याचक बनकर दया की भीख मांगने का दौर बीत चुका है। अगर व्यवस्था SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने की हिम्मत नहीं रखती, तो उसे हर हाल में 'जनरल एक्ट' बनाकर सभी नागरिकों को बराबरी की कानूनी सुरक्षा देनी ही होगी।
जागो, संगठित हो और अपने बच्चों के स्वाभिमान के लिए आवाज़ बुलंद करो, अब एकतरफा अपमान बर्दाश्त नहीं होगा!
#UGCROLLBACK
#general_act
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
अगर आज यही पर रुक गए तो
पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी।
#UGCRollBack
#general_act
