Pinned Tweet
शांत रहिए और ईश्वर पर भरोसा रखिए। जब आपकी प्रार्थनाएं और उनके फैसले एक हो जाते हैं, तो चमत्कार होते हैं। 🙏
महाकाल महाकाय महाकाल पराक्रम।
महाकाल महादान महाकाल नमोऽस्तुते॥
ॐ श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏🚩
जय जय श्री महाकालेश्वर बाबा 🙏🚩
शुभप्रभात वन्दन मित्रों🌹🙏
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
. 🌺 श्री सिद्धिविनायक नमो नमः🌺
|| वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ||
|| निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||
🙏गणपती बाप्पा मोरया 🌺मंगलमूर्ती मोरया
. || ॐ गं गणपतये नमः || 🙏✨
Jai Shri Ganesh ❤️🌸
#JaiShriGanesh #Siddhivinayak #GanpatiBappaMorya
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
विकसित उत्तर प्रदेश, नए अवसर और तकनीक की ताकत! 🚩
योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास और नवाचार की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। 🔥
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं भैया @Shrish_1987 .
देवाधिदेव महादेव जी की असीम कृपा आप पर सदैव बनी रहे 🎂❣️🙏
अमेठी के लाल भाई @Shrish_1987 जी को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं, महादेव की कृपा बनी रहे ✨✨
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
"जब प्रेम भक्ति बन जाए"
मीरा के गिरधर💝🙏
मीराबाई जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन ❤️🙏
हरे कृष्ण ❣️
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
कभी 'मौत का सौदागर', कभी 'जहरीला सांप' और अब प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर टिप्पणी... कांग्रेस की राजनीति सिर्फ और सिर्फ नफरत पर टिकी है...
#NarendraModi #PmModi #RahulGandhi #Cogress #CongressMuktBharat
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
2/6
जीनोम विश्लेषण ने साबित किया कि ये लोग किसी एक ही समूह के नहीं थे।
कंकालों में 3 अलग-अलग आनुवंशिक धाराएँ मिलीं—
समूह A: दक्षिण एशियाई (भारतीय मूल)
समूह B: पूर्वी भूमध्यसागरीय (ग्रीस और क्रीट द्वीप)
एक व्यक्ति दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल का!
#VedaRicha
#Genetics
#Archaeology
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
सेवा ही संकल्प हमारा और राष्ट्रसेवा ही लक्ष्य हमारा।
#CG_सुशासन_सरकार
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
यात्रियों को बड़ी सौगात
कल से रायपुर–रावघाट और रायपुर–कुरुद के बीच नई ट्रेन सेवा शुरू।
अब सफर होगा सस्ता, आसान और सुविधाजनक।
#CG_सुशासन_सरकार
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
When large data centres are planned near important water resources, cooling technology becomes a crucial part of the discussion.
The proposed 1 GW AI infrastructure project by AdaniConneX and Google in Vizag is designed around air based cooling, reducing dependence on conventional evaporative cooling.
Freshwater consumption across the three proposed sites is expected to stay below the volume of one Olympic sized swimming pool. Most of this water would be used for landscaping, kitchens and worker facilities.
The plans also provide for dedicated industrial water supply, on site wastewater recycling and no treated discharge into Mudasarlova Reservoir.
Responsible AI growth means thinking about environmental impact from the design stage itself.
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
💐💫🌟🌾*रात्रि वंदन*🌾🌟💫💐
🙏🏻*जय श्री राम*🙏🏻
परेशान तो सारी दुनिया है।
हम और आप किस खेत की मूली है ।।
🙏🏻*जय लक्ष्मेश्वर तीर्थधाम*🙏🏻
🙏🏻*जय गुरुदेव*🙏🏻
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
'मरा-मरा' का जप करते-करते उनके मुख से 'राम' नाम का उच्चारण होने लगा और वे तपस्या में लीन हो गए।
लंबी तपस्या के दौरान उनके शरीर के चारों ओर दीमकों की बांबी (वाल्मीक) बन गई थी, जिससे बाहर निकलने के बाद उनका नाम वाल्मीकि पड़ा।
#वाल्मीकि_जयंती #ValmikiJayanti
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
त्रिपुण्डं शरणं त्रिशुलं शक्तिः शिव भक्तिः शिवे अनुरक्तिः
भस्म विभुतिः रुद्रमाला हर हर शंभू डमरू वाला
#ॐ_नमः_शिवाय
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
🚩सर्व मंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी, नारायणी नमोस्तुते।।🚩
💕🙏🏻 ऊं नम शिवाय 💕
❣️ हर हर महादेव ❣️
🙏🏻 शुभ प्रभात वंदन 🙏🏻
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
शिशु का संबंध घर से जोड़ें घर के लोगों के साथ जोड़ें, घर के कामों से जोड़ें, घर की व्यवस्थाओं से जोड़ें, घर के रीतिरिवाजों से जोड़ें, घर के पूर्वजों से जोड़ें, घर के संबंधियों से जोड़ें, घर में घटने वाली घटनाओं से जोड़ें, घर का सदस्य बनाएं, घर से एकत्व का अनुभव करायें ।
शिशु का संबंध समाज से जोड़े, घर में आने वाले स्नेही, मित्रों और संबंधियों से जोड़ें । घर के द्वार पर आनेवाले भिक्षुकों से जोड़ें । पड़ौसियों से जोड़ें । समाज के विभिन्न व्यवसायिकों से जोड़ें । सार्वजनिक स्थानों से जोड़ें । उसे समाज का घटक बनाएं ।
शिशुओं के लिए बहुत अधिक पैसे खर्च करना और उन्हें आवश्यकता से बहुत अधिक खिलौने, कपड़े, नक़ली अलंकार देना, उनकी ही चर्चा करना उनके मानस पर विपरीत प्रभाव करता है । उनकी दृष्टि ही अनुचित पद्धति से वस्तुओं का, घटनाओं का और व्यक्तियों का मूल्यांकन करने वाली बन जाती है । जीवन का प्रस्थान ही चूक जाता है ।
आज के वातावरण में शिशु को अपनी आयु के शिशुओं के साथ खेलने को नहीं मिलता। दंगा करने को नहीं मिलता, घर में भी भाई-बहन नहीं होते अतः शिशुओं को बड़ों के साथ ही जीना पड़ता है, सुरक्षा की दृष्टि से घर में ही बँधे रहना पड़ता है, बग़ीचे में गये तो बड़े साथ ही होते हैं । इस स्थिति में वे अप्राकृतिक शिशु बन जाते हैं, आयु से शिशु परंतु संयोग से बड़े ।
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
शिशु का संबंध सृष्टि से जोड़े। बिल्ली मौसी, बंदर मामा, चंदा मामा, गाय माता, पृथ्वी माता, सूरज दादा से जोड़ें । नदी, पर्वत, वृक्ष, वनस्पति, फूल, तितलियों, प्राणियों से जोड़े, उन्हें परिवार के सदस्य बनाएं । उनके प्रति स्नेह संबंध जोड़े ।
शिशु का संबंध देवी देवताओं से जोड़ें, तीर्थों और मंदिरों से जोड़ें, मंदिरों के भगवानों से जोड़ें ।
शिशुओं का संबंध राष्ट्र से जोड़ें, धर्म और संस्कृति से जोड़ें । हमारे सांस्कृतिक पूर्वज ऋषिमुनियों से जोड़ें ।
ऐसा करके शिशु के व्यक्तित्व को व्यापक और विशाल बनाएं । ऐसा करने के लिए चित्र, कहानी, गीत, वार्तालाप आदि माध्यम उपलब्ध है ही । इन बातों से माता, पिता, दादा-दादी आदि सब शिक्षक बनने चाहिए । ये शिक्षक जितने अच्छे और कुशल उतने ये छोटे शिष्य कुशल बनेंगे । शिशु सबकुछ सीख सकते हैं, सिखाने वाले चाहिए ।
शिशु का संबंध घर से जोड़ें घर के लोगों के साथ जोड़ें, घर के कामों से जोड़ें, घर की व्यवस्थाओं से जोड़ें, घर के रीतिरिवाजों से जोड़ें, घर के पूर्वजों से जोड़ें, घर के संबंधियों से जोड़ें, घर में घटने वाली घटनाओं से जोड़ें, घर का सदस्य बनाएं, घर से एकत्व का अनुभव करायें ।
शिशु का संबंध समाज से जोड़े, घर में आने वाले स्नेही, मित्रों और संबंधियों से जोड़ें । घर के द्वार पर आनेवाले भिक्षुकों से जोड़ें । पड़ौसियों से जोड़ें । समाज के विभिन्न व्यवसायिकों से जोड़ें । सार्वजनिक स्थानों से जोड़ें । उसे समाज का घटक बनाएं ।
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 retweeted
शिशु जन्म लेता है तो सबसे पहले जातकर्म संस्कार होता है ।जीभ पर सुवर्ण शलाका से घी और शहद से ऊँ लिखा जाता है और चटाया भी जाता है । इसे जन्म घुट्टी कहते हैं ।
जन्म के बारहवें या तेरहवें दिन नामकरण संस्कार होता है । माता उसके कान में नाम बताती है जो उसकी पहचान बनती है । नामकरण संस्कार सब के अपने कुटुंब के रीतिरिवाज के अनुसार होता है ।
फिर होता है कर्णवेध संस्कार। कर्णवेध कर सोने का अलंकार उसे पहनाया जाता है ।
शिशु जब बैठने लगता है तब होता है अन्नप्राशन संस्कार, अब तक वह क्षिराद शिशु था अब वह क्षीरान्नाद अर्थात् दूध और अन्न खाने वाला बनता है ।
शिशु का संबंध सृष्टि से जोड़े। बिल्ली मौसी, बंदर मामा, चंदा मामा, गाय माता, पृथ्वी माता, सूरज दादा से जोड़ें । नदी, पर्वत, वृक्ष, वनस्पति, फूल, तितलियों, प्राणियों से जोड़े, उन्हें परिवार के सदस्य बनाएं । उनके प्रति स्नेह संबंध जोड़े ।
शिशु का संबंध देवी देवताओं से जोड़ें, तीर्थों और मंदिरों से जोड़ें, मंदिरों के भगवानों से जोड़ें ।
शिशुओं का संबंध राष्ट्र से जोड़ें, धर्म और संस्कृति से जोड़ें । हमारे सांस्कृतिक पूर्वज ऋषिमुनियों से जोड़ें ।
ऐसा करके शिशु के व्यक्तित्व को व्यापक और विशाल बनाएं । ऐसा करने के लिए चित्र, कहानी, गीत, वार्तालाप आदि माध्यम उपलब्ध है ही । इन बातों से माता, पिता, दादा-दादी आदि सब शिक्षक बनने चाहिए । ये शिक्षक जितने अच्छे और कुशल उतने ये छोटे शिष्य कुशल बनेंगे । शिशु सबकुछ सीख सकते हैं, सिखाने वाले चाहिए ।





























