History Cell (@HistoryCell) header
History Cell (@HistoryCell) profile picture

Let's explore History through authentic facts and sources and bust the myths. Official youtube channel https://teapawt.net/t.co/V4CIzbjfph https://teapawt.net/t.co/mV7mpiFNBV

Joined December 2021
Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)Photo by History Cell (@HistoryCell)
History Cell retweeted
नेहरू कहां थे? मुख्यमंत्री योगी के इस सवाल पर कोई आश्चर्य नहीं! इसका जवाब बहुत सारे लोगों ने दे दिया है। खुद लखनऊ जेल के अधिकारी भी बता रहे हैं कि साहब यहां दर्ज है कि वे उस समय इस जेल में बंद थे। दूसरी क्लिपिंग। मगर इससे क्या? झूठ और अफवाहें फैला कर ही तो यह सत्ता में आए हैं। मोदी ने कहा था नेहरू पटेल की अंतिम यात्रा में नहीं गए थे। ‌ उसका भी फोटो दूसरे दिन आ गया था। देखें चित्र अंतिम। झूठ और अफवाहें फैलाने के लिए यह किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। और सबसे दिलचस्प तब होता है जब यह आपस में एक दूसरे खिलाफ इसका उपयोग करते हैं। उमा भारती वाजपेयी और कई नेताओं के खिलाफ कर चुके हैं। आगे भी करेंगे!
10
119
390
4,331
History Cell retweeted
योगी आदित्यनाथ जी, इतिहास के सवाल उठाने से पहले इतिहास पढ़ लेना चाहिए। आप पूछ रहे हैं कि चौरी-चौरा कांड के समय जवाहरलाल नेहरू कहां थे? जवाब है—वे अंग्रेजों की जेल में थे! 6 दिसंबर 1921 को गिरफ्तार हुए नेहरू 4 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की घटना के समय लखनऊ जिला जेल में बंद थे। 3 मार्च 1922 को रिहा हुए। जहां तक 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाए जाने का सवाल है, महामना मदन मोहन मालवीय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी पैरवी की। मोतीलाल नेहरू की भूमिका का भी ऐतिहासिक उल्लेख है। इतिहास का एक और तथ्य जान लीजिए—इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 1923 को 19 लोगों की फांसी की सजा बरकरार रखी, जबकि 38 लोगों को बरी किया और बाकी की सजाएं बदल दीं। इसलिए 172 लोगों को वास्तव में फांसी दे दिए जाने जैसा भ्रम पैदा मत कीजिए। इतिहास किसी दल की जागीर नहीं है। नेहरू से सवाल पूछिए, लेकिन तथ्यों को छिपाकर नहीं। और हां, जेल में बंद एक स्वतंत्रता सेनानी से यह सवाल पूछना कि वह अदालत में पैरवी करने क्यों नहीं आया, इतिहास की समझ नहीं, राजनीतिक प्रोपेगेंडा है।
53
416
24
1,026
22,148
योगी आदित्यनाथ जी, इतिहास के सवाल उठाने से पहले इतिहास पढ़ लेना चाहिए। आप पूछ रहे हैं कि चौरी-चौरा कांड के समय जवाहरलाल नेहरू कहां थे? जवाब है—वे अंग्रेजों की जेल में थे! 6 दिसंबर 1921 को गिरफ्तार हुए नेहरू 4 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की घटना के समय लखनऊ जिला जेल में बंद थे। 3 मार्च 1922 को रिहा हुए। जहां तक 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाए जाने का सवाल है, महामना मदन मोहन मालवीय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी पैरवी की। मोतीलाल नेहरू की भूमिका का भी ऐतिहासिक उल्लेख है। इतिहास का एक और तथ्य जान लीजिए—इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 1923 को 19 लोगों की फांसी की सजा बरकरार रखी, जबकि 38 लोगों को बरी किया और बाकी की सजाएं बदल दीं। इसलिए 172 लोगों को वास्तव में फांसी दे दिए जाने जैसा भ्रम पैदा मत कीजिए। इतिहास किसी दल की जागीर नहीं है। नेहरू से सवाल पूछिए, लेकिन तथ्यों को छिपाकर नहीं। और हां, जेल में बंद एक स्वतंत्रता सेनानी से यह सवाल पूछना कि वह अदालत में पैरवी करने क्यों नहीं आया, इतिहास की समझ नहीं, राजनीतिक प्रोपेगेंडा है।
53
416
24
1,026
22,148
History Cell retweeted
"आरएसएस के भाषण सांप्रदायिक उत्तेजना से भरे हुए होते है। देश को इस ज़हर का अंतिम नतीजा महात्मा गांधी की बेशक़ीमती ज़िंदगी की शहादत के तौर पर भुगतना पड़ा है।" -सरदार पटेल
32
395
10
1,297
15,221
"आरएसएस के भाषण सांप्रदायिक उत्तेजना से भरे हुए होते है। देश को इस ज़हर का अंतिम नतीजा महात्मा गांधी की बेशक़ीमती ज़िंदगी की शहादत के तौर पर भुगतना पड़ा है।" -सरदार पटेल
32
395
10
1,297
15,221
History Cell retweeted
लॉरेंस बिश्नोई को ‘लॉरेंस बिश्नोई साहब’ कहकर संबोधित करना केवल शब्दों का प्रयोग नहीं, बल्कि सम्मान की सामाजिक परिभाषा पर भी सवाल खड़ा करता है।
लॉरेंस बिश्नोई साहब?
1
9
31
2,488
लॉरेंस बिश्नोई को ‘लॉरेंस बिश्नोई साहब’ कहकर संबोधित करना केवल शब्दों का प्रयोग नहीं, बल्कि सम्मान की सामाजिक परिभाषा पर भी सवाल खड़ा करता है।
लॉरेंस बिश्नोई साहब?
1
9
31
2,488
History Cell retweeted
लॉरेंस बिश्नोई साहब?
3
21
4
69
8,258
लॉरेंस बिश्नोई साहब?
3
21
4
69
8,258
History Cell retweeted
"राजनीति में हिस्सा ना लेने का सबसे बड़ा दंड यह है कि अयोग्य व्यक्ति आप पर शासन करने लगता है।" -भीमराव अंबेडकर
4
117
1
463
5,122
"राजनीति में हिस्सा ना लेने का सबसे बड़ा दंड यह है कि अयोग्य व्यक्ति आप पर शासन करने लगता है।" -भीमराव अंबेडकर
4
117
1
463
5,122
History Cell retweeted
“गोडसे को कितना भी पूजो, आख़िर में बापू के रास्ते पर ही चलना पड़ेगा।” -तुषार गांधी
1
53
296
3,593
“गोडसे को कितना भी पूजो, आख़िर में बापू के रास्ते पर ही चलना पड़ेगा।” -तुषार गांधी
1
53
296
3,593
History Cell retweeted
प्रियंका गांधी के साथ नेहा बोरा।
1
13
51
1,846
प्रियंका गांधी के साथ नेहा बोरा।
1
13
51
1,846
History Cell retweeted
"मैं भारत में हर चुनाव हारने के लिए तैयार हूँ, मगर साम्प्रदायिकता और जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए हरगिज़ नहीं।" -जवाहरलाल नेहरू
16
418
7
2,002
13,608
"मैं भारत में हर चुनाव हारने के लिए तैयार हूँ, मगर साम्प्रदायिकता और जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए हरगिज़ नहीं।" -जवाहरलाल नेहरू
16
418
7
2,002
13,608
History Cell retweeted
अंत का आरम्भ हो चुका है ।
4
112
3
296
9,920
History Cell retweeted
इतिहास स्वयं को दोहरा नहीं रहा, बल्कि हमारे समय का आईना दिखा रहा है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को मुंबई में उस वक्त हिरासत में ले लिया गया, जब वे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अगस्त क्रांति मैदान जा रहे थे। विडंबना देखिए—जिस अगस्त क्रांति मैदान से 1942 में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का बिगुल बजा था, उसी ऐतिहासिक विरासत की ओर बढ़ते एक गांधीवादी को आज हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। इतिहास सवाल पूछेगा—सत्ता ने विरोध की आवाज़ को सुना या उसे रोकने की कोशिश की?
2
20
1
75
3,056
इतिहास स्वयं को दोहरा नहीं रहा, बल्कि हमारे समय का आईना दिखा रहा है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को मुंबई में उस वक्त हिरासत में ले लिया गया, जब वे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अगस्त क्रांति मैदान जा रहे थे। विडंबना देखिए—जिस अगस्त क्रांति मैदान से 1942 में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का बिगुल बजा था, उसी ऐतिहासिक विरासत की ओर बढ़ते एक गांधीवादी को आज हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। इतिहास सवाल पूछेगा—सत्ता ने विरोध की आवाज़ को सुना या उसे रोकने की कोशिश की?
2
20
1
75
3,056