दिलीप मंडल के नाम पर तथाकथित भाजपा के प्रवक्ता उसके विरोध में लग जाते हैं, लेकिन वह ऑफिशियल सलाहकार है भाजपा का , पद पर बैठा हुआ है तो उसकी बात ही अंतिम मानी जाएगी। इसका साफ संदेश है कि वह सर्वण जातियों को टारगेट करने में लगातार लगा हुआ है और इसकी झलक साफ तौर पर BJP सरकार की नीतियों में स्पष्ट है। यही भाजपा सरकार का स्टैंड है ,अब मुंह से जितना चाहे बकलोली करते रहो अब्दुल , एक हैं तो सेफ हैं , Pakistan, जिहादी …भगवा से नील हुए सूर्य का डूबना तय है।
योगी जी को 2027 में सबसे बड़ा नुकसान अखिलेश यादव से नहीं मोदी- शाह की रैलियों से होगा। इस चुनाव में पाकिस्तान ,राष्ट्रवाद , हिंदुत्व का चूरन अब नहीं बिकेगा।
Keep your goal clear & do not engage in arguments with BJP’s Low IQ declared or undeclared spokespersons. Your power lies in 🗳️ vote 💪
हे ! महामानव असली ताकत economy से आती है …paid PR से नहीं।अब तो वायरल भी नहीं हो पा रहे 1 साल से यार कुछ तो काम कर लो 🤔
सर !! आपके खुद के संस्थान IMT गाजियाबाद में क्यों आरक्षण नहीं है 1% भी इसको भी समझा दिजिए 🤔
मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 2019 में मेरी सरकार द्वारा दिया गया 27% आरक्षण षड्यंत्रपूर्वक समाप्त करने के बाद भारतीय जनता पार्टी "चोरी और सीना जोरी" की राजनीति पर उतर आई है।
सच्चाई यह है कि मेरी सरकार ने जनता की भलाई के लिए आरक्षण दिया था। आरक्षण की रक्षा करना सरकार की ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकारों ने कोर्ट के सामने सच्चाई रखी ही नहीं।
भाजपा नेताओं के बयान में यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि तब कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में आरक्षण दिया। इस तरह के भ्रामक बयान अदालत के आदेश की ग़लत व्याख्या और अवमानना की तरह हैं।
सच्चाई यह कि कांग्रेस सरकार ने 2019 में मध्य प्रदेश विधानसभा में क़ानून पास करके ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया था, जो पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करके दिया गया था।
2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं, इन 6 साल में भाजपा ने जानबूझकर ओबीसी जनसंख्या के सही आंकड़े न्यायालय के सामने नहीं रखे।
भाजपा सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि वह अदालत में मामले को पुरज़ोर ढंग से रखें, लेकिन भाजपा नेताओं के बयानों से लगता है कि 2019 में हमने जो आरक्षण दिया उसके बाद से उस आरक्षण के संरक्षण के लिए भाजपा ने कुछ नहीं किया। अगर भाजपा नेता जो कह रहे हैं उसे सच मान लें तो स्पष्ट है कि भाजपा ने पिछले 6 साल में अदालत के सामने ओबीसी का पक्ष रखा ही नहीं है।
अगर, भाजपा में ओबीसी वर्ग के प्रति जरा भी संवेदनशीलता है तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाए और साथ ही विधानसभा में नया कानून पारित कर 27% आरक्षण बहाल करे।







