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प्रस्तुत है पाखंडवाद से कोसों दूर, भीमानयम ग्रंथ।
क्या चल रहा है जी ये सब ? @sringerimath ?
@jyotirmathah @DandiSwami @govardhanmath @KanchiMatham
#Nigrahacharya #निग्रहाचार्य #Jagadguru
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बीजेपी आज नहीं, पहले भी जातिवादी समीकरणों के हिसाब से उम्मीदवार खड़े करती थी।
जिस क्षेत्र में जिस जाति का वर्चस्व होता है, वहां उसी जाति का उम्मीदवार खड़ा किया जाता है, चाहे वह कितना भी भ्रष्ट या हिंदू विरोधी क्यों न हो।
मैं एक ऐसे नेता को जानता हूं, जिसने माता सीता और तुलसी के पौधे तक का अपमान किया था, लेकिन उसे सिर्फ इसलिए उम्मीदवार बनाया गया क्योंकि उस क्षेत्र में उसकी जाति का वर्चस्व था।
और लोगों ने उसे जाति और कुछ लोगों ने बीजेपी के नाम पर वोट दे कर जिता भी दिया।
जो लोग बीजेपी को हिंदूवादी पार्टी समझते हैं, उनकी गलतफहमी है।
बीजेपी हिंदुत्व की विचारधारा पर नहीं, बल्कि जातीय समीकरणों पर चलने वाली अवसरवादी पार्टी बन चुकी है। 🙏
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Replying to @PiyushGoyal
@PiyushGoyal जी विदेशों से भारतीयों को इसी आरक्षण का सुख लेने के लिए बुला रहे क्या?
सामान्य वर्ग के 800 में 550 नंबर लाने वाले छात्र को MD Anaesthesiology नहीं मिल रही वहीं 800 में 70 नंबर लाने वाले SC कैंडिडेट को सीट मिल रही है।
और इसका तर्क दिया जाएगा कि SC के साथ शोषण हुआ है।
सरकार बताए कि क्या दलितों का शोषण 800 में 550 नंबर लाने वाले छात्र ने किया?
जिसने शोषण किया उसे कब्र से निकालो और उसे दंड दो ।
छात्रों का भविष्य क्यों खराब कर रहे।
Thank you Constitution of India, its politicians and its people.
A general category candidate scoring 550 marks with an All India Rank of 13,000 in NEETPG cannot get MD Anaesthesiology at Banaras Hindu University.
But an SC candidate with just 70 marks out of 800 and rank 2,23,863 walks straight into the same MD Anaesthesiology seat at BHU.
This is not counselling.
This is the open murder of merit.
You are stuffing operation theatres with people who scored lower than random guessing, then expecting them to anaesthetise patients.
Patients will pay with their lives. Genuine doctors who actually studied will keep rotting outside. And you will still call this “social justice”.
Keep destroying the system.
History will remember who sold merit for votes.
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बीजेपी को लगता है कि बीजेपी से सवर्णों का अस्तित्व हैं, भाई अब भी समझ जाओ, बीजेपी से सवर्णों का नही बल्कि सवर्णों से बीजेपी का अस्तित्व है।
सवर्णों की कब्र खोदने की तैयारी करोगे, तो ऐसे झटके मिलते रहेंगे।
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बीजेपी सरकार जब POK लेने की तैयारी करे तब इंडियन आर्मी की जगह भीम आर्मी को युद्ध के मैदान में भेजे।
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राजस्थान में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सरपंच का आंकड़ा देखा 2021 का तो नहीं दिखा लेकिन 2005 का मिला
कुल सरपंच 9188
जनरल सिर्फ 1767 (19.2%),
SC 1692 (18.4%),
ST 2030 (22.1%),
OBC 3688 (40.1%)
2005 में ही जनरल सरपंच SC ST से भी आधे थे
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देश में कुछ वर्गों को अधिकार और सुविधाएं आबादी के हिसाब से चाहिए, किंतु देश के प्रति जिम्मेदारियों में हिस्सेदारी नहीं चाहिए, उसके लिए सामान्य वर्ग है।
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सामान्य वर्ग के बिना बीजेपी की क्या स्थिति है, शायद वाराणसी और पटना MLC चुनाव के रिजल्ट से स्पष्ट हो गया।
जिन्हें अभी स्पष्ट नहीं है, इंतजार करें। आगे बहुत सारे मौके मंथन के लिए दिए जाएंगे। 🙏
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Replying to @ajeetbharti
@ajeetbharti और @neha_laldas यूजीसी, SCST एक्ट और आरक्षण पर कुछ पोस्ट कर रहे हैं, बीजेपी का ऐसा ही रिएक्शन है। 😆😆😆😆😆
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मराठा आरक्षण सही ठहराने के लिए भाजपा सरकार ने 2017 में गायकवाड़ कमीशन बनाया!
इस रिपोर्ट में लिखा है:
-जाति व्यवस्था में ब्राह्मण ऊंची जाति है, बाकी सब शूद्र हैं
-ब्राह्मणों ने खुद को ऊंचा, बाकी सबको शूद्र घोषित कर दिया
-मराठा क्षत्रिय नहीं, शूद्र हैं
-शिवाजी महाराज का राज्य-अभिषेक ब्राह्मणों ने ये कहकर मना कर दिया कि तुम शूद्र हो
रिपोर्ट 2018 में जमा हुई थी!
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Replying to @BJP4India
@BJP4India !
@NitinNabin जी!
मोदी है तो मुमकिन है...
का नारा आसमान छूता है, हर असंभव
लगने वाला लक्ष्य धरातल पर उतरता
दिखता है...
यह इस राष्ट्र की राजनीतिक इच्छाशक्ति का लोहा मनवाता है...
किंतु इसी स्वर्णकाल के शोर के बीच,
वह सामान्य वर्ग जिसकी रगों में इस राष्ट्र के निर्माण, संस्कृति और बलिदान का इतिहास बहता है, आज अपनी ही व्यवस्था में ठगा सा महसूस कर रहा है।
क्या सामान्य वर्ग का होना इस देश में कोई अभिशाप बन गया है ?
नीति-निर्धारण के गलियारों में
इन्हें हमेशा कमजोर मानकर उपेक्षित समझ लिया गया है...
यह मान लिया गया है कि ये बिना किसी अधिकार और हिस्सेदारी के भी चुपचाप सब सहते रहेंगे।
राष्ट्रवाद और विकास के इस महायज्ञ में
यदि सबका साथ और सबका विकास का उद्घोष है, तो रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले
इस वर्ग के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी अब और अधिक समय तक स्वीकार्य नहीं हो सकती...
न्याय केवल कुछ चुनिंदा वर्गों के लिए
नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का अधिकार है जो इस मातृभूमि के उत्थान में अपना पसीना बहाता है...
GC की उपेक्षा का परिणाम सामने है,
लाख अप्रिय सही किंतु जो है सो यही है...
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याद कीजिये 2014 का वो साल जब मोदी ने 282 सीट के साथ लोकसभा चुनाव जीते थे। चारो तरफ हिन्दू हृदय सम्राट मोदी का डंका बज रहा था। नोटबंदी और बिना प्लानिंग के लागू की गयी gst से लोगो को भयंकर परेशानियां हुई लेकिन किसी ने उफ्फ तक नहीं किया और देश हित में सब सह लिया। लोग जातिवाद की भावना से ऊपर से उठने लगे थे। लेकिन इन लोगो ने जातिवाद का कार्ड खेलना शुरू किया।
क्षेत्रवाद से तो मोदी जी कभी ऊपर उठ ही नहीं पाए। गुजरात उनके लिए सदा देश से पहले रहा। आज स्थिति ये हो गयी है कि एक समय जिस मोदी के नाम पर भाजपा पूरे देश में चुनाव जीतती थी वो मोदी आज अपनी लोकसभा में एमएलसी तक चुनाव अपनी पार्टी को नहीं जितवा पा रहा। ugc लाना मोदी की अब तक की सबसे बड़ी गलती साबित हुई है।
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बीजेपी इश्क सामान्य वर्ग से लड़ा रही थी और जब ब्याह की बारी आई, तब ब्याह फुलेवादी से कर आई।
अब सामान्य वर्ग भी अपने लिए योग्य वर की तलाश में बीजेपी को छोड़कर निकल पड़ा, तो बीजेपी सामान्य वर्ग को डरा रही है कि दूसरे से ब्याह मत करो, तुमसे दहेज लेंगे और मारेंगे भी। 🤫😜
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सामान्य वर्ग को अब नेता मिलने लगे हैं। सामान्य वर्ग के सभी नेता अब तक मुँह बंद किए बैठे थे। वे अविलंब सुधर जाएं, अन्यथा इतिहास का हिस्सा बनने को तैयार रहें।
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पटना से MLC चुनाव जीते Dr संजय कुमार ने खुले शब्दों में UGC का विरोध किया था और हाल ही में बिहार सरकार के 65% आरक्षण का भी विरोध किया।
जनता ने इन्हें चुनाव जिता दिया।
अब बीजेपी मंथन करे कि जनता का मूड क्या है।
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अनुराग जी!
आघात पर प्रतिघात और सिंहासन की चाकरी,
ये दोनों रथ एक साथ नहीं चल सकते।
जब चुनाव रूपी वैतरणी पार करने के लिए कंधे आपके अपने थे,
तब सिंहासन की चौखट पर अनैतिक समझौते किसके इशारे पर रचे गए ?
मंचों से हुंकार भरने और
सावन-भादों की राजनीति करने से
वैचारिक वंध्यापन छिपता नहीं...
हिंदू अब ठगा हुआ महसूस नहीं,
बल्कि जागृत है...
या तो शब्दों का यह छलावा त्यागिए,
या इस ढोंग का विसर्जन कीजिए...
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वैसे तो MLC चुनावों की चर्चा छात्र चुनावों से भी कम होती है, पर इस बार बिहार-यूपी पर सबकी दृष्टि रही है क्योंकि स्नातक और शिक्षक पर यूजीसी आदि विषयों के साथ-साथ ज़मीनी उपेक्षा का माहौल भी कार्यकर्ताओं में देखने को मिल रहा था।
बिहार में बाँकीपुर की हार की ही तरह, अब RJD के खेमे में गए डॉ संजीव ने पटना से शिक्षक की सीट पर भाजपा को तीस साल बाद हराया है। JDU से 2025 में टिकट न मिलने पर वो राजद गए। सवर्णों ने इस बार अपनी जाति देखी और BJP को हराया। वैसे ही सुरेश राय भूमिहार हैं, भाजपा ने टिकट नहीं दिया, जन सुराज में गए, आज सवर्णों ने उन्हें भी जीत दे दी।
दो और भूमिहार प्रत्याशी स्वतंत्र रूप से जीते। यह भी बताता है कि बिहार में विकल्पहीनता को इंडिपेंडेंट केंडिडेट्स में विकल्प मिल रहा है। सवर्णों ने जहाँ अपने कैंडिडेट देखे, उसे वोट दे कर जिताया। कुल आठ में से चार सीट पर RJD, जन सुराज और स्वतंत्र लोग जीते। यह जीत 2025 की स्वीप के बाद आई है।
वहीं यूपी में, बनारस में (मोदी के आगमन से पूर्व उमड़ा जनसैलाब प्रकरण के बाद) शिक्षक-स्नातक दोनों को गँवाना भाजपा के लिए सीख है। 11 सीटों में भाजपा ने छः जीते/आगे है, पाँच पर सपा। यदि ऐसे ही परिणाम रह जाता है, तो यह भी संकट का ही विषय है।
सनातन, विश्वगुरु, त्रिपुंड, डमरू, खंजरी, भजन क्लबिंग काम नहीं आ रहा क्योंकि लोग समझते जा रहे हैं सत्य को। अक्टूबर निकल चुका है। आने वाले समय में @RHAreforms का ग्राउंड मूवमेंट और तीव्र होने वाला है।
बिहार में हमारे विचारों से प्रभावित लोग गाँव-गाँव टोली बना कर इस जातिवादी, समाज विभाजनकारी भाजपा की करतूतें बता रहे हैं जबकि चुनाव होने में अभी ढाई वर्ष है। यूपी में बाबा ने पूरा बल लगा दिया, पर यदि परिणाम 6-5 रहे, तो यह समय उचित निर्णय और आत्मावलोकन का है।
आगरा समेत चुनावी सीटों के अधिकारियों से पता कीजिए कि चुनाव किस तरह के दवाब में हो रहे हैं। संभव है, परिणाम में अंततः बदलाव हो जाए, पर यदि MLC चुनाव में आपको नाक रगड़नी पड़ रही है, तो विधानसभा की तैयारी देख लीजिए।
मैं छात्र संघ, MLC चुनावों को जनता का मूड या रेफरेंडम नहीं मानता। हालाँकि, प्रचार इतना हुआ तो मैंने यहाँ लिखा है। बिहार की प्रचंड जीत को वर्ष नहीं बीता है और दो निर्दलीय सवर्ण MLC बन जाएँ, RJD से भूमिहार जीत जाए… लगभग असंभव था यह देखना।
बाकी, गेंद अभी भी भाजपा के पाले में है। दिल्ली विश्वविद्यालय जीते हैं तो युवा छात्रों पर यूजीसी का प्रभाव नहीं ही रहा होगा। मोदी जी दो एयर शो करेंगे, गंगा जी से कुर्ते में नहा कर निकलेंगे, सब पलट जाएगा।




























