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Ghaziabad, India
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पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं...
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं !!!
#Miss_You_Papa
#FathersDay #happyfathersday2023 #HappyFatherDay
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भोपाल में अपने पांचजन्य के सुशासन संवाद मध्यप्रदेश कार्यक्रम में सहभागिता की।
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Delighted to receive a copy of
"Hey Ram"
by renowned journalist & author @Prakharshri78 Shrivastava via post
Thnx a lot , Prakhar Sb, for this thoughtful gesture
Looking forward to diving into it.
#HeyRam #CurrentRead #IndianHistory
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In 1968, R. C. Majumdar warned against turning Indian history into an instrument of political ideology. His message was stark: a nation cannot build its future on historical falsehood. Here is his FULL, UNEDITED SPEECH.
youtu.be/t92ejqqywbY
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इरफान हबीब: मुगलई डिस्टोरियन जिसने हिंदू कत्लेआम को वर्ग संघर्ष के रूप में स्थापित किया
इरफान हबीब को पढ़ना एक जादू देखना है। हाथ में फारसी स्रोत, मुँह पर मार्क्स का सिद्धांत, और बीच में से मजहब गायब। उसे वर्ग संघर्ष का नाम दे दिया ताकि मामला प्रगतिशील लगे, कत्लेआम रोमांटिक लगे।
उसका सबसे बड़ा काम मुगल भारत की कृषि व्यवस्था इसी जादू की नींव है। इसमें उसने सिद्ध किया कि मुगल साम्राज्य जागीर संकट और लगान के दबाव से गिरा। पर उसी किताब में मुगल साम्राज्य के शोषण का मजहबी हथियार जैसे जजिया, तीर्थयात्रा कर, मंदिरों की जमीन जब्त कर वक्फ बनाना, जबरन मतांतरण एक फुट नोट भी नहीं।
ऐसा क्यों, क्योंकि अगर जजिया का जिक्र कर दे तो मानना पड़ेगा कि किसान सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं, धार्मिक रूप से भी निचोड़ा गया। साकी मुस्तइद खान लिख गया है कि जजिया का मकसद हिन्दुओं को अपमानित करना था। इस एक पंक्ति से पूरा वर्ग-संघर्ष का ढांचा गिर जाता है, इसलिए वह पंक्ति किताब में नहीं आती।
हबीब लिखता है मंदिर लूटे गए क्योंकि वे खजाना थे। पर खुद उसी के पढ़े हुए फारसी स्रोत में औरंगजेब का 1669 का फरमान है - काशी, मथुरा, सोमनाथ में काफिरों के विद्यालय और मंदिर तोड़ दो। इसमें खजाने का जिक्र नहीं, कुफ्र का जिक्र है। हबीब फरमान जानता है पर अनुवाद बदल देता है और इसे राजनीतिक विद्रोह दबाना बता देता है।
भारतीय इतिहास कांग्रेस में 1998 में भगवाकरण के विरुद्ध प्रस्ताव लाकर खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदार बना लिया पर उसी प्रस्ताव में मांग नहीं की कि मुगल काल के फारसी इतिहास में जो हिन्दुओं को काफिर, मुशरिक, हरबी लिखा है उस पर भी चर्चा हो। धर्मनिरपेक्षता एकतरफा हो गई , हिन्दू राष्ट्र की आलोचना करो, दार-उल-इस्लाम की नहीं।
यही धूर्तता है, सच को धुंधला कर देना, आधा सच बोलना। इसी आधे सच से 60 वर्ष तक भारत के बच्चे पढ़ते रहे कि मध्यकाल में सब आपस में भाई-भाई थे बस जागीरदार खराब था। उन्हें बताया ही नहीं कि उसी काल में काशी में विश्वनाथ नहीं था क्योंकि तोड़ दिया गया था, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर ईदगाह थी, नालंदा में किताबें तीन महीने तक जली थीं और सोमनाथ के शिवलिंग को गजनी की मस्जिद की सीढ़ियों में गाड़ दिया गया ताकि रौंदा जा सके।
और जब यह आधा सच पकड़ा जाता है तो दूसरा औजार निकलता है, मिलावट। जो स्रोत में नहीं था वह जोड़ दिया। कहीं भी मंदिर को खजाना नहीं लिखा पर हबीब ने जोड़ा। कहीं गंगा-जमुनी तहजीब नहीं लिखी हबीब ने जोड़ी। अलबरूनी 1030 में किताब-उल-हिंद में हिन्दू को अलग पहचान लिख गया पर हबीब ने लिखा हिन्दू पहचान अंग्रेजों ने बनाई। 1857 के जिहाद वाले फतवे ब्रिटिश संग्रहालय में रखे हैं पर हबीब ने लिखा यह किसान विद्रोह था। धर्मसूत्र का आधा श्लोक उठा कर लिखा ब्राह्मण गोमांस खाते थे, अगली पंक्ति जिसमें गोहत्या को महापाप लिखा है छोड़ दी।
जब कैंची और मिलावट दोनों पकड़ी जाएं तो तीसरा चेहरा आता है। 28 दिसंबर 2019 कन्नूर विश्वविद्यालय, 80वीं भारतीय इतिहास कांग्रेस का मंच। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मौलाना आजाद को उद्धृत कर रहे थे, हबीब उठा और कुर्सी छोड़ कर सीधे राज्यपाल की तरफ बढ़ आया, सहायक की कमीज फट गई, सुरक्षा गार्ड को आना पड़ा। राज्यपाल ने कहा वह सीधे मुझ पर हमला करने आया, यह काम सड़क के गुंडे का है।
किताब में जो काम कैंची करती थी मंच पर वही हाथ करने लगा। मार्क्स की आड़ में मध्यकालीन मजहबी हुकूमत का वकील जो पहले फाइल से अपराध की धारा गायब करता है और जब न्यायाधीश पकड़ ले तो न्यायाधीश पर ही चढ़ जाता है।
यही पैटर्न है इन डिस्टोरियंस का जिसे वे पूरे भारत में लागू करने का स्वप्न देखते है।
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Umar Khalid’s thesis is added as a book at IISER, Pune.
This is a central government institution for science research.
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डरो मत अरविंद !
अभी हमने बस चलाने में तुमको मिल रहे कमीशन की जाँच नहीं खुलवाई है।
पिछले वर्षों में देश भर में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की दुर्घटनाओं में नागरिकों को अपने प्राण गंवाने पड़े हैं।
इन घटनाओं की हमने जाँच करवाई हैं और हमारी जाँच मे हमें देश में बसों के लिए सुरक्षा मानक निर्धारित करने वाली नामचीन संस्था CIRT पुणे ने बताया है कि स्लीपर बसों में ड्राइवर और सवारी के बीच में पार्टीशन होना खतरनाक है और सुरक्षा गाइडलाइन के खिलाफ है।
एक दुर्घटना में तो बस में पीछे आग लग गई थी और ड्राइवर को आग लगने का पता ही नहीं चला था ।
हम पिछले एक साल से लगातार ऐसी अमानक बसों के विरुद्ध कार्यवाही कर रहे हैं और देश भर में ऐसी 1000 बसों को संचालन से हटवाने अथवा प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करवाई है ।
हमारी कार्यवाही के दौरान पंजाब के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने जनवरी 2026 में यह जवाब भी भेजा है जिसमे उन्होंने लिखा है कि राज्य में कोई स्लीपर कोच बस रजिस्टर्ड ही नहीं है ।
यह उत्तर विरोधाभासी है इसलिए बस कैसे चल रही है यह तो जानना होगा इसलिए हमने जांच के लिए लिखा है क्योंकि एक एक नागरिक का जीवन बहुमूल्य है।
तुम इतने लालची और मूर्ख हो कि अपने कमीशन और तानाशाही के लिए मासूम नागरिकों के जीवन से खेल रहे हो।
कमीशन मत लो और सुरक्षित बस में यात्रा करवाओ इतनी ही तो बात है।
तुम्हारी अराजकता और तानाशाही से यदि किसी नागरिक की जान को खतरा हुआ तो तुम फिर से जेल जाओगे।
ये पढ़िए।
देश की सबसे बड़ी मानवाधिकार संस्था NHRC ने अपने जीवन में पहली बार बसों की चेकिंग की है। कौन सी बसें? पंजाब के लोगों को तीर्थयात्रा करवाने वाली सुपर डीलक्स बसें। उनमे क्या कमी मिली? जैसे ड्राइवर और यात्रियों के बीच पार्टीशन क्यों है? क्या NHRC ने यूपी रोडवेज की बसों की जाँच की। नहीं। क्या उन्होंने किसी और राज्य की रोडवेज की बसों की जाँच की? नहीं। केवल पंजाब की तीर्थयात्रा वाली सुपर डीलक्स बसों की जाँच की।
मोदी जी, क्यों बुजुर्गों की तीर्थयात्रा रोकने पे लगे हो? क्यों बुजुर्गों की हाय लेते हो? बहुत पाप लगेगा। गालियाँ देंगे सभी पंजाबी आपको।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सौरव दास ने ग्रेटर कैलाश के एक घर के रेंट एग्रीमेंट को अपने बाँड में जमा किया है। पुलिस को ये दस्तावेज असली नहीं लग रहा है।
ये 64 साल पुराना वर्ष 1962 का LP रिकॉर्ड है... इतने साल बाद भी इसकी खनक बरकरार है... और लीजेंड सिंगर कुंदन लाल सहगल की भी...
Song: Jab Dil Hi Toot Gaya
Movie: Shahjehan
Singer: Kundan Lal Saigal (K. L. Saigal)
Music Director: Naushad Ali
Lyricist: Majrooh Sultanpuri
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SCRIPT शंघाई की… चेहरा दिल्ली का?
France के protests से लेकर Jantar Mantar तक… क्या वाकई इन आंदोलनों के बीच कोई international network काम कर रहा है?
Neville Roy Singham, Vijay Prashad, Progressive International, BreakThrough News और CJP के बीच connections क्या हैं? और इन connections के सबूत क्या बताते हैं?
देखिए The Pamphlet की पूरी रिपोर्ट।
@india_expert
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CJP spokesperson Ratna Singh apologises before court for making derogatory remarks against the Judiciary
opindia.com/news-updates/cjp…
Here is what happened
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🤣 Looks like someone skipped a few important lessons at school 😂
The confidence is impressive, but the logic seems to be on a vacation. Sometimes, the delivery is more entertaining than the actual argument🤦♂️🤣
Watch and enjoy 🤣🤣🤣🤣
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क्या PM आवास के पास केवल मस्जिद को ही मिला तोड़ने का नोटिस?
दो मंदिरों को भी मिले हैं नोटिस फिर मुस्लिमों पर अत्याचार का प्रपंच क्यों फैला रहा वामी-इस्लामी गिरोह?
सेंसिटिव ज़ोन में सुरक्षा के लिए खाली करवाई जा रही हैं जमीनें, @Cawnpore_Journo की रिपोर्ट
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नई दिल्ली की रेस कोर्स की मस्जिद के पास लगा वामपंथी मीडिया का जमावड़ा, किसी ने नहीं दिखाया कि मंदिर भी टूट रहे
'मस्जिद शहीद' गैंग ने छुपाई हर शख़्स को 1BHK का फ़्लैट पुनर्वास में मिलने की बात
@Cawnpore_Journo बता रहे पूरी सच्चाई
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🚨🚨BREAKING: Court records that another lady CJP leader had given a media byte undermining the authority of the court. She given an undertaking before the Court for such conduct and has also undertaken that such conduct will not be repeated.
वामपंथी लोग हत्यारे और डकैत हैं - सरदार पटेल
आशुतोष जैसे लोग बहुत चालाक होते हैं... बात होना चाहिए थी वामपंथियों पर सरदार पटेल के विचारों की... ये आरएसएस पर सरदार पटेल का एक बयान ढूंढ कर ले आए... जिसे इन लोगों ने बार बार बोलकर बासी बना दिया है... इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों इन जैसे लोगों को कम्युनिस्टों पर सरदार पटेल महान विचार बताए जाएं...
#RSS #Sardar_Patel
तारों में सजके अपने सूरज से
फिल्म: जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली (1971)
गायक: मुकेश
संगीत: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
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जब मैंने हिंदू कैफ़े शुरू किया था, तब संसाधन के नाम पर गुरु कृपा थी और राम जी का आशीर्वाद था। शुरू करते टाइम बहुत कुछ सोचा नहीं था। सीताराम जी गोयल की लिखी सारी किताबें पढ़ी थीं और मन में अकुलाहट थी कि ये सब लोगों को पता क्यों नहीं है, जो सीताराम गोयल जी ने लिखा है? तो मैंने सोचा, कुछ नहीं तो मैं ही पढ़-पढ़कर लोगों को कहानी की तरह सुनाऊँगा। ऐसे ही हिंदू कैफ़े की शुरुआत हुई थी।
तब दिमाग़ में बहुत आइडियाज़ आते थे। एक बार किसी ने मिलने बुलाया और पूछा कि हिंदू कैफ़े को लेकर क्या प्लान है? तो मैं और मेरे मित्र बताने लगे कि ये करना चाहते हैं, वो करना चाहते हैं। उन्होंने पूरी बात सुनी और फिर अंत में बोले, “तुम लोगों को पता भी है कि तुम 7-8 जने हिंदुओं की 70-80 प्रतिशत से ज़्यादा समस्याएँ समाप्त करने की बातें कर रहे हो?”
अब हमें समझ नहीं आया कि भाई ने बेइज़्ज़ती की थी हमारी या तारीफ़। पर हम अपनी सुनाकर और उनकी सुनकर वापस लौट आए।अच्छा जो जो हमने सोचा था वो इसलिए नहीं कर पाते थे क्यूँकि संसाधन के नाम पर कुछ था ही नहीं। पर मन में एक बात थी की जिस दिन राम जी की कृपा हुई और संसाधन का जुगाड़ हुआ सिस्टम हैंग कर देंगे।
धर्मपाल जी कहते थे, “मैं तो बूढ़ा हो गया हूँ, तुम सब तो जवान हो। पलट क्यों नहीं देते इस सिस्टम को?”
उनके और तमाम उन अनाम-गुमनाम योद्धाओं के स्वप्नों को साकार करने के लिए आज विजयादशमी के पावन अवसर पर उन तमाम आइडियाज़ में से एक का आरम्भ करते हैं। आइए कुछ बिल्ड किया जाए।
इच्छुक Brothers in Arms का स्वागत है।
जय श्री राम! @thedossier_in
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