AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil) header
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil) profile picture

||"यतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जयः" || अंतः अस्ति प्रारंभ : (The End is the Beginning.) “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम”

Hamburg, Germany
Joined September 2024
Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)Photo by AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR (@StatVigil)
|| There is no nation greater than Aryāvārta. || This is our Heritage, our identity and also our strength.⚔️🚩⚔️
1
1
10
967
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
भाई, ऐतिहासिक स्रोतों के हिसाब से अहीर, ग्वाला, घोसी, गोप सब क्षेत्रीय पशुपालक समूह थे। पारंपरिक रैंकिंग में अक्सर शूद्र या मध्यवर्ती। ग्वालवंशी भी उन्हीं में से, कुछ जगह ऊंचा दावा, लेकिन कुल मिलाकर वही प्रक्रिया। 1924 इलाहाबाद में एआईवाईएम ने इन सबको मिलाकर यादव नाम और क्षत्रिय/यादुवंशी दावे के साथ संस्कृतीकरण से एक समुदाय बनाया—सामाजिक सुधार, शिक्षा और स्थिति के लिए। वोट बैंक बाद की राजनीति है।
1
1
11
In hindi देवनागरी @grok ? @ARUNRAN47886169 read it
Replying to @StatVigil
Bhai, historical sources ke hisab se Ahir, Gwala, Ghosi, Gop sab regional pastoral groups the, traditional ranking mein aksar Shudra ya intermediate. Gwalvanshi bhi unhi mein se, kuch jagah higher claim, lekin overall same process. 1924 Allahabad mein AIYM ne in sabko milakar Yadav naam aur Kshatriya/Yaduvanshi claim ke saath Sanskritization se ek community banayi—social reform, education aur status ke liye. Vote bank later politics hai.
1
42
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
सही बात है भाई। परंपरा के अनुसार देवमीढ की दो पत्नियाँ थीं—एक क्षत्रिय, एक वैश्य (ग्वाल)। क्षत्रिय पत्नी से शूरसेन (वासुदेव के पिता) और वैश्य पत्नी से पर्जन्य (नंद के पिता) हुए। इसलिए पर्जन्य की शाखा ने गोप-ग्वाल का पेशा अपनाया। दोनों यदुवंशी चचेरे भाई हैं। राजसी पद क्षत्रिय मातृ-पक्ष वाली शाखा में रहा।
1
2
1
2
64
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
Replying to @StatVigil
हाँ भाई, यह भी तथ्य है। अहीर, आभीर, ग्वाला, घोसी, गोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रीय पशुपालक समूह थे—कई मध्यम या शूद्र स्थिति के। 1924 में इलाहाबाद में ऑल इंडिया यादव महासभा बनी, जिसमें इन्होंने मिलकर यादव नाम अपनाया और संस्कृतीकरण के जरिए एक बड़ी समुदाय बनाई, यादववंशी दावे के साथ।
1
1
1
12
Hindi devnagari me explain kro @grok
Haan bhai, yeh bhi fact hai. Ahir, Abhir, Gwala, Ghosi, Gope jaise alag regional pastoral groups the—kai intermediate ya Shudra status ke. 1924 mein All India Yadav Mahasabha bani, jisme inhone milkar Yadav naam apnaya aur Sanskritisation se ek badi community banayi, Yaduvanshi claim ke saath.
1
3
123
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
Haan bhai, yeh bhi fact hai. Ahir, Abhir, Gwala, Ghosi, Gope jaise alag regional pastoral groups the—kai intermediate ya Shudra status ke. 1924 mein All India Yadav Mahasabha bani, jisme inhone milkar Yadav naam apnaya aur Sanskritisation se ek badi community banayi, Yaduvanshi claim ke saath.
2
1
4
152
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
क्षत्रिय समाज ध्यान दें :- कोई एक व्यक्ति संपूर्ण जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अतः यदि आपको किसी व्यक्ति विशेष से कोई शिकायत है, तो उसके पूरे समाज को लक्षित मत कीजिए। कुछ असामाजिक तत्व चाहते हैं कि अन्य जातियों के साथ हमारा विवाद हो! आप किसी के षड्यंत्र का शिकार मत बनिए...
4
3
1
27
921
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
|| There is no nation greater than Aryāvārta. || This is our Heritage, our identity and also our strength.⚔️🚩⚔️
1
1
10
967
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
Replying to @jat_devta
Akbari jhant or jahangiri jhant kon the ,kola pujan jisne tumhara kiya wahi kshtriya the
1
1
7
289
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
Replying to @jat_devta
Vo vi wale khstriya huve mughal jo jatniya thi jo as a khawas pardayat dasi bnke rajputo ko serve karti thi lemon tea upar beth k😋😜
1
6
529
Replying to @jat_devta
तुम चौधरी कैसे बने कभी इस पर भी बात होनी चाहिए मित्र अकबर जहांगीर के आंडो को सहलाने वाली कॉम ही आज चौधरी बनी घूम रही है हद है 😂
1
9
323
हमारे राजस्थान में एक कहावत है : || धनतेरस री माटी, सोना सू भी खाटी || यहाँ धनतेरस पर सिर्फ बर्तन या सोने - चांदी की खरीदारी नहीं की जाती, बल्कि खेतों से पवित्र पीली या लाल मिट्टी लाकर घर की चौखट, और आंगन को लीपा जाता है! इस मिट्टी को ही असली धन मानकर उसकी पूजा की जाती है
3
4
373
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
किसी ने बोला हनुमान के पास गदा होने का वाल्मीकि रामायण में कोई साक्ष्य नहीं है । उत्तरकांड , सर्ग 36 और श्लोक 17 गदेयं मामिका नैनं संयुगेषु वधिष्यति । इत्येवं वरदः प्राह तदा ह्येकाक्षिपिङ्गलः ॥ ७.३६.१७ ॥ कुबेर ने वरदान देते हुए कहा— मेरी यह गदा युद्ध में इस बालक (हनुमान) का वध नहीं कर सकेगी। कितना झूठ बोलेंगे । सुनी सुनाई बात करोगे ? ये रामायण जेएनयू के ऑफिस में लिखी गई है । पूरी फ़िल्म वही लिखी गई है ।
41
57
13
179
33,126
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
नमित मल्होत्रा की #रामायण आज रिलीज हुई और @PratikBorade1 महीनों से कह रहे थे, वे बिल्कुल सही साबित हुए। फिल्म में असुरों को शोषित और गुलाम के रूप में दिखाया गया है, तथा भगवान विष्णु को उनके शोषण का समर्थन करते हुए दर्शाया गया है। रावण को मुक्तिदाता और स्त्रियों का सम्मान करने वाला दिखाया गया है (जो दासी को उठाकर खड़ा करते हैं), शूर्पणखा को पीड़ित बनाया गया है और सीता को उनकी नाक कटने पर दुखी दिखाया गया है। जो तथाकथित समीक्षक और फैंस @PratikBorade1 को लगातार निशाना बना रहे थे, अब माफी मांगेंगे प्रतीक जी की एक-एक बात सच निकली #RamayanaReview @PratikBorade1 #NamitMalhotra Must watch this video youtu.be/8LLLV1sLFr4?si=WF2k… – at Delhi, India
6
185
1
480
4,726
यह बकवास फ़िल्म 2000 करोड़ की बनाई है, आठ साल लग गए बनाने में, अब यह सुपर फ्लॉप साबित हुई है । इस फिल्म को देखना पैसा और समय दोंनो की बर्बादी है, बेहद घटिया बनाई है, इसके निर्माताओं पर आजीवन पाबंदी लगाई जानी चाहिए ।
रामायण फ़िल्म में स्वयं सीता माता का रोल कर रही साई पल्लवी सूर्पणखा के नाक काटने पर लक्ष्मण जी जो दोष देती है । कहती है स्त्री के साथ ऐसा आपको नहीं करना चाहिए था । जबकि सत्य कुछ है । 1. अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 20 श्रीराम लक्ष्मण जी से कहते हैं कि इस कुरूप राक्षसी को विरूप कर दो। 2. अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 21 मूल संस्कृत श्लोक: इत्युक्तो लक्ष्मणस्तस्याः क्रुद्धो रामस्य पश्यतः। उद्धृत्य खड्गं चिच्छेद कर्णनासे महाबलः॥ २१॥ इसका हिंदी अर्थ: श्रीराम के इस प्रकार आदेश देने पर महाबली लक्ष्मण ने क्रोधित होकर, श्रीराम के सामने ही तलवार खींची और शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। ॥21॥ 3. भगवान राम का आदेश (श्लोक 20): इमां विरूपामसतीमतिमत्तां महोदरीम्। राक्षसी पुरुषव्याघ्र विरूपयितुमर्हसि॥ २०॥ अर्थात् हे पुरुषश्रेष्ठ! इस राक्षसी को विरूप कर देना चाहिए। संदर्भ: वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 18–22⁠। #Ramayana ये फ़िल्म नहीं महापाप है । कुछ बीच पतित पापी इसको जस्टिफाई कर रहे किंतु भगवान राम उनको अवश्य दण्डित करेंगे । सारी बकवास वो कर रहे जिनके घर में न रामचरितमानस है न वाल्मीकि रामायण ।
1
6
216
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
रामायण फ़िल्म में स्वयं सीता माता का रोल कर रही साई पल्लवी सूर्पणखा के नाक काटने पर लक्ष्मण जी जो दोष देती है । कहती है स्त्री के साथ ऐसा आपको नहीं करना चाहिए था । जबकि सत्य कुछ है । 1. अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 20 श्रीराम लक्ष्मण जी से कहते हैं कि इस कुरूप राक्षसी को विरूप कर दो। 2. अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 21 मूल संस्कृत श्लोक: इत्युक्तो लक्ष्मणस्तस्याः क्रुद्धो रामस्य पश्यतः। उद्धृत्य खड्गं चिच्छेद कर्णनासे महाबलः॥ २१॥ इसका हिंदी अर्थ: श्रीराम के इस प्रकार आदेश देने पर महाबली लक्ष्मण ने क्रोधित होकर, श्रीराम के सामने ही तलवार खींची और शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। ॥21॥ 3. भगवान राम का आदेश (श्लोक 20): इमां विरूपामसतीमतिमत्तां महोदरीम्। राक्षसी पुरुषव्याघ्र विरूपयितुमर्हसि॥ २०॥ अर्थात् हे पुरुषश्रेष्ठ! इस राक्षसी को विरूप कर देना चाहिए। संदर्भ: वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 18–22⁠। #Ramayana ये फ़िल्म नहीं महापाप है । कुछ बीच पतित पापी इसको जस्टिफाई कर रहे किंतु भगवान राम उनको अवश्य दण्डित करेंगे । सारी बकवास वो कर रहे जिनके घर में न रामचरितमानस है न वाल्मीकि रामायण ।
32
245
18
717
20,198
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
यह बकवास फ़िल्म 2000 करोड़ की बनाई है, आठ साल लग गए बनाने में, अब यह सुपर फ्लॉप साबित हुई है । इस फिल्म को देखना पैसा और समय दोंनो की बर्बादी है, बेहद घटिया बनाई है, इसके निर्माताओं पर आजीवन पाबंदी लगाई जानी चाहिए ।
111
147
10
725
33,273
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
‘रामायण’ में रावण सबके पास सोने का घर होने की बात ऐसे करता है, जैसे राज कपूर पचास के दशक की अपनी वामपंथ से प्रेरित फ़िल्मों में समानता और बराबरी के भाषण दिया करते थे। अगर ‘रावणायण’ ही बनाना था, तो आचार्य चतुरसेन की ‘वयं रक्षामः’ को ही पर्दे पर उतार देते और दर्शकों को बता देते कि वे रावण की कहानी देखने जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ‘रामायण’ में सब कुछ बुरा है। इसमें जो अच्छा है, वह भी मैंने अपनी समझ से समीक्षा में बताया है।
78
498
19
1,360
65,158
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
पिछले कुछ वर्षो में धार्मिक मंचो से या बॉलीवुड के माध्यम से, रामायण के नाम पर ,रावण का गुणगान जारी है और ये कोई इत्तेफाक नहीं है ,सोची समझी रणनीति का हिस्सा है उन सबमें अत्याचारी, दुराचारी, बलात्कारी रावण का गुणगान ज्यादा है ,ना कि प्रभु श्री राम का !
2
26
77
1,557
AYUVAN PRATAP SINGH SIKARWAR retweeted
यह प्रभु श्री राम की महिमा रामायण बनाई है या रावणायन ?
1
7
8
386