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Rahul Gandhi is a MP whom his constituency threw away because he and his family couldn't develop.
His mother also ran away due to same reason.
Only fool can expect development from Family which can't develop their own constituency.
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आज शिवम भाई त्यागी के हत्थे तहसीन पूनावाला चढ़ गया, क्या खिंचाई की लाइव डिबेट में मजा आ गया।
– हिंदुओं को जाति/पहचान से बुलाना बनाम मुसलमानों को 'अब्दुल' कहना
– 2018 से अब तक SC/ST एक्ट ऑर्डिनेंस पर कथित यू-टर्न
– प्लेसेज ऑफ़ वर्शिप एक्ट का हवाला देते हुए संभल में मंदिर के बजाय मस्जिद का समर्थन करना
– उमर खालिद के विवादित भाषणों का बचाव करना
– स्मृति ईरानी को टारगेट करते हुए कंडोम पर पिछली भद्दी टिप्पणी
@ShivamSanghi12
Avi retweeted
Let me guess this message. The Congress party cadre will spit at you if you do not put up the poster of Rahul Gandhi? And they want me to vote for them after that?
teapawt.net/JhaSanjay/status/21139…
@kushal_mehra ! Midas touch of Congressies.. Can we ask them to praise major NZ test team players
Avi retweeted
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Urgent help needed -
B+ male blood donor needed for platelets for 1 day old baby in Ghaziabad.
Please let me know or directly contact Ravil Thakur (+91 77108 28856).
Avi retweeted
Three unemployed individuals with no real jobs, yet living a five-star lifestyle with business-class flights, astronomical rental expenses, foreign funding and personal legal teams, all with ZERO accountability.
If this is the reality, how many more “Achhe Din” do we need under the Modi government?
Happy Birthday @GSVKapoor madam.. have a great year and stay healthy.. More Power to you..
Kya dhoya hein @Radhika_Khera Madam ne. Every point is meme worthy .
Avi retweeted
‘सुरक्षाकर्मियों पर हाथ उठाने वालों के हाथ काट देने चाहिए!’
– तहसीन पूनावाला
बस फिर क्या था…
बात उनकी ‘भाभी जी’– प्रियंका गांधी के सुरक्षाकर्मी को धक्का-मुक्की वाले वीडियो पर आई तो ‘BRO’ Charity Begins at Home भूल गए!
ज्ञान डिबेट के लिए अलग है और रिश्तेदारों के लिए अलग? 😂👇🏼
Avi retweeted
प्यार देने का हर इंसान का अपना-अपना तरीका होता है। ❤️
कोई अपने शब्दों से प्यार जताता है, कोई छोटी-छोटी खुशियों से, कोई ख्याल रखकर तो कोई बिना कहे हर मुश्किल में साथ निभाकर। 🫶
प्यार हमेशा महंगे तोहफों या बड़ी-बड़ी बातों में नहीं होता, कभी-कभी किसी का वक्त देना, आपकी चिंता करना और आपकी खामोशी समझ लेना ही सबसे खूबसूरत प्यार होता है। ❤️
प्यार जताने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन एहसास सच्चा होना चाहिए। 🌹
Avi retweeted
Ye khabar maine 23 ko likhi thi , saathiyo ko bangal chunav ke natijon ke baad hi bataai thi ...
Ek baar padhiye , kuch kuch samjh aa jayega
बिहारी से लेकर बंगाल तक गली नुक्कड़ गाँव हम सब घूमे । खूब मतदान हुआ और जो जमीन पर था वहीं चुनावी नतीजा आया ।
बिहार में तेजस्वी राहुल गठबंधन फाइनल नहीं कर पाए अंतिम दिनों तक , कोई एजेंडा नहीं । बारिश और मौसम खराब हुआ तो रैली नहीं की । दूसरी तरफ कथित रुक से वृद्ध हो चुके नीतीश रोड से ही प्रचार के लिए निकल गए । पीएम ने ताबड़तोड़ रैली की । बागियों को शांत करने के लिए अमित शाह ने पटना में कैंप किया ।
नतीजा nda के पक्ष में आया , 2 महीने घूम कर नतीजों से पहले हम जैसे मामूली लोगों ने भी नतीजा बता दिया ।
अब बात बंगाल की । जिन महिला वोट बैंक के सहारे ममता ने 2021 में सत्ता में वापसी की अगले 5 साल वही प्रताड़ित होती रही । हर लोकसभा में लगभग कोई ना कोई दंगा । हार तय थी ये ममता को भी मालूम था , इसीलिए ना ब्रिगेड रैली हुई ना पुराने जैसा बड़ा प्रचार । बंगाल की राजनीति समझने वाले ब्रिगेड की अहमियत समझते है । ममता तो 2011 से पहले वाले दौर में चली गई , वही धरने पर बैठी जहां बैठ कर सत्ता में आ पाई थी । कुछ काम नहीं आया 2021 में जनता ने cpim और कांग्रेस को छोड़ भाजपा को मुख्य विपक्षी पार्टी बनाया था । तब भाजपा का उस स्तर का संगठन भी नहीं था । 5 बरस में भाजपा ने हर जगह संगठन बनाया । हारने वाली सीट पर भी मजबूत उम्मीदवार उतारे। ममता के खास फिरहाद हकीम और संदीपन साहा जो ममता का भवानीपुर दुर्ग की हिफाजत करते थे उन्हें अपने घर में ही राकेश सिंह और प्रियंका टिबरेवाल से टक्कर दिलवाई । दोनों अपना घर बचाने में लग गए । भाजपा के ये दोनों कैंडिडेट जानते थे हार तय है फिर भी पूरी ताकत से लड़े । दूर से चुनाव देखने वालों को तो लगता था कि वो जीत रहे है । हावड़ा में एक बंधु और बाहर से देखने वालों को हम जैसे नासमझ ने समझाया यहां खेल दूसरा है । ये दोनों उलझाने के लिए खड़े किए गए है । सुजानपुर में मात्र 10 प्रतिशत यानी 30k करीब हिंदू वोट है वहां भाजपा के युवा कैंडिडेट को 24k के आसपास वोट मिले लगभग 90 प्रतिशत के करीब वोटिंग हुई थी । ये आंकड़ा आपको इसीलिए बताया है ताकि समझ सके हिंदू वोटर ममता के शासन से कितना प्रताड़ित हो चुका था । Cpim और कांग्रेस को ममता खुद ही खत्म कर चुकी थी तो रिजल्ट वही आया जो अपेक्षित था । ब्रिगेड रैली के दिन मैने अपने ऑफिस ग्रुप में 160+ बीजेपी का आंकड़ा लिख कर डाल दिया था । साथ में बंगाल घूम रहे साथियो को भी तब भरोसा नहीं था । बंगाल और बिहार दोनों के एग्जिट पोल में मै लगभग 200 पार सीट से रहा था । सेफ़ रहने माने की गलत ना हो इसीलिए साथी ने कहा 20 - 20 सीट कम कर दीजिए महराज ।
कहने का तात्पर्य ये है कि 3 लोगों की टीम लेकर पूरा राज्य कायदे से टहलने वाले हम जैसे मामूली लोग ये जानते है तो क्या राजनैतिक दल ये नहीं जानते होंगे ।
Jmm झारखंड कैसे जीती , विजय को पहले चुनाव में ही तमिलनाडु की सत्ता कैसे मिल गई , केरल में कांग्रेस की वापसी कैसे हो गई । बांकीपुर प्रशांत किशोर कैसे जीत गए ।
सब रणनीति , जमीन पकड़ और संगठन के खेल के कारण संभव हो पाता है ।
बिहार चुनाव में वोटिंग के दिन ही राजद को अपनी हार के बारे में पता था , इसीलिए तो इनका इकोसिस्टम ये फैलाने में लग गया कि जहां तीर नहीं वहां लालटेन ही तीर है । राजद कांग्रेस ने तो चुनाव से पहले घुटने टेक दिये थे ।
ममता दीदी ने पहले फैलाया कि ये अंदर की बात है ममता मोदी साथ है । फिर अपने प्रॉक्सी खड़े करने की कोशिश की ताकि नाराज वोट विभाजित हो । कांग्रेस और सीपीएम लगभग खत्म कर दिया ताकि मुस्लिम वोटो का बंटवारा ना हो । और तृणमूल तो फिर मिलेंगे याद ही होगा ।
तो ये सारा हल्ला क्या है ।
तो भैया हम इतने समझदार तो है नहीं । अपनी मामूली सी समझ और 18 राज्यों को तबियत से घूम पाने के छोटे अनुभव से बड़ी छोटी बात कहना चाहते है ।
2014 में मोदी का सत्ता में आना लोगो को तुक्का लगा , अफ़सरशाही हो या न्यायपालिका या विपक्ष या कथित लिबरल intellectual समाज, सबने सोचा बस टुक्के में हो गया है । छोटे से प्रहार से हटा दिया जाएगा ।
2019 की जीत ने इन सभी जड़े हिलाई , बड़े प्रपंच शुरू हुए , वैश्विक महामारी कोरोना के बीच भारत का खड़ा रहना अब विदेशी ताकतों के लिए भी तनाव का विषय बना । इसी दौरान 370 हटा , राम मंदिर बना , CAA पेश किया गया और भी बड़ी घटनाएं हुई । 2017 में जिस गुजरात में कांग्रेस ने टक्कर दी 2022 में लगभग वहां से साफ हो गई , 2018 में राजस्थान छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश में सरकार बनाने वाली कांग्रेस 2023 में साफ हो गई । अब इन्हें हराने के लिए लोकसभा के दौरान संविधान बदल देंगे का नारा मुकम्मल किया गया । यूपी महाराष्ट और राजस्थान में अच्छा सामाजिक समीकरण भी बनाया और 240 पर 2024 में भाजपा को रोक दिया गया ।
अब इन्हें
What a bad week for Short heighted (doesn't want to use what Bumrah used)..
Pehle Dickpe kuta gaya.. now looks Bavuma will taste his 1st defeat in 13th test..
@kushal_mehra @TweetinderKaul
Real public is waiting for treatment with eggs.
Replying to @MahuaMoitra
didi when will there be protests in bengal ? its required here more than anywhere else
























