पशुधन और प्रकृति के साथ जुड़ाव ही हमारी संस्कृति की असली ताकत है। आइए, गोवंश सेवा और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर अपनी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाएं।
इस दीपावली पशु सुरक्षा व स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान… पशुशाला को साफ-सुथरा रखें और अपने बेजुबान पशुओं को पटाखों के शोर व धुएं से दूर सुरक्षित रखें। आपके जीवन और पशुधन में सुख-समृद्धि बनी रहे। पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं…
अपने बेजुबान पशुओं को पटाखों के शोर व धुएं से सुरक्षित रखें और पशुशाला को स्वच्छ रखें।
आपके जीवन में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहे … आपको और आपके समस्त पशुधन को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं…
पशुधन और पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण ही हमारे समाज की असली ताकत है। आइए, अपनी इन प्राचीन परंपराओं को सहेजें और गोवंश सेवा के साथ ग्रामीण व कृषि संस्कृति को पुनः मजबूत बनाएं।
असली धन स्वस्थ पशुधन! 🐄✨
पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से आप सभी को पावन पर्व धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई! उत्तम देखभाल और सही पोषण से अपने पशुओं को अपनी सच्ची समृद्धि बनाएं।
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दीवाली पर घरों में सजावट और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति बनाने के लिए गाय के गोबर का उपयोग करने से किसे बढ़ावा मिलता है?
अयोध्या के भव्य दीपोत्सव हेतु पशुपालन विभाग द्वारा भेजे जा रहे हैं विशेष गो-दीप… श्रीराम के आगमन की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दीपोत्सव अंधकार पर प्रकाश की विजय का दिव्य प्रतीक है। माननीय मुख्यमंत्री जी की गरिमामयी उपस्थिति में मनेगा यह महापर्व। सभी को दीपोत्सव की शुभकामनाएँ
गाय के गोबर से तैयार जीवामृत और घनजीवामृत का उपयोग करने से मिट्टी में केंचुए और मित्र जीवाणु तेजी से बढ़ते हैं, जिससे ज़मीन उपजाऊ बनती है और फसल की पैदावार बढ़ती है। आइए प्राकृतिक खेती अपनाएं, मिट्टी की सेहत बचाएं...
गाय के गोबर से बने इको-फ्रेंडली 'वैदिक दीये' जलाने से पर्यावरण को क्या मुख्य लाभ मिलता है?
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पारंपरिक भारतीय कृषि प्रणाली में गाय को केंद्र मानकर खेती करने से भूजल स्तर सुरक्षित रहता है और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सकता है। आइए गो-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाएं और पर्यावरण को सुरक्षित बनाएं।
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किस गाय के कान लंबे, पत्तीनुमा लटके हुए होते हैं और यह गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र की प्रमुख नस्ल है?
#ANIMALHUSBANDRY #UPGOVERNMENT \#PASHUPALAN #QuizKnock
किस गाय के कान लंबे, पत्तीनुमा लटके हुए होते हैं और यह गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र की प्रमुख नस्ल है?
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देशी गाय का गोबर और गोमूत्र किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इनके इस्तेमाल से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है।
विश्व में सबसे अधिक दूध देने वाली विदेशी गाय की नस्ल कौन सी है?
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उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित सम्मेलन में कुक्कुट पालन को उद्योग के रूप में स्थापित करने और अंडे के उत्पादन को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इससे प्रदेश में नए निवेश अवसर और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। #POULTRYCONCLAVE
आगरा में आयोजित पॉल्ट्री कॉन्क्लेव 2026 में आयुक्त श्री नगेन्द्र प्रताप (IAS), डीएम श्री मनीष बंसल (IAS), CDO श्री अमित कुमार (IAS) तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों डॉ. अनिल कुमार, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह व डॉ. बृजेश त्रिपाठी की उपस्थिति में कुक्कुट निवेश पर महत्वपूर्ण चर्चा
विदेशी नस्ल की कौन सी गाय अपने दूध में उच्च वसा (Fat) प्रतिशत के लिए जानी जाती है?
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रासायनिक उर्वरकों से मुक्त, गाय आधारित प्राकृतिक खेती (गोमूत्र, गोबर व जीवामृत) अपनाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रहती है, लागत घटती है, पर्यावरण सुरक्षित होता है तथा विषमुक्त, शुद्ध व पौष्टिक अन्न प्राप्त होता है। आइए, पशुपालन आधारित प्राकृतिक खेती अपनाएं।
यूपी सरकार की कुक्कुट विकास नीति से गगन सिंह ने 3,000 से 90,000 बर्ड्स तक का सफल लेयर फार्म स्थापित किया। पशुपालन विभाग के सहयोग और अनुदान से किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। #POULTRYFARMING #SUCCESSSTORY














