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उनकी निगाह-ए-तल्ख़ तबस्सुम में ढल गई
तज़दीद-ए-ऐतबार की सूरत निकल गई
वो मुस्कुरा के हाल मेरा पूछने लगे
ऐसा लगा कि आई हुई मौत टल गई
इक अजनबी ने उस को पुकारा था एक बार
फिर यूँ हुआ फ़कीर की क़िस्मत बदल गई
इक अधखिले कमल को जो इक आग ने छुआ
दो ज़िस्म आसमाँ में उड़े रुत बदल गई
~हरीश
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जो रन्जिशें थीं उन्हें बरक़रार रहने दिया
गले मिले भी तो दिल में ग़ुबार रहने दिया
गली के मोड़ से आवाज दे के लौट आए
तमाम रात उसे बेक़रार रहने दिया
- शकील आज़मी
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हौसला हो तो बात बन जाए
हौसला ही नहीं मगर मुझ में
#रहमान_फ़ारिस
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बेचैनी, बेक़रारी का सबब कुछ भी हो.!
पर राहत, क़रार, सुकून तुम ही हो...!!
#bina
@binakapur
#Sabab #Shair
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इक ऐसे शख़्स को तकना हमारा,
नहीं जो नाम तक लेता हमारा !!
तुम्हारे साथ रहते क्या ख़बर हो,
कहाँ पर लग गया कितना हमारा !!
सभी के सामने चूमा था उस ने,
बहुत मशहूर है क़िस्सा हमारा !!
~ मुक़ील बुख़ारी
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मुझे अब आ गए हैं नफ़रतों के बीज बोने
सो मेरा हक़ ये बनता है कि सरदारी करूँगा
#अब्दुर्राहमान_वासिफ़
मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
अब इस के बा'द मिरा इम्तिहान क्या लेगा
ये एक मेला है वा'दा किसी से क्या लेगा
ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा
मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा
कोई चराग़ नहीं हूँ कि फिर जला लेगा
~ वसीम बरेलवी
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ये जो हँसते हुए आँखों मे नमी आ जाये
दिल मे हर शख्स क़े इक कील गाड़ी होती हैं
इक क़बीला जिसे इंकार की आदत हैं बहुत
एक लड़की जो बहुत ज़िद पे अड़ी होती हैं
#वसीम_नादिर
Replying to @NayabSainiBJP
@NayabSainiBJP sir please look into GwalPahadi , we ansalValleyView society 940 families are dependent upon tanker water , there is no water pipeline
No infrastructure like public transport, roads are very bad , no traffic regulations
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सच नहीं अफ़साने सही
झूठ के ताने बाने सही
बना लो कुछ ठिकाने सही
अपने नहीं अनजाने सही
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
बशीर बद्र
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कोई था जो तुम्हारे लिए दूनिया से भिड जाता था,
बताओ तो जरा आज उसीको यूं हार कर कैसा लगता है!
वो एक शख्स तुम्हारे लिए रात रात भर जागा करता था....
बताओ तो जरा आज उसीकी याद में यूं जागना कैसा लगता है!!
#bina 2/2
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बताओ तो जरा किसी को यूँ गँवा कर कैसा लगता है,
बताओ तो जरा अपना आप यूँ गवाँ कर कैसा लगता है!
वो एक शख्स जो दिलोजान से क़ुरबान था तुम पर,
बताओ तो जरा उसीको यूँ गँवा कर कैसा लगता है!
#bina 1/2
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उसके चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था, मगर आधा लगा
- इफ़्तिख़ार नसीम✍️
कविता सेठ साहिबा की मख़मली आवाज़ में
यही शेर सुनिए 💐
शरद पूर्णिमा
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बात कहने के सौ तरीके हैं
कुछ न कहना भी इक तरीका है
#अमन_जोशी_अज़ीज़
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एक अरसे बाद तुम्हारे शहर में आना हुआ
एक अरसे बाद मुहब्बत से मुलाकात हुई।
- आरव
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अभी ठहरो ज़रा लगने दो दिल को
यही दुनिया तुम्हें अच्छी लगेगी
#पूजा_भाटिया
AQI should be renamed as API (Air Pollution Index). Because as the AQI increases air quality deteriorates. So it is pollution index not quality index.
@CPCB_OFFICIAL













