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हिंदी के 25 उपन्यासों का मेरा चयन : अवश्य पढ़ना चाहिए।
1 गोदान
2 त्यागपत्र
3 झूठा सच
4 शेखर एक जीवनी
5 मैला आँचल
6 राग दरबारी
7 बूँद और समुद्र
8 आधा गांव
9 गली आगे मुड़ती है
10 काला जल
11 चित्रलेखा
12 मृगनयनी
13 तमस
14 महाभोज
15 कसप
16 झीनी झीनी बीनी चदरिया
17 सूखा बरगद
18 मुझे चांद चाहिए
19 छिन्नमस्ता
20 पाहीघर
21 काशी का अस्सी/उपसंहार
22 सूरज का सातवां घोड़ा
23 सूत्रधार
24 आखिरी कलाम
25 महाब्राह्मण
"दीपावली एक ऐसा पर्व उत्सव है जिसमें पूजा में किसी पंडितजी की आवश्यकता नहीं पड़ती! लोग अपने घर के पास रहने वाले कुम्हार के यहां से दीया 🪔 लेकर आते हैं। रूई से बत्ती बनाते हैं और घी उनके यहां गाय/भैंस के रहने से अफरात रहता है। दीप जलाते हैं।
नया नया धान हुआ रहता है तो उससे चूड़ा और खील बना लेते हैं।
बेसन से लड्डू बना लिया। दूध से बर्फी।बस शक्कर और ड्राई फ्रूट्स बाहर से ले आना है।
हाँ, आतिशबाजी के लिए बाजार जाना पड़ता है। लेकिन यह देखना चाहिए कि इस पर्व में पुरोहित का कोई काम नहीं है। इस तरह से यह एक प्रकृति पूजा है और अंधेरे से उजाले का संघर्ष। इस संघर्ष में प्रकाश (उजाले) की जीत होती है।"
हम चाहें तो छठ पूजा की तरह का तर्क दीपावली के सम्बन्ध में भी दे सकते हैं लेकिन हमें इस तरह की मूर्खतापूर्ण बात करने की आवश्यकता नहीं रहती। हम मर्यादा में रहने वाले लोग हैं। सबकी गरिमा और उपस्थिति का सम्मान करते हैं।
"दीपावली एक ऐसा पर्व उत्सव है जिसमें पूजा में किसी पंडितजी की आवश्यकता नहीं पड़ती! लोग अपने घर के पास रहने वाले कुम्हार के यहां से दीया 🪔 लेकर आते हैं। रूई से बत्ती बनाते हैं और घी उनके यहां गाय/भैंस के रहने से अफरात रहता है। दीप जलाते हैं।
नया नया धान हुआ रहता है तो उससे चूड़ा और खील बना लेते हैं।
बेसन से लड्डू बना लिया। दूध से बर्फी।बस शक्कर और ड्राई फ्रूट्स बाहर से ले आना है।
हाँ, आतिशबाजी के लिए बाजार जाना पड़ता है। लेकिन यह देखना चाहिए कि इस पर्व में पुरोहित का कोई काम नहीं है। इस तरह से यह एक प्रकृति पूजा है और अंधेरे से उजाले का संघर्ष। इस संघर्ष में प्रकाश (उजाले) की जीत होती है।"
हम चाहें तो छठ पूजा की तरह का तर्क दीपावली के सम्बन्ध में भी दे सकते हैं लेकिन हमें इस तरह की मूर्खतापूर्ण बात करने की आवश्यकता नहीं रहती। हम मर्यादा में रहने वाले लोग हैं। सबकी गरिमा और उपस्थिति का सम्मान करते हैं।
क्या रामायण को लोगों ने ठुकरा दिया है?
रामायण (Part 1) – केवल भारत का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
दिवाली 2026 पर रिलीज हुई रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की रामायण भारत में जोरदार लेकिन औसत कलेक्शन कर रही है।
Sacnilk से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 3 दिन का इंडिया नेट कलेक्शन इस तरह का है -
- पहला दिन Day 1 (5 Nov): ₹64.85 करोड़
- दूसरा दिन Day 2 (6 Nov): ₹48.05 करोड़
- तीसरा दिन Day 3 (7 Nov): ₹69.80 करोड़
भारत में कुल कमाई : ₹182.70 करोड़
हिंदी वर्जन सबसे आगे है (लगभग 74% हिस्सा)। Day 3 पर फिल्म ने अच्छा उछाल दिखाया।
आज दीपावली को यह थोड़ा मंदा रहेगा।
चौथे दिन का Day 4 (रविवार/दिवाली) का कलेक्शन अभी चल रहा है और फिल्म 200 करोड़ नेट के करीब पहुंच रही है।
#Ramayana #RamayanaBoxOffice #RanbirKapoor #Yash #SaiPallavi #IndiaBoxOffice
नोट: आंकड़े Sacnilk के अनुसार हैं और अपडेट होते रहते हैं।
डॉ रमाकान्त राय retweeted
Replying to @RamaKRoy
आपको भी सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें प्रो साहब जय जय श्रीराम।
अभी भैया दूज की छुट्टी घोषित नहीं हुई है। यानि दीपावली की केवल एक दिन की छुट्टी हुई है। आज तो रविवार है!
प्रकाश में एक संवाद है। संवाद संबंधों में प्रगाढ़ता का सेतु है। अंधेरे में एक चुप्पी रहती है। जब हम दीप प्रज्ज्वलित करते हैं, संवाद करते हैं। घुप्प अंधेरे से लड़ते हैं। जब हमारा वाह्य अंधकार में रहता है, तो अंतस भी तमाच्छादित हो जाता है!
हम दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। इस तम को नष्ट करने के लिए। उजाले के लिए। दीपावली इसीलिए कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस समय सबसे गहरा अंधेरा रहता है। चन्द्रमा उस रात्रि नहीं दिखता। तारे निरभ्र आकाश में टिमटिमाते रहते हैं। हमारा वाह्य गहन अन्धकारा में रहता है। हम प्रकृति से संवाद करते हैं, हर्ष व्यक्त करते हैं, मिष्ठान्न ग्रहण करते हैं। नवान्न का पारण होता है। दूसरे के साथ हिलमिलकर इससे लड़ते हैं और जब दिए की टिमटिमाती लौ सामूहिक प्रयास से प्रकाश की छटा बना देती है, हम मुदित हो जाते हैं। दिए का प्रज्ज्वलित होना एक आंतरिक उत्सव में बदल जाता है।
अब जबकि विज्ञान ने हमारे वाह्य को जगमगा रखा है तो दिया क्या करेगा? संवाद के लिए तमाम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आ गए जो पलक झपकते हमारी भौतिक दूरी प्रच्छन्न कर देते हैं। तो दीप की तो पहली कड़ी ही नष्ट हो गयी। अब क्यों जलाएं?
ऐसे में हमें मूल उद्देश्य को ध्यान में रखना होता है। मूल उद्देश्य है अंतस को उजाले से भरना। समस्त क्रियाएं इसी अंतस को उजाले से भरने का उपक्रम हैं। बुद्ध इसीलिए खुद का दीपक स्वयं होने का आवाह्न करते हैं। अप्प दीपो भव।
यह दीपपर्व हमें, हमारे अन्तस को उजाले से भर दे। हम प्रज्ञावान हों। शीलवान हों। अपने ज्ञान के आलोक से दूसरे को भी आलोकित करें; इन्हीं शुभकामनाओं के साथ दीपावली पर सबको प्रणाम।
#Deepawali
डॉ रमाकान्त राय retweeted
संज्ञानार्थ 🙏
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास जी पर विचार करते हुए लिखा है। इसमें वह तुलसीदास के कथा संयोजन की चार विशेषता बताते हैं । -
"रचना-कौशल, प्रबंध-पटुता, सहृदयता इत्यादि सब गुणों का समाहार हमे रामचरित मानस मे मिलता है। पहली बात जिसपर ध्यान जाता है, वह है कथा-काव्य के सब अवयवो का उचित समीकरण। कथा-काव्य या प्रबंध-काव्य के भीतर इतिवृत्त, वस्तु-व्यापार-वर्णन, भावव्यंजना और संवाद, ये अवयव होते हैं। न तो अयोध्यापुरी की शोभा, बाललीला, नखशिख, जनक की वाटिका, अभिषेकोत्सव इत्यादि के वर्णन बहुत लंबे होने पाए हैं, न पात्रो के संवाद, न प्रेम, शोक आदि भावो की व्यंजना । इतिवृत्त की श्रृंखला भी कहीं से टूटती नही है।
दूसरी बात है कथा के मार्मिक स्थलों की पहचान। अधिक विस्तार हमें ऐसे ही प्रसंगो का मिलता है जो मनुष्य मात्र के हृदय को स्पर्श करनेवाले हैं जैसे, जनक की वाटिका में राम-सीता का परस्पर दर्शन, रामवन-गमन, दशरथ-मरण, भरत की आत्मग्लानि, वन के मार्ग में स्त्री-पुरुषो की सहानुभूति, युद्ध, लक्ष्मण को शक्ति लगना इत्यादि ।
तीसरी बात है प्रसंगानुकूल भाषा। रसों के अनुकूल कोमल-कठोर पदो की योजना तो निर्दिष्ट रूढ़ि ही है। उसके अतिरिक्त गोस्वामीजी ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि किस स्थल पर विद्वानों या शिक्षितों की संस्कृत-मिश्रित भाषा रखनी चाहिए और किस स्थल पर ठेठ बोली। घरेलू प्रसंग समझकर कैकेयी और मंथरा के संवाद में उन्होने ठेठ बोली और स्त्रियों में विशेष चलते प्रयोगों का व्यवहार किया है। अनुप्रास की ओर प्रवृत्ति तो सब रचनाओं में स्पष्ट लक्षित होती है।
चौथी बात है शृंगार रस का शिष्ट-मर्यादा के भीतर बहुत ही व्यंजक वर्णन।"
इन प्रमुख विशेषताओं से ही श्रीरामचरितमानस काव्य का श्रेष्ठ उदाहरण बना है। अब #Ramayana को इन्हीं कसौटियों पर कसकर देखें।
हम जब देखते हैं कि 4000 करोड़ की लागत से एक फिल्म बनती है और उसमें सामान्य शिष्टाचार का भी ध्यान नहीं रखा जाता तो क्षोभ होता है।
जो लोग रोष व्यक्त कर रहे हैं और #RamayanaMovie की निंदा कर रहे हैं, उनकी आलोचना करने के स्थान पर आत्मावलोकन करना चाहिए और अपनी कमियों को सुधारने का अभ्यास करना चाहिए।
धन्यवाद।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास जी पर विचार करते हुए लिखा है। इसमें वह तुलसीदास के कथा संयोजन की चार विशेषता बताते हैं । -
"रचना-कौशल, प्रबंध-पटुता, सहृदयता इत्यादि सब गुणों का समाहार हमे रामचरित मानस मे मिलता है। पहली बात जिसपर ध्यान जाता है, वह है कथा-काव्य के सब अवयवो का उचित समीकरण। कथा-काव्य या प्रबंध-काव्य के भीतर इतिवृत्त, वस्तु-व्यापार-वर्णन, भावव्यंजना और संवाद, ये अवयव होते हैं। न तो अयोध्यापुरी की शोभा, बाललीला, नखशिख, जनक की वाटिका, अभिषेकोत्सव इत्यादि के वर्णन बहुत लंबे होने पाए हैं, न पात्रो के संवाद, न प्रेम, शोक आदि भावो की व्यंजना । इतिवृत्त की श्रृंखला भी कहीं से टूटती नही है।
दूसरी बात है कथा के मार्मिक स्थलों की पहचान। अधिक विस्तार हमें ऐसे ही प्रसंगो का मिलता है जो मनुष्य मात्र के हृदय को स्पर्श करनेवाले हैं जैसे, जनक की वाटिका में राम-सीता का परस्पर दर्शन, रामवन-गमन, दशरथ-मरण, भरत की आत्मग्लानि, वन के मार्ग में स्त्री-पुरुषो की सहानुभूति, युद्ध, लक्ष्मण को शक्ति लगना इत्यादि ।
तीसरी बात है प्रसंगानुकूल भाषा। रसों के अनुकूल कोमल-कठोर पदो की योजना तो निर्दिष्ट रूढ़ि ही है। उसके अतिरिक्त गोस्वामीजी ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि किस स्थल पर विद्वानों या शिक्षितों की संस्कृत-मिश्रित भाषा रखनी चाहिए और किस स्थल पर ठेठ बोली। घरेलू प्रसंग समझकर कैकेयी और मंथरा के संवाद में उन्होने ठेठ बोली और स्त्रियों में विशेष चलते प्रयोगों का व्यवहार किया है। अनुप्रास की ओर प्रवृत्ति तो सब रचनाओं में स्पष्ट लक्षित होती है।
चौथी बात है शृंगार रस का शिष्ट-मर्यादा के भीतर बहुत ही व्यंजक वर्णन।"
इन प्रमुख विशेषताओं से ही श्रीरामचरितमानस काव्य का श्रेष्ठ उदाहरण बना है। अब #Ramayana को इन्हीं कसौटियों पर कसकर देखें।
हम जब देखते हैं कि 4000 करोड़ की लागत से एक फिल्म बनती है और उसमें सामान्य शिष्टाचार का भी ध्यान नहीं रखा जाता तो क्षोभ होता है।
जो लोग रोष व्यक्त कर रहे हैं और #RamayanaMovie की निंदा कर रहे हैं, उनकी आलोचना करने के स्थान पर आत्मावलोकन करना चाहिए और अपनी कमियों को सुधारने का अभ्यास करना चाहिए।
धन्यवाद।
इस बार का धनतेरस थोड़ा मंदा रहा है अर्थव्यवस्था की दृष्टि से। कोई माने या ना माने! सच्चाई यही है।
#Deepawali
आज क्रिकेट में के एल राहुल और भाग्य भरोसे जीते! #INDvsNZ2ndODI
डॉ रमाकान्त राय retweeted
Replying to @RamaKRoy
बिल्कुल सही लिखा। मुझे तो संदेह है कि इनमें से किसी ने श्रीरामचरितमानस जी या वाल्मीकि रामायण का कभी पूरा पाठ भी किया होगा। बाकी रामायणों की बात तो छोड़ ही दीजिए। विडंबना देखिए, आज AI के दौर में भी अगर AI से संवाद लिखवाते, तो शायद इससे बेहतर लिखवा लेते!
खैर, रामकथा किसी एक की कल्पना या व्याख्या की मोहताज नहीं है। हरि अनंत, हरि कथा अनंता। 🙏
समझदार की दुर्गति है!!
बताओ! #Ramayana के Positive review से भड़क गए! मैसेज किया और ब्लॉक कर दिया।
यही असहिष्णुता हिन्दू समाज को खाए जा रही है। इतना तुनकमिजाज होना ठीक नहीं है।
अभी तो हमने कुमार विश्वास की प्रशंसा भी की है और उन्हें दोषमुक्त कर दिया है। वह पोस्ट पढ़ने के बाद कुछ और लोग ब्लॉक कर देंगे।
जो नई वाली फिल्म #Ramayana आई है उसमें कुमार विश्वास #KumarVishwas और ए आर रहमान को नाहक ही दोषी बताया जा रहा है। यह दोनों मासूम और विशिष्ट कोटि के कलाकार हैं!
फिल्म का स्क्रीनप्ले श्रीधर राघवन और नितेश तिवारी ने बनाया है। वही लोग तय करते हैं कि कहानी का ढांचा और दृश्यों का क्रम क्या होगा! इस तरह समझना चाहिए कि रावण अथवा सूर्पनखा को जो इतना भाव दिया गया है वह इन्हीं के कारण। यही लोग निश्चित कर रहे हैं कि फिल्म के पात्र क्या कर रहे हैं और कहाँ हैं? परशुराम बारात वापसी के समय मिलते हैं और उधर हिमाच्छादित पर्वत आदि हैं, यह सब इन्हीं लोगों की बुद्धि से है। जनक की वाटिका में चारो भाई हैं, यह इन्होंने तय किया है। यही लोग कभी-कभी कैमरा एंगल या अन्य निर्देश भी देते हैं!
फिल्म में संवाद श्रेयस जैन और नितेश तिवारी का है। "टूट गया तो टूट गया" लिखने वाले यही लोग हैं। "यहां आसमान में तुम्हें बचाने कौन आएगा!" "यहां हम लोग आपका सम्मान कर रहे हैं और आप हैं कि ... " असली घटिया काम तो इन्हीं लोगों का है। न दृश्य की समझ है, न शास्त्र का अध्ययन। न देश काल का ज्ञान है और न चरित्र की गरिमा और मर्यादा की चिंता!
सही बात तो यह है कि इसका समस्त उत्तरदायित्व नितेश तिवारी का है! असली खल यही हैं।
क्या संयोग है कि #आदिपुरुष में मनोज मुंतशिर शुक्ला, #Ramayana
में कुमार विश्वास और नितेश तिवारी! इन्हीं लोगों ने गन्दगी की है।
निष्कर्ष - स्क्रीन प्ले, संवाद के निम्न कोटि का होने का असर यह हुआ है कि गीत और संगीत भी निचले स्तर का हो गया है। कुमार विश्वास की गहराई इस छिछलेपन में दब गई है। कहावत है - एक त धिया अपने गोर, उप्पर से अईली कम्मर ओढ़! एक तो कुमार विश्वास जी की गहराई डेढ़ सेंटीमीटर से थोड़ी ही अधिक है, ऊपर से उन्हें थाली जितना गहरा स्क्रीनप्ले और संवाद मिल गया है!
डॉ रमाकान्त राय retweeted
Replying to @RamaKRoy
भैया मैं रामलीला करवाता हूँ , १७५ बच्चे होते है कोई भी अभिनेता नहीं , बहुत छोटा सा सेटअप है , दो लाख के ऐस पास खर्च आता है , तीन दिन तीन घंटा लाइव ऑडियंस के साथ ! प्रोफेशनल मैं AI इंजीनियर हूँ , तो बैकड्रॉप में VFX और AI का इस्तेमाल करता हूँ , गर्व से कहता हूँ इससे बेहतर बनाता हूँ
रामायणा फिल्म की सकारात्मक समीक्षा : -
positive review of #Ramayana
राजा जनक की पुत्री सीता के स्वयंवर में राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ पहुंचे थे। स्वयंवर में धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना था। वह प्रत्यंचा चढ़ाने में टूट गया (टूट गया तो टूट गया)!
सीता ने वरमाला श्रीराम के गले में डाल दी। अब अयोध्या सूचना दी गई। राजा दशरथ बारात लेकर धूमधाम से आए। उनके दो अन्य पुत्र भरत और शत्रुघ्न भी आए। घर में तीन और कन्याएं थीं - उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति! उनका लग्न क्रमशः लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से निश्चित हुआ! सबका विवाह संपन्न हुआ।
अब #Ramayana में देखें!
श्रीराम सीता से वाटिका में मिलते हैं! गोस्वामी तुलसीदास ने तो लिखा है कि सीता ने राम को अपनी आँखों के रास्ते हृदय में उतार लिया और आँखें बंद कर लीं। जैसे श्रीराम को हृदय में रख लिया हो!
लोचन मग रामहि उर आनी।
दीन्हे पलक कपाट सयानी।।
#Ramayana में श्रीराम सीता से पूछते हैं कि मेरे भाइयों का क्या होगा? भाई उधर ही हैं। युगल भाव में! यह नया है! ब्याह से पहले सब के बारे में सोच लिया श्रीराम ने। सबका साथ सबका विकास!
गजब तो है खर दूषण से युद्ध का प्रसंग! एकदम हॉलीवुड स्टाइल में! श्रीराम, सीता और लक्ष्मण तीनों भागते हैं! फिर एकदम से तीर मारते हैं राम। शत्रु खलास!
फिल्म में युद्ध है, संग्राम है लेकिन रक्तपात नहीं। इतना घमासान युद्ध होता है। रक्त की एक बूंद कहीं नहीं दिखती। कोई खरोंच नहीं आती। कोई लंगड़ाता भी नहीं। रावण का सिर जटायु काट देते हैं और वह सिर उग आता है! केवल सूर्पनखा की नाक से लहू निकलता दिखाई देता है।
सीता का अपहरण करना पड़ता है लेकिन फिल्म प्रो स्त्री है।
यह अद्भुत फिल्म है। इसमें रावण का ध्यान भी रखा गया है।
केवल हीरो ही महान नहीं है। सब महान हैं।
डॉ रमाकान्त राय retweeted
Replying to @RamaKRoy
वन, उपवन, पर्वत,नगरों के दृश्य बड़े ही अजीब लग रहें थे, लग ही नहीं रहा था भारतीय हैं। जब कहानी राम की हैं, तो रावण से कहानी क्यों शुरू की? ज़्यादा स्क्रीन टाइम दिया..बैक स्टोरी का प्रयोग करके सहानुभूति बटोरते हैं... – at Allahabad, India
















