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Intense nighttime street performance in Punjab! A warrior in traditional blue attire swings a massive hammer, smashing large pumpkins placed among people lying on the ground as the crowd watches and films. Raw power, skill, and cultural energy on full display. ⚔️🔥
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UP के झांसी की रहने वाली नवविवाहिता को आखिर ऐसा क्या हुआ कि होटल में चेकआउट के बाद कमरे में जाते ही गिर गयी,और रहस्यमय तरीके से उसकी मौत हो गयी😭🙄
क्या इस मौत में उसके पति का हाथ हो सकता है🤔?
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Fashion isn't just about clothes; it's an artist's mindset and identity! ❤️🔥
Where skill meets creativity, a new trend is born! 💫
The true fashion designer is one who enhances people's personalities, not just their garments. 👑💯
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उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी...💕
फिल्म नया दौर से पेश है आपकी पुरानी यादों को तरोताजा करने वाली गीत! उड़े जब जब जुल्फें तेरी मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में ।
•| Song : Uden Jab Jab Zulfen Teri
•|Movie : Naya Daur (1957)
•|Singer : Mohd. Rafi & Asha Bhosle
•|Music Director : O.P Nayyar
•|Lyricist : Sahir Ludhianvi
•| Director : B.R Chopra
•|Film Star : Dilip Kumar, Vyjaintimala
In today's times, there is a different pleasure in listening to this song.
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She was never the one shattered, pure misdirection genius with the audience switch!
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देखिए कैसे नदी में 8 से 9 लड़के नहा रहे हैं और उनके साथ में एक लड़की भी ना रही है
आखिर लड़की की ऐसी क्या मजबूरी रही के उन लड़कों के साथ नहाना पड़ा।
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क्या आज इंसानियत से ज्यादा जरूरी पैसा हो गया है?
कल मेरा दोस्त अहमदाबाद से पटना जा रहा था। वह बिहार घूमने के लिए निकला था और उसने ट्रेन में 3AC का टिकट बुक किया था। उसे मिडिल बर्थ मिली थी।
सुबह करीब 8:05 बजे ट्रेन नंदुरबार स्टेशन पर रुकी। तभी एक महिला अपने 4 साल के छोटे बच्चे के साथ कोच में चढ़ी। उसके पास भी मिडिल बर्थ थी।
महिला ने देखा कि उसी कोच में एक लड़के के पास साइड लोअर बर्थ है। उसने विनम्रता से लड़के से कहा,
महिला: "बेटा, मेरे साथ छोटा बच्चा है। अगर तुम अपनी सीट मुझे दे दो और मेरी सीट पर चले जाओ, तो मुझे थोड़ी आसानी हो जाएगी।"
लड़के ने जवाब दिया, "मैंने इस सीट के लिए ₹2,395 खर्च किए हैं। मैं अपनी सीट क्यों दूं?"
महिला ने फिर अनुरोध किया, लेकिन लड़के ने ऐसी शर्त रख दी कि वह हैरान रह गई।
लड़का बोला: "पहले टिकट के 75% पैसे यानी ₹1,800 दो, फिर मेरी सीट पर आ जाना।"
महिला ने दुखी होकर कहा, "बेटा, मैं भी तो तुम्हें अपनी सीट दे रही हूं।"
लड़के ने जवाब दिया, "तो अपनी सीट पर जाओ और सो जाओ। मेरे पास क्यों आई हो?"
यह सुनकर महिला चुपचाप अपने बच्चे के साथ वापस अपनी सीट पर चली गई। 😔
मेरा दोस्त यह सब देख रहा था। उसे भी उस महिला और उसके छोटे बच्चे की हालत देखकर बहुत बुरा लगा। वह उसकी मदद करना चाहता था, लेकिन उस समय कुछ कर नहीं पाया।
अब आप ही बताइए, क्या हम इतने स्वार्थी हो गए हैं कि किसी की मजबूरी देखकर भी हमारा दिल नहीं पसीजता?
मैं यह नहीं कहता कि हर किसी को अपनी सीट छोड़ देनी चाहिए। हर यात्री ने अपने पैसे खर्च किए हैं और अपनी सुविधा का हकदार है। लेकिन किसी की परेशानी को समझना और थोड़ी इंसानियत दिखाना भी तो जरूरी है।
जरा सोचिए, अगर उस लड़के की अपनी मां या बहन छोटे बच्चे के साथ सफर कर रही होती और कोई उनके साथ ऐसा व्यवहार करता, तो उसे कैसा लगता?
याद रखिए, पैसा सीट खरीद सकता है, लेकिन अच्छे संस्कार और इंसानियत नहीं।
आपकी नजर में उस लड़के का व्यवहार सही था या उसे थोड़ी इंसानियत दिखानी चाहिए थी?
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A dangerous stunt involving a giant shark and surfing 🦈😱
But you will be amazed to see the CGI magic behind it
🤖 Made with AI
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उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की आर्थिक स्थिति को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। SSC और NEET की तैयारी कर रहे छात्र फीस, हॉस्टल और कमरे का किराया भरने के लिए अपना खून तक बेचने को मजबूर हैं। कोई महीने में 2 बार, तो कोई 4 बार तक खून बेच रहा है।
सोचिए, जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए, जिन आँखों में बड़े सपने होने चाहिए, वही छात्र अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए अपना खून बेच रहे हैं। आखिर गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए इतनी बड़ी कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है?
यह सिर्फ छात्रों की मजबूरी नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल है।
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Hey @grok , "Remove the best-looking Sita from this pic 😭


























