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दिल्ली की मुस्तफाबाद में भाजपा के बूथ लेवल कार्यकर्ता ने 28 मुस्लिम वोट हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किया, कांग्रेस नेता अली मेंहदी ने उन लोगों से मुलाकात की सभी वोटर अपने घर पर मिले जिनको मृतक बताकर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
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સુરત મહાનગરપાલિકાના રૂપિયા ૧ લાખના ભજીયા બિલ અંગે વિવાદ ઊભો થતાં મેયર માયાબેન માવાણીએ સ્પષ્ટીકરણ આપ્યું છે...
તેમણે જણાવ્યું કે, રૂ. ૭૫૦ પ્રતિ કિલોના ભાવે કુલ ૧૩૧ કિલો ભજીયા ખરીદવામાં આવ્યા હતા, જેનો નાસ્તો આશરે ૩૫૦ થી ૪૦૦ લોકોએ કર્યો હતો...
તેમણે ખાસ ભાર મૂકતા કહ્યું કે આ ભજીયા એકદમ ઓઇલ ફ્રી અને ઉત્તમ ગુણવત્તાવાળા હતા... ભજીયા મેયર માયાબેન એ પણ ખાધા છે અને વધુમાં તેમણે ઉમેર્યું હતું કે હાલ બજારમાં આવા ગુણવત્તાયુક્ત ભજીયાનો ભાવ રૂપિયા ૮૦૦ પ્રતિ કિલો જેટલો હોય છે જ્યારે મનપાએ તે તેનાથી ઓછા ભાવે ખરીદ્યા છે...
આગળ હું કઈ નહીં બોલું ખોટો મોટો વિવાદ ઊભો થશે 😂
જાણવા મળ્યું છે કે સુરત મહાનગરપાલિકાની સામાન્ય સભામાં 130 કિલો ભજીયાનું બિલ રૂપિયા 1 લાખ આવ્યું છે! 😳
એટલે કે ભજીયાનો ભાવ પ્રતિ કિલો રૂપિયા 750
લાગે છે કે ભજીયાં ખાવાની સાથે સાથે જનતાના ટેક્સના પૈસે તાજા થવાનો પણ કાર્યક્રમ હતો! 😂
ખાઓ, પીઓ અને ખાઈ-ખાઈને તાજા થાઓ... બિલ તો જનતાએ જ ભરવાનું છે!
વાહ રે જનતાની સેવા! 😄
कांग्रेस ने तो सारा बनाया और इसको आम जनता तक पहुंचाया परंतु आपलोग क्या कर रहे है सारे सरकारी विभाग को बेचे जा रहे है बिना कुछ सोचे समझे ।
सिर्फ अपना और अपने दोस्तों के सेवा में लगे हुए है पूरे देश को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर धकेल रहे है जहाँ कोई भी जनता का कुछ नहीं होगा सिर्फ अपना और अपने कुछ खाश दोस्तों का मुनाफा देना है ।
आईडीबीआई बैंक को लगातार मुनाफा में है परंतु बिना किसी कारण आप इसको बेचे रहे है, बीस हजार से अधिक कर्मचारियों और उसको परिवार का क्या आपने देखा हमलोग आईडीबीआई बैंक को सरकारी बैंक में काम करने को अपना योगदान दिया था न कि निजीबैंक में।
ये निजीकरण रोकनी ही होगी ।
#IDBISaleScam
#IDBINotForSale
#SaveIDBIBank
हम सभी जानते हैं कि कैसे @INCIndia ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल अपनी निजी संस्थाओं के रूप में किया है और विवेकपूर्ण ऋण मानदंडों को दरकिनार करते हुए बैंक कर्मचारियों पर अपनी इच्छा के अनुसार ऋण देने का दबाव डाला है।
मैं कुछ उदाहरण गिनती हूँ।
* 1957 में, कांग्रेस नेताओं के प्रभाव के कारण हरिदास मूंदड़ा को LIC से पैसा मिला।
* 1976 में, इंदिरा गांधी की सरकार ने SBI के अध्यक्ष आर.के. तलवार को तब हटा दिया, जब उन्होंने संजय गांधी के करीबी से जुड़ी एक कंपनी के लिए ऋण शर्तों में ढील देने के राजनीतिक दबाव को मानने से इनकार कर दिया था।
* मारुति को दिए जाने वाले ऋणों को लेकर संजय गांधी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव डाला।
* इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पुजारी ने 1980 के दशक में बैंक कर्मचारियों पर ऋण जारी करने का दबाव डाला।
* यूपीए (UPA) में एक मंत्री के रूप में, पवन कुमार बंसल ने अपने परिवार से जुड़े व्यवसायों को ऋण देने के लिए केनरा बैंक पर दबाव डाला।
IDBI बैंक हमें खस्ताहाल स्थिति में सौंपा गया था, क्योंकि IDBI को स्वयं @INCIndia के नेताओं से घनिष्ठ संबंध रखने वाले बड़े व्यापारिक समूहों जैसे कि वीडियोकॉन, विनसम, एबीजी शिपयार्ड, किंगफिशर आदि को ऋण देने के लिए मजबूर किया गया था। ये "बैड लोन" में बदल गए, जिससे IDBI बैंक को भारी नुकसान हुआ, जिसे हमने पहचाना।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार ने व्यावसायिकता, विवेक और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के माध्यम से IDBI बैंक को पुनर्जीवित किया। IDBI बैंक अब अपने विकास के अगले चरण के लिए तैयार है।
IDBI बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन में सभी उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और हमने कल ही इसे स्पष्ट कर दिया था।
इसे यहाँ देखें: pib.gov.in/PressReleasePage.…
फरवरी 2024 में जारी भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र (White Paper) में खुलेआम हुए घोटालों और आर्थिक कुप्रबंधन के कई और उदाहरणों को शामिल किया गया है। यह अब भी प्रासंगिक है।
यहाँ पढ़ें: bsmedia.business-standard.co…
राफेल के संबंध में आपके झूठ विफल और बेनकाब हुए थे। आपको माफी मांगनी पड़ी थी। यहाँ भी वैसा ही होगा।
कांग्रेस-युग की बैंकिंग में ताकतवर लोगों के लिए फोनबुक और आम नागरिकों के लिए नियम-बुक होती थी।
'कनेक्शन और सेटिंग वाली बैंकिंग' का युग अब समाप्त हो गया है।
आम लोगों की अब ऋण तक आसान पहुंच है और कर्मचारियों पर फोन कॉल पर ऋण देने का दबाव नहीं है।
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ऐसे कितनी कहानियों तक आप पहुंच पाएंगी ? SIR को कवर करने वाले दर्जन भर से भी कम रिपोर्टर हैं। पूरे देश में क्या हुआ होगा, पता नहीं। SIR से बड़ा धोखा कुछ नहीं हो सकता है।
All 28 electors in one area of Delhi’s Mustafabad against whom deletions have been sought by a BJP BLA, were found at their addresses. The voters & long time residents, said they had not heard the name of the objector and feel "targeted". @the_hindu .1/4 (story's gift link below)
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The IDBI news is another example of how the govt has lost control over the bureaucracy.
The babus are leaking stuff left, right, and centre. Fun times.
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गौर से सुनें! पन्ना में जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर साहब क्या कह रहे हैं!
"हमारा कोई प्रतिशत या कमीशन तय नहीं है! यदि कोई अपनी खुशी से कुछ दे दे, तो बात अलग है! हम ले लेते हैं!"
यह भाजपा शासन की उपलब्धि है कि भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार में बदल गया है! सिस्टम विनम्रता से इस सच को स्वीकार भी कर रहा है!
@NarendraModi
@DrMohanYadav51
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On Sunday, 1 November, I.N.D.I.A will stand united at Ramlila Maidan.
The fight against Vote Chori is a fight to protect every Indian’s right to choose. The Vote Loot in Bengal and across other states demand answers, not silence!
-EVMs under scrutiny
-Voter data under question
-Electoral rolls under suspicion
-Counting under challenge
I appeal to students, youth, women, workers and civil society to join us in this fight.
When the vote is under threat, silence is not an option.
Let us stand together to DEFEND our DEMOCRACY and SAVE our CONSTITUTION.
📍 Ramlila Maidan, Delhi | Sunday, 1 November 12.30
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गोरखपुर AIIMS की डायरेक्टर की अचानक तबीयत खराब हुई
अस्पताल में सुविधा ना होने पर उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया
ये कैसा AIIMS है, जहाँ सुविधाएं नहीं हैं !
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मोदी जी..किरण रीजीजू..आप जिस भाषा में बोलेंगे न अब उसी भाषा में जवाब देंगे। दुगुना, सूद समेत, ब्याज समेत लौटा कर देंगे..
@Pawankhera
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“Saale… Joote…”: Kailash’s Way of ‘Saving Democracy’?
“इतने जूते खाने के बाद भी सा@#& यहां आ गया”this was minister Kailash Vijayvargiya’s response to an activist holding a poster at BJP’s “Save Democracy”rally in Indore.Prahlad Pandey’s poster questioned alleged purchases of ₹30,000 bulbs and ₹33,000-a-litre phenyl. Vijayvargiya called for police to remove him officers carried him away. If democracy needs saving, shouldn’t a citizen’s right to question be included?
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🚨 BREAKING NEWS - फायरब्रांड ने फिर किया धमाका!
*कांग्रेस के फायरब्रांड प्रवक्ता यश श्रीवास्तव ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में संघी पत्रकार और बीजेपी को ऐसा करारा जवाब दिया कि पूरे शो में सबकी बोलती बंद हो गई!
एक अकेला यश श्रीवास्तव पूरी गोदी गैंग पर भारी!
सच की आवाज को कोई दबा नहीं सकता! जय हिंद!
@YashRRJ
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भाजपा राज में AIIMS को भी इलाज की ज़रूरत है।
सच में यही अंधेर नगरी वाला राज है, बाक़ी सवा दो करोड़ प्रतिदिन का झूठा प्रचार है।
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It is actually not surprising coming from a distinguished gentleman who had famously mixed up Newton and Einstein. Thank god, he didn’t get confused between Einstein and Epstein
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The ECI, in its affidavit before the Supreme Court has placed blame on the West Bengal CEO Mr. Manoj Agarwal. Yet, even before the electoral process was completed and the MCC lifted, the same CEO was appointed Chief Secretary of West Bengal Govt.
Now, the SIR Observer of WB claims he knew nothing about the CEO office’s 16 lakh appeals against voters whose cases had already been cleared.
Who authorised these appeals?
Who is accountable for this extraordinary breakdown in oversight?
Will the Supreme Court intervene to uphold electoral transparency and protect the integrity of our democracy?
#VoteChori
Bengal SIR Observer Says He Knew Nothing About 16 Lakh Appeals Against Cleared Voters
'When you say that such a large number of appeals have been filed, that is information we are now receiving,' Subrata Gupta said.
@chhuti_is reports for @thewire_in
thewire.in/government/bengal…
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झूठ को राष्ट्रीय सत्य घोषित कर देना चाहिए
CM मोहन यादव की सरकार ने भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30,77,00,00,00,000 यानी 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश का दावा किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने मंच से इस आंकड़े की घोषणा की. लेकिन जब इस दावे की पड़ताल हुई तो निवेश प्रस्तावों की सूची में बंद हो चुकी मोमोज की दुकान से लेकर चिकनी आत्मा तक के नाम मिले.
सबसे पहले खर्च का हिसाब समझिए-
मार्च 2024 से नवंबर 2025 के बीच सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने और इसके प्रचार-प्रसार व आयोजनों पर करीब 230 करोड़ रुपए खर्च किए.
इसमें निवेश सम्मेलनों और बैठकों पर 186.64 करोड़ रुपए, CM की तीन विदेश यात्राओं पर करीब 34 करोड़ रुपए और देश के नौ शहरों में निवेश बैठकों पर 9.05 करोड़ रुपए खर्च हुए. रुपए किस कदर बहाए गए इसका अंदाजा लगाइए कि अकेले भोपाल के दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर करीब 82 करोड़ रुपए खर्च किए गए.
अब जरा 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश के दावे की हकीकत भी देखिए-
एक बंद हो चुकी मोमोज की दुकान Mishti Momos के नाम पर 50 करोड़ रुपए, एक हेयर सैलून के नाम पर 3,000 करोड़ रुपए, चिकनी आत्मा के नाम पर 5 करोड़, दरवाजे पर वसीयत के नाम पर 1 करोड़, व्यवसायी के नाम पर 15 करोड़, शोरूम के नाम पर 5 करोड़ और कंप्यूटर के नाम पर 100 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव दर्ज मिले.
इसके अलावा, किसान, नॉट एप्लीकेबल, बहनों का संग्रह, अक्टूबर और किसान मोर्चा जैसे नामों में से प्रत्येक के नाम पर 200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव दर्ज थे.
वैसे, मैं भी यही सोच रहा हूं कि ये कैसे अंड-बंड, संड टाइप नाम हैं, जो करोड़ों-अरबों के निवेश प्रस्तावों की सूची में शामिल हैं.
हैरानी की बात है कि Kaymli Ventures नाम की एक कंपनी के नाम पर 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दर्ज था. जबकि कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड के मुताबिक 2024-25 में उसका कोई राजस्व नहीं था और साल के अंत में उसके पास नकद व बैंक बैलेंस मिलाकर सिर्फ 10,556 रुपए थे.
है न कमाल
सरकार ने 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश का जो दावा किया है, अब जनता को यह भी बताया जाना चाहिए कि हकीकत में कितना निवेश आया, कितनी परियोजनाएं जमीन पर उतरीं और इस पूरे प्रचार का ठोस आर्थिक परिणाम क्या रहा. सरकार सिर्फ आंकड़े घोषित करके तो सवालों से मुक्त नहीं हो सकती.
अगर आप इस अनोखी MoU समिट के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं और समझना चाहते हैं कि सरकार आपके टैक्स के रुपयों से इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर क्या कर रही है, तो साथी @tweets_prateekg की यह पूरी इन्वेस्टिगेशन पढ़िए-
newslaundry.com/2026/10/29/a…


































