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Dostoyevski tenía razón. Nada mata más el alma humana que estar en el lugar equivocado rodeado de las personas equivocadas.
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Dearest, I beg of you, sleep properly, go for walks.
Remain calm, calm.
Franz Kafka, 1912.
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Please let yourself be kissed by me, for a long time and as calmly as possible
Franz Kafka, 1913.
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🚨 URGENT HELP: MISSING PERSON
Name: Devpalik Gupta
Train: Jan Shatabdi Express (12366)
PNR: 6511266869
Coach/Seat: C2 / 50 (WS)
Route: Ranchi to Patna Junction
He went missing from the moving train before Muri Junction.
If anyone has seen him or has contacts at Muri Junction Railway Station or with GRP/RPF, please help urgently.
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"There are many causes that I am prepared to die for but no causes that I am prepared to kill for."
Remembering Mahatma Gandhi on the 157th anniversary of his birthday. Gandhi was nominated for the #NobelPeacePrize on 12 occasions.
Read more: bit.ly/2Phsg2V
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Replying to @DrBS07
कॉस्मोलॉजी से लेकर जीनोम संरचना तक दुनिया भर का विश्लेषण आप करते हैं, यहाँ मति मारी गयी है? दूसरों का विश्लेषण आपको पचेगा???
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What is Brahminical Patriarchy?
Is it distinctly different from patriarchal mindset that exists in other caste and religious identities in every part of India? Asking for a friend.
Also curious if other south Asian countries battling with patriarchal mindset also have a religion or caste identifier for it?
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मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?






































