
I Follow only #लाल बहादुर शास्त्री #भगत सिहँ #आजाद #सरदार पटेल #Uttrakhand #Uttranchal #Meerut #Uttarpradesh पहाड़ी हूँ, दिल करे तो follow करना 🙏
आपके दिल में
Joined September 2013
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SDG
Sustainable Development Goals:
17 Goals to Transform our World :
1) No Poverty
2) Zero Hunger
3) Good Health and Well Being
4) Quality Education
5) Gender Equality
6) Clean Water & Sanitation
7) Affordable Green Energy
8) Decent Work and economic Growth
Cont..
एक और कीर्तिमान - उत्तराखण्ड के नाम...
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में हमारी डबल इंजन सरकार के विकासोन्मुखी प्रयासों से आज हमारा प्रदेश अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्य (SDG INDEX) 2023-2024 की रिपोर्ट में उत्तराखण्ड का शीर्ष स्थान प्राप्त करना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
हमारी सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के समन्वय के साथ 'विकसित उत्तराखण्ड' की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। राज्य में पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करते हुए सर्वस्पर्शी एवं सर्वांगीण विकास करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इलेक्शन इन स्टेट
नेता आउट फ्रॉम स्लिप
चल झूठे!
कितनी बार थूक कर तो चाटा है हाईकमान के कहने पे 🤭🤭😄😄
माफी मांगने के बजाय इस्तीफा देना पसंद करूंगा।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने माफी मांगने के सवाल पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनसे कहा गया कि अगर हाईकमान माफी मांगने को कहेगा तो क्या करेंगे, तो उनका जवाब था कि मैं माफी मांगने के बजाय इस्तीफा देना पसंद करूंगा।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ नहीं है।
Voter_Kishor_Mathpal retweeted
A heartfelt salute to @vinodkapri bhai for #Pyre.
You chose a subject most people prefer to ignore the harsh reality of elderly parents living alone in the remote hills of Uttarakhand, left behind by migration, surviving in extreme conditions +
Replying to @Kishor_Joshi098
विनोद कापड़ी अपना पूरा लेफ्टिस्ट का एजेंडा जो चलाना था चला दिया
यही तो यह लोग चाह रहे थे
एक नेहा बोरा आलरेडी कोमराड बन चुकी है और भी अंकुर बोए जा रहे है पहाड़ की शांत वादियों में
Voter_Kishor_Mathpal retweeted
भले ही पहाड़ में आपकी कुड़ी फुगड़ी बांझा पड़ी हो, खेत-खलिहान उजड़ रहे हों, गांव के घरों पर ताले लटके हों और कभी गुलजार रहने वाले रास्तों पर आज सन्नाटा पसरा हो, लेकिन महानगरों में बैठकर पहाड़ की संस्कृति और गांवों की जिंदगी पर बनी फिल्म देखकर आंखों में आंसू भर लेना भी एक अलग ही तरह की Hypocrisy है।
दर्द सिर्फ फिल्म देखकर महसूस करने की चीज नहीं है। उस मिट्टी से जुड़ाव सिर्फ भावुक दृश्यों पर आंसू बहाने से साबित नहीं होता। असली सवाल तो यह है कि जिस पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और गांवों के उजड़ने का दर्द आपको पर्दे पर देखकर इतना विचलित कर देता है, उसी पहाड़ की हकीकत से आप कितने जुड़े हुए हैं?
जिस गांव की तस्वीर देखकर आपका दिल भर आता है, उस गांव में आज कितने लोग बचे हैं? जिन खेतों को देखकर आपको अपनी विरासत याद आती है, उन खेतों में आखिरी बार कब हल चला था? जिन परंपराओं को बचाने की कसमें आप सोशल मीडिया पर खाते हैं, उन्हें अपनी जिंदगी में बचाने के लिए आपने क्या किया?
पहाड़ का दर्द सिनेमा हॉल में आंसू बहाने से कम नहीं होगा। उसके लिए पहाड़ से जुड़ना होगा, अपनी जड़ों की तरफ लौटना होगा और कम से कम उन गांवों की सुध तो लेनी होगी, जिन्हें पीछे छोड़कर महानगरों में बस गए हैं।
क्योंकि पहाड़ कोई फिल्म की कहानी नहीं है, किसी निर्देशक का भावुक दृश्य नहीं है। पहाड़ आज भी जी रहा है, संघर्ष कर रहा है।
Voter_Kishor_Mathpal retweeted
बहुत चिंताजनक खबर है फिर से बोल रही हूँ तुरंत से रोक थाम के लिए कदम उठाए जाए !!
In the hilly areas of Uttarakhand, Girls are being brought in through human trafficking and pushed into prostitution.
#humantrafficking #Uttrakhand #NaariKe2Din #JusticeForAnkitaBhandari
हमारी सरकार आएगी तो इन्हीं हुक्मरा 6से जूते साफ करवाऊंगा
...... मदारणीय नेता – at Meerut, India
आज के हुक्मरानों को याद रहे जब वक़्त बदल जाता है तो तख़्त बदल जाता है।
आदरणीय आज़म ख़ान साहब के साथ मुक़दमों की जो साज़िश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं पूरी दुनिया देख रही है।
किसी उम्र दराज़ को इस तरह के बेमानी मुक़दमों में फँसाकर बार-बार जेल में डालना एक बेहद कायराना हरकत है।
आज की सत्ता जिस ग़लत रवायत को हवा दे रही है, हवा बदलने पर वो ख़ुद उसकी शिकार होगी। तब भागते नहीं बनेगा।
नाइंसाफ़ी जब हद से गुज़र जाती है तो जुल्म करनेवाले के लिए ही कहर बन जाती है।
बेहद निंदनीय!
दिक्कत है कि ये सब देश के उच्च सदन में नहीं करा जाता
वहां केवल शोर मचाया जाता है और वॉक आउट करा जाता है।
क्योंकि अपनी पार्टी का आयोजन है तो सब कुछ शांति से हो रहा है। – at Meerut, India
विपक्ष ने जन संसद नाम दिया है आज के आयोजन को लेकिन मीडिया ने उसे मॉक पार्लियामेंट नाम दिया है। ये आयोजन संसद में नहीं हो रहा, प्रतीकात्मक है। मॉक पार्लियामेंट भी हो चुकी भारत में 2010 में जिसमें भाजपा सांसद भी शामिल थे। वो सदन स्थगित होने के बाद सदन में ही लगाई गई थी इसलिए तत्कालिक स्पीकर मीरा कुमार ने आपत्ति की थी। ये सांकेतिक है इसलिए मीरा कुमार इसकी अध्यक्षता कर रही हैं।
लोकतंत्र में सांकेतिक परम्पराएं रही हैं। विश्व के कई देशों में पैरेलल पार्लियामेंट, पीपल्स पार्लियामेंट जैसे आयोजन हो चुके हैं। ब्रिटेन में तो शैडो कैबिनेट ही होता है जो वेस्टमिंस्टर व्यवस्था का हिस्सा है।
लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, स्पिरिट भी है।
नहीं आज़म खान जी,
ये गुनाह नहीं है,
>गुनाह के साथ साथ आपने मनमानी भी की है,
>डीएम आंजनेय कुमार को आपने जूती साफ करवाने को बोला
>जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी पैसों की लूट की
>जल निगम के चेयरमैन रहते हुए फर्जी भर्तियां हुई, जांच के बाद पूरी भर्ती रद्द हुई।
गुनाहों की सजा भले ही अदालत माफ कर दे, कर्मों की सजा जरूर मिलती है।
ये आपके कर्मों की सजा है।
Rampur, Uttar Pradesh: After being released from Rampur jail, Samajwadi Party leader Azam Khan says, "What is there left to say? What can I say? The law has ceased to exist. This is the punishment for being a Muslim? Our mistake was that a university was built by a Muslim. That is our crime. We built schools for children. Is that our crime?"
देश के महान नेताओं में शामिल आजम खान के साथ बहुत ज्यादती हो रही है 🤭🤭 – at Meerut, India
किसी के साथ ज़्यादती की एक सीमा होती है लेकिन यहाँ तो वो भी नहीं।आज़म खान के पुत्र अब्दुल्ला को सुनिए,,
“मेरे पिता ने एक गुनाह किया था, और वो रामपुर में एक शिक्षण संस्थान स्थापित करने का ख़्वाब, ताकि युवाओं को तालीम मिल सके। उसी गुनाह की सजा आज तक भुगत रहे है।
अस्पताल का रिकॉर्ड है, माँ की मेटरनिटी लीव है और मेरी बदनसीबी देखिए, मैं सात सालों में यह साबित नहीं कर सका कि मैं अब्दुल्ला हूँ।
@AbdullahAzamMLA @yadavakhilesh
Voter_Kishor_Mathpal retweeted
और फिर आपकी पार्टी ने उन्हें सप्रेम पद्म विभूषण दे दिया।
आज 30 अक्टूबर है। आज ही के दिन सपा के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जी ने 1990 में रामभक्तों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर नरसंहार करने का काम किया।
अखिलेश यादव एंड कंपनी ये मानती है कि यूपी की जनता ये भूल गई।
अखिलेश बाबू, आप तो क्या, आपकी तीसरी पीढ़ी तक यूपी की जनता आपको माफ नहीं करेगी: माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी
न्याय तो फिर भी नहीं मिलना लोगो को!!!!! – at Meerut, India
7 जुलाई को ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) 21 हुआ। इसमें वही बैठ सकता है, जिसने LLB किया हो। भारत में 1.75 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। यूपी में संख्या करीब 16K रही। इसमें 13K अभ्यर्थी पास भी हो गए।
पहले एक नवंबर तक सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) जैसा नियम नहीं था। इसमें बहुत सारे अभ्यर्थी बिना बार में पंजीकरण शामिल हो गए। अब UP बार ने एक नवंबर से नया नियम बनाया है कि जिसका COP नहीं है, उसे पंजीकरण के बाद कम से कम 6 महीने के लिए 10 साल से काम कर रहे अधिवक्ता के यहां 6 महीने प्रैक्टिस करनी होगी। उन्हीं के लेटर हेड पर वह प्रमाणित होगा। उसके बाद COP जारी होगा।
अब दिक्कत ये है कि ऑल इंडिया बार एग्जाम की वैलिडिटी 6 महीना है। लगभग तीन महीने गुजर चुके हैं। अभी बहुत सारे अभ्यर्थियों के पंजीकरण नहीं हुए हैं। न उन्हें पंजीकरण का सर्टिफिकेट मिला है।
जब तक सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा, तब तक सीओपी नहीं होगी। इसमें 3500 रुपये फीस अलग लेते हैं। किताबे अलग..एग्जाम सुपर लेवल का होता है। अब जिन हजारों अभ्यर्थियों का पंजीकरण नहीं हुआ है, उन्हें तो दोबारा फीस देनी होगी। दोबारा तैयारी करनी होगी...दोबारा ही सबकुछ होगा।
वाहन चलाने वाली सड़कों पर कब्जा करके पार्किंग और दुकान चलाने वालों को नहीं देख पाती है ये सुप्रीम कोर्ट।
@LiveLawIndia – at Meerut, India







































