इनका अलग ही लेवल का चुतियापा चलता है रोज 😁😁
नहीं रहे पाकिस्तानी Javelin thrower अरसद नदीम,@grok न्यूज की पुष्टि कर !!
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देश की वैज्ञानिक क्षमता को बर्बाद करने के लिए 2022 में मोदी ने साइंटिफिक और तकनीकी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था बनाई। किसी से पूछा नहीं, चुपके से लागू किया जैसा कि इस समाजविभाजक प्रधानमंत्री ने अपने भीम प्रेम में पहले भी किया है।
यह व्यक्ति यही कार्य प्राइवेट क्षेत्रों में भी आरक्षण के लिए 2028 के बजट सत्र में या उससे पूर्व ग्रुप डी से आरंभ करेगा। जबकि सत्य यह है कि जिसके लिए यह इतना झुक रहा है, वो इसे कहीं नहीं वोट करते।
@narendramodi इसी कारण 2047 का लक्ष्य रखा है कि तब किसको याद रहेगा?
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देश में बैंककर्मिओं की स्थिति पर जल्द बात शुरू नहीं हुई तो हालत बिगड़ सकते हैं। जिस तरह आए दिन बैंककर्मी सुसाइड कर रहे हैं,यह खतरे की घंटी है।
बैंको का कामकाज भी देश की सुचारू सिस्टम का लाइफलाइन है। वह बाधित हुआ तो बड़ी समस्या होगी।
उनकी बात सुनिए। देखिए आसपास क्या हो रहा है ।
मोदी जी का एक और मास्टरस्ट्रोक 😁 @neha_laldas
🚨 RBI New circular for credit facilities to SC/ST
👉 Bank Branches can’t reject loans of SC/ST customers
👉 Bank Staff will have to fill Application Form of SC/ST customers
Read important points: hellobanker.in/?p=90375
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अब एक समाचार 'सूत्रों' के नहीं, 'उच्च पदस्थ सूत्रों' के हिसाब से फैलाया जा रहा है कि सरकार UGC रोलबैक नवंबर के मध्य में करेगी। यह कोई समाचार नहीं है, यह वही धूर्तता है जो इनके प्रवक्ताओं के मुँह में माइक देने पर ये कहते हैं कि 'विषय कोर्ट में है'।
ध्यान रहे हमारी तीन माँगें हैं:
1. UGC रोलबैक
2. मोदी एक्ट में समुचित संशोधन
3. वर्तमान आरक्षण में समीक्षा
कोई एक माँग से कुछ नहीं होने वाला। संघर्ष चलता रहेगा। 5 महीना लगे, 2 साल लगे, 10 साल लगे।
कल शाम से लाइट नहीं है , लगभग चौबीस घंटे होने वाले हैं @UPPCLLKO थोड़ी सी हवा चली और बिजली गायब और ये हाल प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का है
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राजकिशोर सर का अकाट्य तर्क मुग्ध कर लेने वाला है। फिर भी @RajkishorLive की बात पर थोड़ा सा मतांतर रखते हुए कहना है कि
निःसंदेह बिहारीलाल में विस्तार है, कविता व्यापक है। इसके मुकाबले घनानंद के यहां एकरस चीजें हैं। प्रेम का संयोग कम विप्रलंभ अधिक है। और उसी में मौन पुकार है। थोड़ी भक्ति भी है लेकिन शृंगार ही अधिक है। हालांकि शृंगार इतना जबरदस्त है कि वह कविता पढ़ते हुए मृदंग की तरह बजता हुआ प्रतीत होता है। उनके पास साहित्य को व्यक्त करने वाली लाक्षणिक पदावली है। और सबसे प्रमुख तो वह पीड़ा है जिसे वह चुप रहकर सह रहे हैं। जिसे वह कह नहीं रहे हैं लेकिन वह प्रकट हो रही है। उनकी पीड़ा और उसकी अभिव्यक्ति कविता बन गई है। इतना ईमानदार कोई नहीं दिखता। स्व की बात करने वाले इतने मुखर कवि बाद में निराला मिले। उसके बाद कोई बड़ा कवि नहीं है।
बिहारीलाल को अच्छा संरक्षक मिल गया। उन्होंने उनकी कविता को तुरंत पुरस्कृत करना आरम्भ किया। घनानंद का संरक्षक तो उनकी बेअदबी से खिन्न हो गया था। दरबार से निकाल ही दिया। घनानंद अहमद शाह अब्दाली के अभियान में मारे गए। सैनिकों ने उन्हें प्रताड़ित करके मारा। वह कृष्णभूमि का रज उड़ाकर जीवन दर्शन को व्यक्त करने वाले कवि बने।
बिहारीलाल सिद्ध थे। अभ्यास से सिद्ध हुए। घनानंद सिद्ध + 1 हैं। उनका दुःख भोगा हुआ है।
फिर, घनानंद आधुनिक चेतना युक्त हैं। उनके प्रेम के आदर्श को दीप/पतंगा, जल/मीन से नहीं व्यक्त किया जा सकता। जो अकुलाहट है, पीड़ा है, वह बिहारी के यहां नहीं।
यदि पीड़ा को, करुणा को हटा दें तो शृंगार नक्काशी है, पच्चीकारी है, सजावट है। यह गुलदस्ता जैसा है। उसमें प्राकृतिक सौंदर्य नहीं है।
मुझे लगता है कि बिहारीलाल की कविता एक गुलदस्ता है। घनानंद की कविता एक "वन बाग उपवन वाटिका" जैसी है। बहुत आदर के साथ कहना है कि मुझे गुलदस्ता और वाटिका में से चुनना ही हो तो मैं वाटिका ही चुनूंगा।
आपकी बात का सम्मान करते हुए, घनानंद और बिहारी के इस प्रश्न पर मैं अपनी राय थोड़ा खोलकर रखता हूं, क्योंकि यह केवल दो कवियों की तुलना नहीं, कविता को देखने की दो दृष्टियों का प्रश्न है।
घनानंद के बारे में आपने जो कहा, उससे असहमति का प्रश्न ही नहीं। रीति की बंधी - बंधाई परिपाटी के बीच उनकी कविता सचमुच कलेजे से निकली हुई आवाज है। -अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं- जैसी पंक्ति पढ़कर लगता है कि कवि कविता नहीं लिख रहा, अपना घाव दिखा रहा है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भी उन्हें ब्रजभाषा के सबसे सच्चे प्रेम-कवियों में गिना था। सुजान के विरह ने उन्हें जो पीर दी, वही उनकी कविता का प्राण बनी।
पर मेरी कठिनाई ‘अभ्यास’ और ‘सिद्धि’ वाले इस विभाजन से है। बिहारी का शिल्प अभ्यास भर होता तो सात सौ दोहों की सतसई पर सदियों तक टीकाएं न लिखी जातीं। —-कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन में करत हैं, नैननु ही सौं बात॥—- इस एक दोहे में पूरा नाटक है- भरा हुआ घर, दो प्रेमी, और आँखों ही आँखों में कहना, मुकरना, रीझना, खीझना, मिलना, खिलना और लजाना। सात क्रियाओं की यह झड़ी नाद सौंदर्य में भी किसी कवित्त से कम नहीं। दोहे जैसे छोटे छंद में इतना समेट लेना कारीगरी से आगे की चीज है। जिसे हम अभ्यास कहते हैं, वह बिहारी के यहाँ साधना बनकर सिद्धि तक पहुँचता है।
दूसरी बात विस्तार की है। घनानंद एक ही भाव के कवि हैं, गहरे, पर एक ही। बिहारी के यहां श्रृंगार है, भक्ति है, नीति है, लोक का चुटीला निरीक्षण है। —मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय-१में भक्त बिहारी हैं, और —नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं बिकास इहि काल। अली कली ही सौं बँध्यौ, आगैं कौन हवाल॥— में वह कवि जिसके एक दोहे ने राजा जयसिंह को विलास से जगाकर राजकाज की ओर लौटा दिया। कविता का समाज पर ऐसा सीधा असर कम ही देखने को मिलता है।
साहित्य का पूरा खजाना है हिंदी के पास !
राजकिशोर सर का अकाट्य तर्क मुग्ध कर लेने वाला है। फिर भी @RajkishorLive की बात पर थोड़ा सा मतांतर रखते हुए कहना है कि
निःसंदेह बिहारीलाल में विस्तार है, कविता व्यापक है। इसके मुकाबले घनानंद के यहां एकरस चीजें हैं। प्रेम का संयोग कम विप्रलंभ अधिक है। और उसी में मौन पुकार है। थोड़ी भक्ति भी है लेकिन शृंगार ही अधिक है। हालांकि शृंगार इतना जबरदस्त है कि वह कविता पढ़ते हुए मृदंग की तरह बजता हुआ प्रतीत होता है। उनके पास साहित्य को व्यक्त करने वाली लाक्षणिक पदावली है। और सबसे प्रमुख तो वह पीड़ा है जिसे वह चुप रहकर सह रहे हैं। जिसे वह कह नहीं रहे हैं लेकिन वह प्रकट हो रही है। उनकी पीड़ा और उसकी अभिव्यक्ति कविता बन गई है। इतना ईमानदार कोई नहीं दिखता। स्व की बात करने वाले इतने मुखर कवि बाद में निराला मिले। उसके बाद कोई बड़ा कवि नहीं है।
बिहारीलाल को अच्छा संरक्षक मिल गया। उन्होंने उनकी कविता को तुरंत पुरस्कृत करना आरम्भ किया। घनानंद का संरक्षक तो उनकी बेअदबी से खिन्न हो गया था। दरबार से निकाल ही दिया। घनानंद अहमद शाह अब्दाली के अभियान में मारे गए। सैनिकों ने उन्हें प्रताड़ित करके मारा। वह कृष्णभूमि का रज उड़ाकर जीवन दर्शन को व्यक्त करने वाले कवि बने।
बिहारीलाल सिद्ध थे। अभ्यास से सिद्ध हुए। घनानंद सिद्ध + 1 हैं। उनका दुःख भोगा हुआ है।
फिर, घनानंद आधुनिक चेतना युक्त हैं। उनके प्रेम के आदर्श को दीप/पतंगा, जल/मीन से नहीं व्यक्त किया जा सकता। जो अकुलाहट है, पीड़ा है, वह बिहारी के यहां नहीं।
यदि पीड़ा को, करुणा को हटा दें तो शृंगार नक्काशी है, पच्चीकारी है, सजावट है। यह गुलदस्ता जैसा है। उसमें प्राकृतिक सौंदर्य नहीं है।
मुझे लगता है कि बिहारीलाल की कविता एक गुलदस्ता है। घनानंद की कविता एक "वन बाग उपवन वाटिका" जैसी है। बहुत आदर के साथ कहना है कि मुझे गुलदस्ता और वाटिका में से चुनना ही हो तो मैं वाटिका ही चुनूंगा।
सभी बैंकों का सर्कुलर कमोबेश ऐसा ही है । बैंक तो खाली सरकार की जिद पूरी करने के लिए खुल रहे हैं।
As per @rbi guidelines , bank branches should be opened on sunday for convenience of customers but services such as clearing , bills etc are not to be carried out because of implications of NI act .
Why not , for extra convenience of customers, RBI also should opend on sunday and run these services .
गरम चाय के पैसे लेकर ठंडी चाय पिलाना साहेब की बचपन की आदत है और बचपन की आदत कभी नहीं जाती और बुढ़ापे में तो बिल्कुल भी नहीं । लोग खामखा दिल पे ले लेते हैं।
एक और मास्टरस्ट्रोक! इस सरकार का एक ही मोटो रह गया है , पहले खुले में हग दो फिर उसे साफ करने का काम किसी और को दे दो और फिर गंदगी फैलने पर साफ करने वाले को बलि का बकरा बना दो ।
Govt Sources say: Banks will monitor merchants that MDR (Merchant Discount Rate) should not be passed on to consumers.
Indian Bank Association (IBA) will make a mechanism and make sure that MDR on UPI is not passed on to consumers
Finance Ministry will hold meeting with IBA (Indian Banks' Association) on UPI issue
Finance Ministry will also meet with merchants and CAIT (Confederation of All India Traders) on MDR issue
IBA to start an explanatory campaign in every regional language for consumer awareness
GST Council likely to take a view with respect to GST on MDR
D K MISHRA retweeted
कल तक जो सदाओं में चिल्लाता था वारेन एंडरसन का नाम ।
आज दबी आवाज में मैथ्यू वैनडाइक से कहता है : अब्बाजान ! अब्बाजान !!
Myanmar Training Camp case | Special NIA court at Rouse Avenue has granted permission to US National Matthew Aaron Vandyke and 6 Ukrainian nationals to travel to the USA and Ukraine to meet their families for one month, subject to certain conditions and formalities. The court directed the release of their passports to them. All 7 foreigners have been granted default bail by the court. They are likely to be released from Tihar Jail today.
चटूआ सेल वाले अब नहीं बताएंगे कि कौन अमेरिका का एजेंट है ।
खैर एक बात तो साफ होती जा रही है कि महामानव ही कही न कही अमरीकी एजेंट बन गया है एपस्टीन फाइल के आने के बाद !
Myanmar Training Camp case | Special NIA court at Rouse Avenue has granted permission to US National Matthew Aaron Vandyke and 6 Ukrainian nationals to travel to the USA and Ukraine to meet their families for one month, subject to certain conditions and formalities. The court directed the release of their passports to them. All 7 foreigners have been granted default bail by the court. They are likely to be released from Tihar Jail today.
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साँसों की माला पे सिमरुं मैं
CIA का नाम
Myanmar Training Camp case | Special NIA court at Rouse Avenue has granted permission to US National Matthew Aaron Vandyke and 6 Ukrainian nationals to travel to the USA and Ukraine to meet their families for one month, subject to certain conditions and formalities. The court directed the release of their passports to them. All 7 foreigners have been granted default bail by the court. They are likely to be released from Tihar Jail today.
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बैंकों का मुनाफा बढ़ रहा है लेकिन कर्मचारियों की संख्या घट रही है और काम घटाने की बात ना करते हुए बैंक वाले 2 दिन की छुट्टी माँग ले रहे तो आग लगी है सिस्टम को।
क्या सरकारी, क्या प्राइवेट बैंक.. देखिए क्या ही हो रखा है बैंकर्स का हाल
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बैंक मुनाफे में चल रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों को 2दिन की छुट्टी देने में इनको मौत आने लगती है।
जबकि आप ख़ुद देखिए बैंक कर्मचारियों पर काम का कितना प्रेशर है।
अब वो हड़ताल नहीं करें तो क्या करें
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शोषण व्यक्ति नहीं करता , शोषण हमेशा व्यवस्था करती है। आज के दौर का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि लोग व्यवस्था को सुधारने की बजाय व्यक्ति को टारगेट करने लगते हैं। व्यक्ति को टारगेट करना आसान है , व्यवस्था को सुधारना बहुत ही मुश्किल काम है शायद इसीलिए स्थापित व्यवस्था कभी बदल नहीं पाती इस देश में।

















