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My grandfather Munshi Premchand, a Kayastha Hindu, learnt Urdu from Maulvi saheb. He became the greatest Urdu-Hindi writer of all time.
What has language got to do with religion?
Pravir Rai retweeted
हर एक को दीवाली की शुभकामनायें
सभी का जीवन प्रकाशित हो
तन औऱ मन दोनों
ना कोई शिकवा ना शिकायत हो
अग्रसर हों उस पथ पर
जहां इश्वर की इनायत हो
दीप जलें और कोई भूखा ना हो
ना कोई दुख ना ही सियासत हो
हर तरफ खुशियां
ना कोई हिदायत हो
हर अन्याय के लिये
खुली एक अदालत हो
हर एक को दीवाली की शुभकामनायें
सभी का जीवन प्रकाशित हो
तन औऱ मन दोनों
ना कोई शिकवा ना शिकायत हो
अग्रसर हों उस पथ पर
जहां इश्वर की इनायत हो
दीप जलें और कोई भूखा ना हो
ना कोई दुख ना ही सियासत हो
हर तरफ खुशियां
ना कोई हिदायत हो
हर अन्याय के लिये
खुली एक अदालत हो
अब अगर मिलने से ही बात बनती
तब यादों को कौन याद करता
हर एक चीज जो मिल जाये
तब मिलने की कौन फरियाद करता
Pravir Rai retweeted
सारे जतन कर लिए
भक्ति, कर्म, और ज्ञान
योग की सारी धाराएँ
व्यथा कम नही हुई
प्रयास की कमी रही
या फिर इनमें कुछ शून्यता
कहना मुश्किल है
आंसुओं की कमी नहीं हुई
ढूँढ रहा हूं व्यथित
बताना अगर कुछ मिले
जल्दी पहुँचा तो समझूंगा
कभी दोस्तों की कमी नहीं हुई
सारे जतन कर लिए
भक्ति, कर्म, और ज्ञान
योग की सारी धाराएँ
व्यथा कम नही हुई
प्रयास की कमी रही
या फिर इनमें कुछ शून्यता
कहना मुश्किल है
आंसुओं की कमी नहीं हुई
ढूँढ रहा हूं व्यथित
बताना अगर कुछ मिले
जल्दी पहुँचा तो समझूंगा
कभी दोस्तों की कमी नहीं हुई
इश्क का अरमान है
हर कोई इश्क ना करे
वो थक गया है
होने और निभाने में
वो इश्क जिसमें उसको
रंज मिले वो किस काम का
उसको भी तो पूर्णता मिले
अधूरी मोहब्बत ज़हर बन जाती हैं
ऐसा ज़हर, जो खा जाती है
उनको, जिनको होती है
और उन शिकवों को
जिससे वो जन्म लेती है
कितना इन्तेज़ार करें उनका
उम्र काबू मेँ नहीं है
उसके ऊपर उनका ख्याल
उम्र और बढ़ा रहा है
उम्र जाने का रंज नहीं
बस ये सोचता हूं
उनका दीदार कर लूं
उनके उम्र ओ जवानी में
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लिखते लिखते जो खत फाड़े तुमने
काश मुझे दे दिये होते
नहीं पढ़ता मैं उनको
बस उनको पौधे बना देता
सींचता सुबह-ओ-शाम
उनके फूलोँ की खुशबू भी ना लेता
बस दूर से देखता
कब वो पेड़ बने
ताकि उनकी जड़ों में
अपने ख्वाबों कों दफ़ना देता
जिन ख्वाबों में
तुम्हारा तसव्वुर नहीं था
लिखते लिखते जो खत फाड़े तुमने
काश मुझे दे दिये होते
नहीं पढ़ता मैं उनको
बस उनको पौधे बना देता
सींचता सुबह-ओ-शाम
उनके फूलोँ की खुशबू भी ना लेता
बस दूर से देखता
कब वो पेड़ बने
ताकि उनकी जड़ों में
अपने ख्वाबों कों दफ़ना देता
जिन ख्वाबों में
तुम्हारा तसव्वुर नहीं था
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If I may say so
That I once loved you
While you may not agree
But it is true
See, the point is not love
It wanes with time
Love is so giving
That it sacrifices its shine
Sacrifices itself for respect and care
Until it veils
To give birth to wont
And wont always prevails
If I may say so
That I once loved you
While you may not agree
But it is true
See, the point is not love
It wanes with time
Love is so giving
That it sacrifices its shine
Sacrifices itself for respect and care
Until it veils
To give birth to wont
And wont always prevails
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अब उन क़दमों का क्या करें
जो बढ़ गये बेवफ़ाई की तरफ
तब जोश-ए-जवानी थी और रुस्वाई भी
अब पर्दानशीन है मेरी वफा
Do not worry about future since future is not worried if you are worried about it. Future is not only for you but for everyone who are in your ecosystem and outside it.
अब उन क़दमों का क्या करें
जो बढ़ गये बेवफ़ाई की तरफ
तब जोश-ए-जवानी थी और रुस्वाई भी
अब पर्दानशीन है मेरी वफा
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चाहतें अगर हद से गर बढ़ जायें
तो उन लम्हों को संवार लेना
फिर ना जाने, गुज़रता वक़्त
क्या क्या मंजर रुबरू करे
अब अगर होश में ही आना होता
तो दिल हमारा दिल में ही रहता
इस डर से तो इश्क नहीं किया था
कि उनका दिल-नशीं रहता
चाहतें अगर हद से गर बढ़ जायें
तो उन लम्हों को संवार लेना
फिर ना जाने, गुज़रता वक़्त
क्या क्या मंजर रुबरू करे
