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Writer, Poet, Traveller. Views are personal. RTs not endorsement

Joined June 2010
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My grandfather Munshi Premchand, a Kayastha Hindu, learnt Urdu from Maulvi saheb. He became the greatest Urdu-Hindi writer of all time. What has language got to do with religion?
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हर एक को दीवाली की शुभकामनायें सभी का जीवन प्रकाशित हो तन औऱ मन दोनों ना कोई शिकवा ना शिकायत हो अग्रसर हों उस पथ पर जहां इश्वर की इनायत हो दीप जलें और कोई भूखा ना हो ना कोई दुख ना ही सियासत हो हर तरफ खुशियां ना कोई हिदायत हो हर अन्याय के लिये खुली एक अदालत हो
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हर एक को दीवाली की शुभकामनायें सभी का जीवन प्रकाशित हो तन औऱ मन दोनों ना कोई शिकवा ना शिकायत हो अग्रसर हों उस पथ पर जहां इश्वर की इनायत हो दीप जलें और कोई भूखा ना हो ना कोई दुख ना ही सियासत हो हर तरफ खुशियां ना कोई हिदायत हो हर अन्याय के लिये खुली एक अदालत हो
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एक दिन सब जायेंगे और लोग आयेंगे
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एक दिन सब जायेंगे और लोग आयेंगे
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अब अगर मिलने से ही बात बनती तब यादों को कौन याद करता हर एक चीज जो मिल जाये तब मिलने की कौन फरियाद करता
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सारे जतन कर लिए भक्ति, कर्म, और ज्ञान योग की सारी धाराएँ व्यथा कम नही हुई प्रयास की कमी रही या फिर इनमें कुछ शून्यता कहना मुश्किल है आंसुओं की कमी नहीं हुई ढूँढ रहा हूं व्यथित बताना अगर कुछ मिले जल्दी पहुँचा तो समझूंगा कभी दोस्तों की कमी नहीं हुई
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सारे जतन कर लिए भक्ति, कर्म, और ज्ञान योग की सारी धाराएँ व्यथा कम नही हुई प्रयास की कमी रही या फिर इनमें कुछ शून्यता कहना मुश्किल है आंसुओं की कमी नहीं हुई ढूँढ रहा हूं व्यथित बताना अगर कुछ मिले जल्दी पहुँचा तो समझूंगा कभी दोस्तों की कमी नहीं हुई
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इश्क का अरमान है हर कोई इश्क ना करे वो थक गया है होने और निभाने में वो इश्क जिसमें उसको रंज मिले वो किस काम का उसको भी तो पूर्णता मिले अधूरी मोहब्बत ज़हर बन जाती हैं ऐसा ज़हर, जो खा जाती है उनको, जिनको होती है और उन शिकवों को जिससे वो जन्म लेती है
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कितना इन्तेज़ार करें उनका उम्र काबू मेँ नहीं है उसके ऊपर उनका ख्याल उम्र और बढ़ा रहा है उम्र जाने का रंज नहीं बस ये सोचता हूं उनका दीदार कर लूं उनके उम्र ओ जवानी में
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लिखते लिखते जो खत फाड़े तुमने काश मुझे दे दिये होते नहीं पढ़ता मैं उनको बस उनको पौधे बना देता सींचता सुबह-ओ-शाम उनके फूलोँ की खुशबू भी ना लेता बस दूर से देखता कब वो पेड़ बने ताकि उनकी जड़ों में अपने ख्वाबों कों दफ़ना देता जिन ख्वाबों में तुम्हारा तसव्वुर नहीं था
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लिखते लिखते जो खत फाड़े तुमने काश मुझे दे दिये होते नहीं पढ़ता मैं उनको बस उनको पौधे बना देता सींचता सुबह-ओ-शाम उनके फूलोँ की खुशबू भी ना लेता बस दूर से देखता कब वो पेड़ बने ताकि उनकी जड़ों में अपने ख्वाबों कों दफ़ना देता जिन ख्वाबों में तुम्हारा तसव्वुर नहीं था
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If I may say so That I once loved you While you may not agree But it is true See, the point is not love It wanes with time Love is so giving That it sacrifices its shine Sacrifices itself for respect and care Until it veils To give birth to wont And wont always prevails
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If I may say so That I once loved you While you may not agree But it is true See, the point is not love It wanes with time Love is so giving That it sacrifices its shine Sacrifices itself for respect and care Until it veils To give birth to wont And wont always prevails
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अब उन क़दमों का क्या करें जो बढ़ गये बेवफ़ाई की तरफ तब जोश-ए-जवानी थी और रुस्वाई भी अब पर्दानशीन है मेरी वफा
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Do not worry about future since future is not worried if you are worried about it. Future is not only for you but for everyone who are in your ecosystem and outside it.
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अब उन क़दमों का क्या करें जो बढ़ गये बेवफ़ाई की तरफ तब जोश-ए-जवानी थी और रुस्वाई भी अब पर्दानशीन है मेरी वफा
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चाहतें अगर हद से गर बढ़ जायें तो उन लम्हों को संवार लेना फिर ना जाने, गुज़रता वक़्त क्या क्या मंजर रुबरू करे
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अब अगर होश में ही आना होता तो दिल हमारा दिल में ही रहता इस डर से तो इश्क नहीं किया था कि उनका दिल-नशीं रहता
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चाहतें अगर हद से गर बढ़ जायें तो उन लम्हों को संवार लेना फिर ना जाने, गुज़रता वक़्त क्या क्या मंजर रुबरू करे
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ऐसी आदत लगी उन दोनो को एक दूसरे की की इश्क भी कुछ ना बिगाड़ पाया
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