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Chairman, Shri Vaidic Swasti Pantha Trust, Author of VedVigyanAlok & Vedarth Vigyanam, 150K+ on YouTube Channel @VaidicPhysics

Bhinmal, Rajasthan, India
Joined August 2014
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आर्ष ग्रन्थों के शोधन में कहीं मूल ज्ञान ही न नष्ट हो जाए! कुछ समय पूर्व काशी विद्वत् परिषद् ने मनुस्मृति में हुई मिलावट को दूर कर उसका शुद्ध संस्करण तैयार करने की घोषणा की थी, जो एक स्वागत योग्य कदम है, यद्यपि आर्यसमाज के विद्वान् डॉ. सुरेन्द्र कुमार जी इस कार्य को पहले ही कर चुके हैं और यह ग्रन्थ वर्षों से आर्य प्रकाशकों के यहाँ सुलभ भी है। हाल ही में श्री स्वामी रामदेव जी ने भी सन्तों के साथ मिलकर सभी आर्ष ग्रन्थों के शोधन हेतु एक समिति गठित करने की घोषणा की है, जो आज की महती आवश्यकता तो है, परन्तु प्रश्न यह उठता है कि भारतवर्ष में ऐसे कितने विद्वान् हैं, जो वेद एवं आर्ष ग्रन्थों के गम्भीर वैज्ञानिक रहस्यों को समझने में समर्थ हों। रामायण एवं महाभारत जैसे ऐतिहासिक ग्रन्थों की प्रामाणिकता को परखना भी साधारण कार्य नहीं है, क्योंकि अति प्राचीन इतिहास के सभी प्रमाण उपलब्ध हो जाएँ यह आवश्यक नहीं; यद्यपि इतिहास में क्या सम्भव है और क्या असम्भव, इसका ज्ञान अवश्य हो सकता है, किन्तु उसके लिए भी वेद तथा सृष्टि-विज्ञान की गम्भीर समझ अनिवार्य है। क्या यह समिति सृष्टि-विज्ञान के ऐसे विशेषज्ञ विद्वानों को जानती है? यदि भारतवर्ष में वैदिक विज्ञान के ऐसे कोई गम्भीर विद्वान् हों, तो मैं उनसे संवाद करना चाहूँगा, अतः वे पारस्परिक चर्चा की भूमि तैयार करने हेतु अपना कोई लेख वा पुस्तक भेजने का कष्ट करें। मुझे भय है कि कहीं शास्त्र-शोधन के नाम पर शोधकर्ता क्लिष्ट एवं गम्भीर प्रसंगों को मिलावट समझकर शास्त्रों से ही न निकाल दें, क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो यह घोर पाप होगा और वे गम्भीर प्रसंग सदा के लिए विनष्ट हो जाएँगे। मिलावट की पहचान करने के उपायों को हमने ‘वेदविज्ञान-आलोक’ ग्रन्थ की पूर्वपीठिका में विस्तार से दर्शाया है। वस्तुतः हमारे ग्रन्थ ‘वेदविज्ञान-आलोक:’, ‘वेदार्थ-विज्ञानम्’ एवं ‘गोपथ-विज्ञानम्’ को पढ़े बिना कोई भी शास्त्रों पर यथार्थ एवं वैज्ञानिक शोध नहीं कर सकता, न ही इसके बिना वह वेद तथा आर्ष ग्रन्थों के साथ-साथ अपने महापुरुषों की गुण-गरिमा को ही समझ सकता है। इसलिए मैं सभी विद्वानों को सचेत कर रहा हूँ, क्योंकि इस विषय में उनकी एक भूल भी भारतवर्ष और वैदिक सनातन धर्म को भारी पड़ सकती है। इस विषय में यदि कोई चर्चा करना चाहे तो उसका स्वागत है, किन्तु यह कार्य हम सबका होने के कारण सभी को पूर्वाग्रहों एवं पद-प्रतिष्ठा के अहंकार को त्यागकर, परस्पर मिलकर तथा भली-भाँति सोच-विचारकर ही इसे सम्पन्न करना चाहिए।
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आत्मीय-आमन्त्रणम् अदृश्य वैश्विक षड्यन्त्र और वैदिक समाधान (वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान — वार्षिक कार्यक्रम) ⬇️ tinyurl.com/ProgramVP2026 हम आप सभी वेदप्रेमी, राष्ट्रप्रेमी एवं विज्ञानप्रेमी महानुभावों को सादर आमन्त्रित करते हैं। 📢 चलो सिरोही! 🏃 ⏱ 📆 दिनांक— 25, 26 व 27 दिसम्बर (शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार) पौष कृ. २, ३ व ४ वि. सं. २०८३, सृष्टि सम्वत् १,९६,०८,५३,१२७ पंजीकरण करने के लिए लिंक— 🔗 tinyurl.com/vaishvikshadyant… 📍स्थान— श्री विजयपताका महातीर्थ, सिरोही 📞 अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें— नरेश चौधरी, कार्यालय सचिव Ph. 9829148400, 9672548851
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🔥 नियोग का असली रहस्य क्या है? । सत्यार्थ प्रकाश पर इतना आक्रमण क्यों? क्या आपने कभी इसके मूल सत्य को जानने का प्रयास किया? 🤔 ▶️ पूरी चर्चा देखें– youtu.be/X1vIE9VSMpo देखिए और स्वयं निर्णय कीजिए।
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भौतिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष सन्देश मेरे प्रिय छात्र-छात्राओ! कक्षा ११वीं से लेकर बी.एस-सी. और एम.एस-सी. तक आप सभी जो भौतिक विज्ञान पढ़ रहे हैं, एक बात अपने मन में भली-भाँति बैठा लें कि संसार की सभी विद्याओं में साइंस सबसे महत्त्वपूर्ण है और साइंस का मूल आधार फिजिक्स है। ज़ूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री और गणित जैसी अन्य शाखाएँ भी अन्ततः भौतिकी (फिजिक्स) पर ही आकर समाप्त होती हैं। फिजिक्स दुनिया की दिशा तय करने वाला विषय है। फिजिक्स सही दिशा में रहेगा तो पूरी दुनिया सही दिशा में रहेगी। यह गलत दिशा में गया, तो दुनिया भी गलत दिशा में जाएगी। अन्य सभी विषय चाहे आर्ट्स हों, कॉमर्स हों या साइंस इसी से प्रभावित होते हैं। इसलिए संसार को बदलने, भारत को विश्वगुरु बनाने और विश्व में सुख-शान्ति लाने का बहुत बड़ा उत्तरदायित्व आपके कंधों पर है। यह तभी सम्भव होगा, जब आप सही ढंग से पढ़ना सीखेंगे और एक महान् वैज्ञानिक बनने का प्रयास करेंगे। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों के अलग-अलग तरीके देखने को मिलते हैं– पहली श्रेणी: वे जो केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहते हैं। शिक्षक या पुस्तक में जो लिखा है, उसे बिना सोचे-समझे सत्य मान लेते हैं और कोई प्रश्न नहीं उठाते। दूसरी श्रेणी: वे जो बोर्ड पर लिखे शब्दों को बिना समझे केवल कॉपी में उतारते रहते हैं। उन्हें इसके पीछे के 'क्यों' और आधार से कोई मतलब नहीं होता। तीसरी श्रेणी (सच्चे अन्वेषक): वे जो पुस्तकों और सूत्रों को भी शंका की दृष्टि से देखते हैं। वे सोचते हैं कि इसमें कोई त्रुटि तो नहीं या इसे और गहराई से समझने की आवश्यकता है? वे गणित और भौतिकी के सूत्रों को स्वयं सिद्ध करते हैं और पाठ्यक्रम से बाहर जाकर भी प्रश्न पूछते हैं। वैज्ञानिक बनने की यात्रा यहीं (तीसरी श्रेणी के विद्यार्थी) से प्रारम्भ होती है। जिसके मन में प्रश्न हैं और जो किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता, क्योंकि वह किसी किताब या शिक्षक ने कही है, वही भविष्य में वैज्ञानिक बनता है। वैज्ञानिक बनने का अर्थ केवल अधिक अंक या मेरिट लाना नहीं है। कई छात्र अच्छे अंक तो ले आते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम से बाहर कुछ पूछने पर निरुत्तर हो जाते हैं। जैसे मजहबों में अंधविश्वास होता है कि किसी धर्मग्रन्थ, बाबा, मौलवी या पादरी ने कह दिया तो वह अंतिम सत्य है। वैसे ही शिक्षक या पुस्तक की बात को बिना तर्क स्वीकार करना भी एक अंधविश्वास है। केवल साइंस की बातें करना या खुद को आधुनिक व वामपंथी मान लेना ही वैज्ञानिक होना नहीं है। यदि उसमें प्रश्न पूछने की स्वतन्त्रता नहीं है, तो वह भी एक पन्थ या मजहब जैसा ही है। शिक्षकों का पूरा सम्मान करें, लेकिन उनसे प्रश्न अवश्य पूछें। अच्छे शिक्षक प्रश्नों से कभी परेशान नहीं होते, बल्कि प्रसन्न होते हैं। यदि शिक्षक उत्तर न दे पाएँ, तो– पुस्तक के लेखक से पूछिए। वहाँ समाधान न मिले, तो यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर से पूछिए। फिर भी उत्तर न मिले, तो बड़े वैज्ञानिकों से संपर्क कीजिए और जब सभी कह दें कि इसका उत्तर उपलब्ध नहीं है, तब हमारे पास आइए! हम उन प्रश्नों का समाधान वैदिक विज्ञान के माध्यम से देने का प्रयास करेंगे। प्रतिभा का कुछ हिस्सा जन्मजात होता है और कुछ निरन्तर अभ्यास से विकसित होता है। एक महान् वैज्ञानिक बनने के लिए निम्न संकल्प अनिवार्य हैं– 1. पूर्ण एकाग्रता: एक समय में पचास काम करने से बचें। पढ़ते समय मोबाइल का अनावश्यक उपयोग ध्यान भटकाता है। 2. गैजेट्स का सीमित प्रयोग: मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग केवल अध्ययन के लिए करें। मनोरंजन, समय नष्ट करने या चरित्र पतन के लिए बिल्कुल नहीं। 3. ब्रह्मचर्य का पालन: विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। आज आईआईटी जैसे संस्थानों में भी नशे की गंभीर समस्या देखने को मिलती है (जैसा कि फ़रीदाबाद में एक आईआईटी छात्र ने स्वयं स्वीकार किया)। ब्रह्मचर्य से मन एकाग्र रहता है, शरीर स्वस्थ होता है और बुद्धि तीव्र होती है। 4. प्राणायाम और व्यायाम: नियमित व्यायाम और प्राणायाम से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता और सोचने की शक्ति बढ़ती है। आज ही यह दृढ़ संकल्प लें कि आपको भौतिकी में एक सच्चा वैज्ञानिक बनना है। गणित और फिजिक्स के सभी फ़ॉर्मूलों को रिव्यू करें, उन पर विचार और शंकाएँ करें। मनन-चिन्तन से स्वयं समाधान खोजें, शिक्षकों से पूछें और अन्त में जिन प्रश्नों के उत्तर कहीं न मिलें, उन्हें लेकर हमारे पास आएँ, हम आपके प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक रूप से देंगे। —आचार्य अग्निव्रत संस्थापक प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित)
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🤷 क्या ईश्वर को केवल मान लेना ही पर्याप्त है? यदि हम ईश्वर को मानते हैं, तो हमारे आचरण में सत्य, ईमानदारी, अहिंसा, चरित्र और धर्म क्यों दिखाई नहीं देते? “अथातो ब्रह्मजिज्ञासा” के आधार पर इस व्याख्यान में विचार किया गया है कि ब्रह्म को जानने की वास्तविक जिज्ञासा क्या है। क्या हमें पहले यह जानने का प्रयास नहीं करना चाहिए कि ईश्वर है भी या नहीं? और यदि है, तो कैसा है? 🎥 वीडियो देखें और इस मूल प्रश्न पर विचार करें— youtu.be/JVBT0zx2KdA 👉 क्या हम वास्तव में ईश्वर को जानते हैं या केवल ईश्वर को मानते हैं?
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आरक्षण हटाओ या आरक्षण बचाओ? आरक्षण और जातिवाद की समस्या का वास्तविक समाधान क्या हो सकता है? इस वीडियो में इसी प्रश्न पर गम्भीर विचार किया गया है। वीडियो देखें और अपनी राय अवश्य दें– youtu.be/JMed6AmNT2g
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CJP Protest- समीक्षा | CJP के विरोध प्रदर्शन का विश्लेषण youtu.be/vCsfN0tqZqU
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📖 सर्वाधिक विवादित विषय (नियोग) की विवेचना youtube.com/shorts/AG6wZZz8D… नियोग-मीमांसा लेख डाउनलोड करें– ⬇️ tinyurl.com/niyog-mimansa यदि विषय उपयोगी लगे, तो इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।
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वेद पर 'श्रद्धा' क्यों? क्या आपने कभी स्वयं वेद पढ़े? क्या वेद केवल पूजा-पाठ और परम्परा तक सीमित हैं? अगर हम वेदों का वास्तविक विज्ञान (Science) नहीं समझ पाए, तो हमारी संस्कृति की जड़ें खोखली हो जायेंगी। इस वीडियो में जानिए वेद को बचाने का एकमात्र मार्ग—प्रचार नहीं, शोध है। ◼ क्या वेद केवल परम्परा है? ◼ वेद और आधुनिक विज्ञान का सम्बन्ध? ◼ हमारा कर्तव्य? ◼ वेद को बचाने के लिए किसकी आवश्यकता? 🗓️ 13/07/2026 🕣 08:00PM youtube.com/live/EfIl2t8bKc4 #Veda #SanatanDharma #ScienceAndSpirituality
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विद्या एक रहस्य youtu.be/cgpAW0U38ew
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