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ब्राह्मण संप्रदाय में शास्त्र ही प्रमाण है जबकी बुद्ध धम्म में शास्त्र तब तक प्रमाण नहीं माना जाता जबतक की वो तर्क बुद्धि विवेक पर खरी न उतरे।
यानी कोई किताब खोल कर सबूत दिखाए तो ब्राह्मण संप्रदाय में सबूत मान लिया जाएगा लेकिन बुद्ध धम्म में तब तक उसे सबूत नहीं माना जाता जब तक कि वो मानवता की भलाई के लिए न हो।
रेफ़्रेंस संलग्न है ख़ुद पढ़ लेवे।
Critical Historical Questions on the Vedic Period:
1. Vedic Geography: In which regions of ancient India did Vedic culture first emerge, and what archaeological evidence establishes its chronology?
2. Indigenous Populations: Who inhabited these regions before the Vedic period? What were their civilizations, social structures, religions, languages, and writing systems?
3. Vedic Language and Script: Which language and script did the Indo-Aryan-speaking groups bring to India? Did they possess a writing system, or was Vedic Sanskrit initially an oral tradition?
4. Origins of the Varna System: Did these groups arrive with the fourfold Varna system (Brahmin, Kshatriya, Vaishya, and Shudra), or did this hierarchy develop in India through interactions with indigenous populations?
5. Brahminical Authority: Did Brahmins arrive as an established hereditary priestly class, or did Brahminical priesthood and social authority develop gradually within India?
6. Indigenous Cultural Acceptance: Why and how would pre-existing Indian populations adopt Vedic language, religion, and social customs? Was this a voluntary, gradual, or politically influenced process?
7. Non-Vedic India: While Vedic culture developed in northern western India, which civilizations, languages, scripts, and religious traditions existed across the rest of the subcontinent?
8. Origins of Pali and Prakrit: When, where, and how did Pali and Prakrit develop? Were they products of indigenous linguistic traditions, Indo-Aryan linguistic evolution, or interaction between different communities?
9. Languages of Common People: How did Pali and Prakrit become widely used languages? Did their spread require Brahmanical approval, or did they develop independently through ordinary communities and non-Vedic religious movements?
10. Historical Evidence: What are the earliest securely dated archaeological, inscriptional, and manuscript records of Vedic Sanskrit, Pali, and Prakrit, and what do they actually establish?
11. Approximately how many Indo-Aryan-speaking (Vedic) people migrated into northwestern India, and what archaeological, genetic, or historical evidence supports these estimates?
12. Did these incoming groups engage in conflicts, wars, or struggles for political and social dominance with the pre-existing indigenous populations?
Or did the indigenous inhabitants peacefully accept the newcomers’ religious authority and fourfold Varna system, voluntarily allowing themselves to be classified as socially inferior?
Kindly look at these questions critically.
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी व्याख्या से गपोड़े वैसे ही तले जाते है जैसे समोसे बेचने से रोगजार की समस्या हल बताना।
@devduttmyth ऐसी ही गपोड़े छानता है क्योकि उसे पता है स्त्री होने का मतलब ही है पुरुषों की गुलाम बने रहना या किसी न किसी पुरुष के अंदर रहना।
उसे महिलाओं के स्वतंत्र आइडेंटिट से ही चिढ़ है।
थेरीगाथा में महिलाओ ने अपने दर्द बयान किए है जो उन्हें समाज से मिला है जो उन्हें मर्दो से मिला है चाहे वो पिता हो पति हो या भाई।
इसलिए वो समाज के बनाये ताने बाने से मुक्त हो रही है। अब पितृसत्तामक मर्दवादी सोच को दर्द तो होगा ही। क्योकि अब तक पुरुष ही स्वतंत्र होकर भी रह सकता था साधु संन्यासी बन सकता था लेकिन अगर अगर महिला ऐसा करेगी तो दर्द तो होगा ही🤡
आज बौद्ध धर्म को भीतरी शांति का सबसे बड़ा रास्ता बताया जाता है, और थेरिगाथा को स्त्री-मुक्ति का पुराना दस्तावेज़। देवदत्त पटनायक इस आसान तस्वीर पर सवाल उठाते हैं। वह थेरिगाथा की कवयित्रियों को याद करते हैं: सुमंगलमाता, जो ओखली-मूसल और मारपीट करने वाले पति से छुटकारे का गीत गाती है, और अंबपाली, जो बुढ़ापे में अपने शरीर को घिनौना बताती है। उनका तर्क है कि भिक्षुणी बनने की शर्त थी स्त्री होना ही छोड़ देना, क्योंकि ग्रंथ स्त्री-देह को ही गंदा और भटकाने वाला मानते थे। यह कॉलम इसलिए पढ़ने लायक़ है कि यह मनुस्मृति बनाम थेरिगाथा वाले सस्ते फ़र्क़ को तोड़ता है: दोनों स्त्री से बेचैन हैं, बस एक उसे काबू में रखना चाहता है, दूसरा उसकी इच्छा ही मिटाना।
@devduttmyth
deshkaal.xyz/vishesh/devdutt…
माइथोलॉजी रामायण और महाभारत में लाखो साल का अंतर है तो बताओ @grok दोनों में कौन कौन से ऋषि तथा अन्य चरित्र पाए जाते है। सबके नाम लिस्ट करो।
त्रेतायुग में जामवंत (भालुओं के राजा) की चर्चा राम के साथ है फिर लाखो साल बाद द्वापरयुग के आखिर में कृष्ण को दामाद बना लेते है जामवंत।
@grok बताओ हिंदू कई लाखो साल के अंतर को माइथोलॉजी में एक साथ लिखने की गपोड़ कल्पना को क्यो समझ नहीं पाते?
Ye क्या और क्यो चल रहा है ? @grok संलग्न वीडियो कब की है फैक्ट चेकिंग करके विस्तार से बताओ
झांसी में किन्नर समुदाय का प्रदर्शन, 5 गिरफ्तार!
झांसी में बधाई क्षेत्र को लेकर दो गुटों के विवाद ने तूल पकड़ लिया।
SSP कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया गया।
पुलिस ने 4 किन्नरों और 1 महिला को गिरफ्तार किया है।
सुनवाई न होने की शिकायतों के बीच अब सवाल यह है कि विवाद की निष्पक्ष जाँच कर समाधान कब होगा?
#Jhansi
#UPNews
ये क्या चल रहा है @grok फैक्ट चेकिंग करो
भगवद गीता कब किसने लिखी?
क्या कृष्ण ने भगवद् गीता रची थी?
महाभारत कब किसने लिखा था?
कौरव पांडव के बीच के लड़ाई एक्चुअली में किन राजाओ के बीच की लड़ाई का ब्राह्मणीकरण है?
इन तमाम मुद्दों पर लेटेस्ट रिसर्च देखे
आज शाम 8pm, 22 Oct 2026 on Rational World YouTube channel.
व्हाट्सएप गपोड़ पढ़ने का नतीजा ही ये पोस्ट है।
पोस्ट में किया गया क्लेम की बुद्ध से पहले जैन के २४ तीर्थंकर थे अपने आप में विवादित है।
ऋषभदेव की चर्चा ऋग्वेद में है क्यो न होगा क्योकि ऋग्वेद ख़ुद 1464 में पहला लिखित कुछ अंश मिला है। इससे न तो ऋषभदेव पुराने साबित हुए न ऋग्वेद।
बाक़ी के लिए Thursday 8pm Rational World Youtube live me जुड़कर डिबेट क्यो नहीं कर लेते।
अभी एक भाई बहस कर रहा था कि जहाँ खोदोगे वहीं से बुद्ध जी से सम्बंधित कुछ न कुछ मिलेगा आपको। इसका अर्थ है कि केवल बुद्ध ही सत्य हैं और सबसे पुरातन हैं।
उसको जो जो समझ आया वो उसने बताया और चुपचाप सुनता समझता रहा.. फिर उससे दो तीन सवाल किया और उसे तर्क़ देते हुए चीज़ें समझाया तब जाकर वो माना कि उसकी बातों में क्या ग़लती थी..
- जैन धर्म के आख़िरी यानी 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जी थे, जिनके समकालीन थे भगवान बुद्ध जी। भगवान गौतम बुद्ध जी उम्र में भगवान महावीर जी से बड़े थे। पर यहाँ मुद्दे की बात ये है कि उनसे पहले 23 और तीर्थंकर हो चुके थे यानी बौद्ध धर्म शुरू होने बहुत पहले से जैन धर्म था।
[ जैन धर्म बौद्ध धर्म से अधिक प्राचीन है। जहाँ बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध (लगभग 563 ईसा पूर्व) ने की थी, वहीं जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी (लगभग 877–777 ईसा पूर्व) और प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी वैदिक काल से भी पहले से मौजूद थे।
ऐतिहासिक विवरण में देखा जाए तो आइये...
• जैन धर्म: जैन परंपरा के अनुसार यह धर्म शाश्वत है। ऐतिहासिक रूप से 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी बुद्ध जी से लगभग एक शताब्दी पहले हुए। और तो और ऋग्वेद में भी प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी का उल्लेख मिलता है। इसका मतलब ये है कि वेद बहुत पहले से था बौद्ध धर्म के।
• बौद्ध धर्म: इसकी शुरुआत गौतम बुद्ध द्वारा छठी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 563 ई.पू. में लुंबिनी में जन्म) में हुई। ये महावीर जी के समकालीन थे।
सम्राट अशोक जी का नाम भी सब ख़ूब लेते हैं तो आइए बात करते हैं,
सम्राट अशोक बौद्ध धर्म अपनाने से पहले शैव धर्म (भगवान शिव के उपासक) के अनुयायी थे। कल्हण की किताब 'राजतरंगिणी' और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, वे प्रारंभ में भगवान शिव जी की पूजा करते थे। 261 ईसापूर्व उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया क्योंकि कलिंग के रक्तपात ने उन्हें विचलित कर कर दिया। भेरीघोष युद्ध नीति को त्यागकर धम्मघोष को अपनाया।
देखो सुनी सुनाई बातों पर मत जाओ, साफ़ समझो हम सब एक ही हैं बस सबके सोचने का तरीक़ा अलग है और सबकी समझ अलग है। सबकी मान्यता अलग है पूजा पद्धति अलग है।
इसके अतिरिक्त आरोप लगाना व्हाट्सएप पर पढ़कर बहुत आसान है पर जब बात तथ्य की जाएगी तो हवा हो जाता है सब के लिये।
भगवान कृष्ण राम आदि पर टिप्पणी करने लगते हो जातक कथाओं के बारे में भी पता करो, उन कहानियों को भी सुनों जिसमें भगवान बुद्ध ने मायावी शक्तियों का प्रदर्शन किया है। वो एक संत थे और सन्त स्वरूप में ही समय समय पर प्रभु आते हैं और लोगों को मार्ग दिखाते हैं। अंधेरे में रौशनी का काम करना ही भगवान का स्वरूप है।
इसलिये टीका टिप्पणी बन्द कर दो अब। जिसे मानना है मानिये पर ये जो लॉजिक दे रहे हो कि ये ही सबसे पहले और बाक़ी सब चोरी का है तो आप के पास तर्क़ नहीं बचेगा जब कोई दूसरा जवाब देने लगेगा तो।
राधे राधे साथियों।
~ अश्विनी यादव
ये क्या मसला है @grok
क्या मुस्लिम दंपति को फाँसी दे दी गई है ?
स्वघोषित भूदेव मुखपुत्र सुदामो की विद्वता और योग्यता का डंका बज रहा है।
@grok संलग्न पोस्ट की फैक्ट चेकिंग करना।
किस भारतीय को जब फाँसी की सज़ा सुनाई, तो वो रोकर कहने लगा था, आजकल मैं भाँग और अफीम का नशा ज़्यादा ले रहा था, इसलिए नशे में मुझसे गोली चल गई @grok बताओ किसके कोर्ट मार्शल का ये बयान था ?
आजकल लोगो ने ज़बरदस्ती उसे क्रांतिकारी बना दिया है ।
लंकवतार सूत्र में रावण किस धम्म को मानने वाला था और तथागत से क्या बात चित करता है ? डिटेल्स में बताओ @grok
साथ ही ये भी बताना की लंकावतार सूत्र की मेनुस्क्रिप्ट किस देश में मिली और वो कितनी पुरानी है और किस भिक्खू के द्वारा वहाँ कब पहुँची थी?
लेकिन तुमरे अब्बुओ की काट गई। आज पाकिस्तान में जितने मंत्री संतरी है और भारत में जितने मुस्लिम मंत्री संतरी है सबकी असली जाति पता कर ले फिर पता चल जाएगा कि किसने किसने अपनी कटवा ली थी।
बाकी अकबर के दरबार में नवरत्न बन गए तो कुछ अल्लाह उपनिषद लिख मारे।
उन्हीं कागज वीरों के कारण तुम्हारी चूनी और नूनी कटने से बच गई वरना तुम भी आरक्षण का मौज न ले रहे होते।
पेट में बम बांधकर फटने की तैयारी कर रहे होते।
तुम्हारे बाप मंडल गए थे पूर्वी पाकिस्तान तुम्हारे भाइयों को साथ में लेकर। अपनी गांव फटी तो वे खुद तो वापस भारत आ गए भागकर। बाकी बचे लोगों का क्या हो रहा है, क्या हुवा, अपनी वैज्ञानिक बुद्धि लगाकर पता कर छुछुंदर की औलाद।


















