सातवें वेतनमान और प्रोन्नति को लेकर शिक्षा मंत्री जी का रुख बहुत ही निराशाजनक है। इससे शिक्षकों में बहुत क्षोभ उत्पन्न हो रहा है।
Every year, sports equipment worth approximately 200 crore rupees is procured for government schools in Bihar. If these schools were to be supplied exclusively with sports equipment manufactured within Bihar, a new industry could be established. There is a need to take serious and prompt action.
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी को खेलो इंडिया Sports Goods Manufacturing Scheme स्वीकृति देने के लिए सहृदय धन्यवाद!
इस स्कीम के तहत बिहार में भी Sports Gear बनाने की वृहत योजना बिहार सरकार तैयार कर रही है। बिहार कैबिनेट से हाल ही में पास की गई MSME और CM CDP Policy के समावेश से इस योजना को और मजबूती मिलेगी।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी के 'मेड इन इंडिया' के सपनों को साकार करने की दिशा में बिहार सरकार कृत संकल्पित है। इस योजना से न केवल बिहार के युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि बिहार में खेल प्रतिभाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
Made In India के लिए संकल्पित बिहार
बिहार के युवाओं को मिलेगा बिहार में रोज़गार!
सरप्लस और डिफिसिट शिक्षकों का मामला सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा है। विभाग भी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है वहां पर सरप्लस शिक्षकों को कैसे भेजा जाए। माननीय शिक्षा मंत्री
@mkrtiwari_bjp जी, कृपया जहां शिक्षकों की कमी है वहां शिक्षकों को भेजने के लिए ठोस उपाय करें।
BPSC TRE 1, 2 & 3 के जिन शिक्षकों ने मेडिकल लीव लिया था और उसका वेतन भी लिया था उन सभी से अनुरोध है कि स्वेच्छा से आवेदन देकर अपनी धनराशि लौटा दें। कुछ शिक्षिकाओं ने तो child care leave भी ले लिया था जिला कार्यालय को मोटी रकम देकर। उनसे भी यही अनुरोध है।
अगले कदम के तौर पर शिक्षा विभाग ऐसे सभी शिक्षकों की भी सूची तैयार कर रहा है। आपको नोटिस जाए और कोई कानूनी कार्रवाई हो इस से बेहतर है कि स्वेच्छा से ऐसे किसी अवकाश के लिए ली गई राशि विभाग को लौटा दें!
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सातवें वेतनमान को लेकर शिक्षा विभाग की बैठक में क्या हुई बात?
कमेटी कब? कड़ा फैसला भी, बाप रे , क्या-क्या हुआ ?
youtu.be/mDNGPxGPZfA?si=oPJ8…
@Khabarunfiltred
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DM साहिब से अनुरोध है कि स्कूल के हेड मास्टर से अंडे का हिसाब लेने से पहले एमडीएम के बोरे में जो 50kg के बदले 40kg चावल आता है उसका हिसाब वेंडर से लीजिए। लेकिन मुझे पता है आप वह हिसाब नहीं ले पाएंगे क्योंकि उसका कमीशन कहां तक जाता है हम सबको अच्छे से पता है!
शिक्षकों का मूल लक्ष्य अपने विद्यालय के बच्चों का लर्निंग आउटकम बढ़ाना होना चाहिए। लर्निंग आउटकम बढ़ाने के लिए बहुत बेसिक स्तर पर काम करना पड़ता है। जितने भी रील बनाने वाले शिक्षक शिक्षिकाएं दिख रहे थे उनके विद्यालय के बच्चों का लर्निंग आउटकम अगर सही से जांच हो जाए तो हकीकत पता चलेगी कि वो स्कूल में कितना पढ़ा रहे थे।
सारे ताम-धाम छोड़कर शिक्षक यदि बच्चों के लर्निंग आउटकम पर फोकस करें तो शिक्षा व्यवस्था में गुणोत्तर सुधार होगा।
ऐसी रीलबाज शिक्षिका के चक्कर में आज विभाग ने इतना कड़ा पत्र निकाला है। पहले इसकी जरूरत ही नहीं थी।
हमारे बहुत सारे साथियों ने और मैंने भी व्यक्तिगत तौर पर कई बार सरकारी स्कूलों में reels के बढ़ते कल्चर पर रोक लगाने की मांग की थी। आज शिक्षा विभाग की बैठक में सरकारी स्कूलों में सभी शिक्षकों (विशेष कर शिक्षिकाओं) के द्वारा Reels बनाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है।
Bihar is a state defined by a culture of criticism. The Chief Minister recently visited Delhi, where several significant agreements were reached and crucial discussions took place regarding the state's development. These included road projects worth ₹45,000 crore, encompassing various expressways. An important agreement was also signed with the National Highways Department to address the issue of silt deposition—a primary cause of flooding in the state.
Furthermore, there were substantive discussions concerning the establishment of new industries and the promotion of eco-tourism in Bihar.
Yet, the people of Bihar seem indifferent to all of this. Their entire discourse is fixated on a single word that the Chief Minister omitted during his one-hour address. It appears he intended to refer to "organized crime," but the word "organized" slipped his mind, leaving only the word "अपराध."
Yesterday, the entire conversation on social media—including the discourse among Bihar-focused YouTube channels—revolved solely around this issue of "अपराध and crime." No one deemed it important to highlight what Bihar actually gained from this two-day visit to Delhi: what schemes or projects were agreed upon with the Central government, or what roadmap is being developed for the state's future growth?
This is the tragic reality of Bihar. People here crave sensationalism more than development; they derive more pleasure from criticism than from discussing constructive initiatives. If we continue to abandon substantive issues in favor of such trivial, nitpicking criticism, development will remain an impossibility. If focus remains entirely that one-hour speech then we might have one week of preparation just for perfecting a speech.
A slip of the tongue is not a grave matter—what truly matters is that one’s integrity does not slip.
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ब्राह्मण शिक्षक खुद ब्राह्मणवाद के खिलाफ़ है 🔥
ब्राह्मण शिक्षक ने कहा "ब्राह्मणवाद ने पूरे देश को बर्बाद कर दिया है, जब तक ब्राह्मणवाद ख़त्म नहीं होगा तब तक देश का भला नहीं होगा",
यह ब्राह्मण शिक्षक ईमानदार है, जो कह रहा है "मेरी जाति के लोगों ने जो नीचता किया है शायद ही किसी ने किया हो, ब्राह्मण ने सिर्फ़ ठगने का कार्य किया है"।
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Delhi : बिहार की कमजोरी बनेगी ताकत, जलाशयों से निकली गाद से बनेंगी सड़कें और रेलवे ट्रैक, पूरा खर्च उठाएगी केंद्र सरकार।
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बिहार की सबसे बड़ी समस्या है बाढ़ और इस बाढ़ की वजह है नदियों में जाम गाद! नदी संजीवनी योजना के तहत बिहार सरकार नदियों की गाद का इस्तेमाल राजमार्ग बनाने के लिए करना चाहती है। यह एक बहुत ही क्रांतिकारी योजना होगी अगर सफल हो सके तो।
MLC चुनाव से पहले जो लोग सातवां वेतनमान दिलवा रहे थे शिक्षकों को वो लोग ना जाने चुनाव के बाद कहां दुबक गए हैं। उस समय तो ऐसा लग रहा था जैसे आज घोषणा हुई कि कल हुई। लेकिन अब सारे अनशनकारी और उनके समर्थक कि बिल में छुप गए हैं... पता ही नहीं चल रहा है।
मुझे शुरू से संदेश था कि वह पूरा आंदोलन प्री प्लांड था और राजनीति से प्रेरित था। MLC चुनाव की घोषणा होने के बाद भी जिस तरीके से सरकार ने उस प्रदर्शन की अनुमति दी और फिर उसको समाप्त करवाने में भी जिस प्रकार से एनडीए के नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई उससे यह स्पष्ट था कि यह पूरी तरह से प्रायोजित अनशन था।
अब उस अनशन के सूत्रधार और कर्णधार कहां हैं? उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। सातवां वेतनमान कब दिलवा रहे हैं? शिक्षकों को कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। मुंह में दही जम गया है या उनके समर्थित उम्मीदवारों का जमाना जप्त हो गया है? समझ में नहीं आ रहा है।
उम्मीद है उस प्रदर्शन के पुरोधा जल्द सामने आकर शिक्षकों के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।











