Îñsp Prashant retweeted
20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस, CRPF एवं RAF सहित हमारे सुरक्षा बलों के अनेक जवानों पर हुए हमले और उन्हें लगी चोटों को लेकर हम गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।
हम लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती।
हमारी मांग है कि 20 जुलाई की पूरी घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्याधारित जाँच हो तथा जिन लोगों ने सुरक्षा बलों पर हिंसा की, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए दिन-रात ड्यूटी करने वाले हमारे जवानों का मनोबल बनाए रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
@ANI @PTI_News @ians_india @DelhiPolice @crpfindia @RAFCRPF @BSF_India @CISFHQrs @PIBHomeAffairs @DDNewslive @IndiaToday @aajtak @ndtv @IndianExpress
#DelhiPolice #CRPF #RAF #RespectOurForces
Îñsp Prashant retweeted
Replying to @Harshdubey9956
#Fact Check#
The claims being circulated in the video are false and misleading.
No permission has been granted for any protest. While an application was received, only an acknowledgement was issued. The acknowledgement clearly states that it is not to be construed as permission for holding any protest or public gathering.
Citizens are advised not to believe, share, or amplify rumours or misinformation being circulated on social media. Please rely only on official communications from the Police for authentic information.
Îñsp Prashant retweeted
There are various videos circulating on social media claiming incidents of stone pelting and police action today. These claims are false and misleading.
No such incident has taken place today.
Citizens are requested not to believe or share such videos and are advised to rely only on official sources for authentic information and updates.
@DelhiPolice @CJP_for_India
Îñsp Prashant retweeted
Don't buy a Kia car....
Though Kia makes good car, their service experience can be a nightmare. Speedingo service center has kept my car for the last 20 days, and bill keeps increasing day by day. GM doesn't even want to talk until a complaint is made, they are still holding car. it's horrible @KiaInd
Îñsp Prashant retweeted
Replying to @PrashantInsp
In my bad time, jab sare police wale ek hi baat bol rahe the tab, hua vaisa jaisa inhone kaha.. Very good person, gave me so much confidence in my bad time. Thanks sir🙏🙏🙏
💐💐💐RIP💐💐💐
Îñsp Prashant retweeted
हर महीने करोड़ों यूज़र्स का डेटा बेकार चला जाता है क्योंकि कंपनियाँ “अनयूज़्ड डेटा” को रद्द कर देती हैं।
सवाल है — जब हमने डेटा के पैसे दिए, तो वो खत्म क्यों हो जाता है?
वो डेटा अगले रिचार्ज में carry forward या add-on के रूप में मिलना चाहिए।
कंपनियाँ जनता से पैसा लेकर डेटा ज़ब्त कर लेती हैं — यह साफ़ लूट है।
सरकार और TRAI को दखल देकर नियम बनाना चाहिए कि हर यूज़र का बचा हुआ डेटा उसके हक़ में जोड़ा जाए।
कब तक Telecom कपानियों की जनता से मनमानी लूट जारी रहेगी?
क्यों हर टेलीकॉम कंपनी जबरदस्ती डेटा पैक थोप रही है, जबकि करोड़ों गरीब लोगों को उसकी जरूरत ही नहीं?
👉 सिर्फ कॉल करने वालों के लिए सस्ता वॉयस प्लान क्यों नहीं है?
👉 30 दिन का न्यूनतम रिचार्ज प्लान सभी कंपनियों पर लागू क्यों नहीं किया जाता?
👉 क्या सरकार जानबूझकर चुप है क्योंकि इन कंपनियों से भारी चंदा आता है?
👉 TRAI और दूरसंचार मंत्रालय आखिर कर क्या रहे हैं — क्या उन्हें नहीं दिखता कि ये “मोनोपॉली” बन चुकी है?
👉 जो लोग सिर्फ कॉल करना चाहते हैं, उनसे हर महीने 200–300 रुपए वसूलना क्या लूट नहीं है?
👉 क्या अब मोबाइल रखना भी अमीरों का हक़ बन जाएगा?
जनता पूछ रही है — जब डेटा नहीं चाहिए तो डेटा के नाम पर मजबूरी क्यों?
सरकार जवाब दे, ये कंपनियां नहीं — पब्लिक प्रॉब्लम बन चुकी हैं।
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सांसद Swati Maliwal ने Delhi की सड़कों पर गायों की समस्या का मुद्दा उठाया
@SwatiJaiHind @gupta_rekha
Îñsp Prashant retweeted
जब भी income-tax returns भरता हूं, सरकार से मांग करता हूँ कि pensioners को tax देने से मुक्त किया जाए।
कृपया मेरे साथ आवाज़ उठाएं।
@FinMinIndia
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तीन दिन से सीवर की शिकायत कर रखी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।बाबरपुर विधानसभा दिल्ली। गंदगी बाहर बहे रही है।@delhijalboard
@p_sahibsingh
@AapKaGopalRai
@aajtak
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ये मेरे बचपन के मित्र की व्यथा है जो मैं नीचे लिख रहा हूँ।
आज मैं बहुत दुःख के साथ रॉबिंस कुमार की बात बता रहा हूँ, जो CRPF में सीटी/जीडी के पद पर GC मोकामा घाट, बिहार में पोस्टेड हैं। इससे पहले गुमला, झारखंड में तैनात थे। 25 फरवरी 2021 को परिचालनिक ड्यूटी के दौरान तलाशी अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा लगाया गया, प्रेशर IED के फटने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
बाद में चिकित्सा के दौरान दोनों पैरों को घुटने के ऊपर काटना पड़ा, अब 100% डिसेबल की कैटेगरी में आ गए। स्वस्थ होने के उपरांत GC मोकामा घाट, बिहार में ड्यूटी कर रहे हैं।
इस ड्यूटी के दौरान अनेक समस्याएँ आईं, अपना कर्तव्य समझ कर किसी से कोई शिक़ायत नहीं की। मेरे समझाने पर भी यही कहते रहे कि यदि बार-बार किसी से कहूँगा तो सैनिक होने का मतलब क्या है, थोड़ा-बहुत तो चलता है।
2021 के बाद मेडिकल रिव्यू या ओपिनियन के कारण तीन बार पटना, एक बार मुज़फ्फरपुर जाना पड़ा। सुविधा नहीं के बराबर ही मिली, फिर भी कोई शिक़ायत नहीं की। कल रॉबिन्स को मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए GC प्रयागराज भेजा गया। वहाँ स्क्रीनिंग हो गई, पर वापस कब जाना है, पता नहीं है।
दोनों पाँव घुटने से ऊपर से कटा हुआ है। कोई अटेंडर नहीं मिलता, कोई बात नहीं। परिवार से कोई न कोई सदस्य हर जगह साथ जाता ही है। परंतु, वहाँ पर बहुत समस्या हो रही है।
जैसे कि कोई व्हील चेयर नहीं मिला, टॉयलेट दिव्यांग जन के अनुसार नहीं है, कोई बेड नहीं दिया गया, पानी की समस्या है। और भी बातें हैं, जो हमारे-आपके जैसे सामान्य लोग समस्या मानेंगे ही नहीं।
अब ये आम जवान नहीं हैं, इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। फिर भी इनकी पत्नी स्वयं मोकामा GC के DIG साहब और DC (ADM) साहब से मिल कर सारी समस्याओं के बारे में बताया। वहाँ से प्रयागराज GC को फ़ोन भी किया गया, परंतु अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।
रॉबिन्स कहते हैं: मैंने अपने जीवन में ये सब कभी नहीं सोचा पर क्या करूँ? अब शारीरिक और मानसिक पीड़ा असहनीय है। इसलिए मैं चाहता हूँ कि मेडिकल बोर्ड पेंशन भेज दें।
उनकी पीड़ा को हर कोई समझ नहीं सकता, फिर भी वो किसी से कोई शिकायत नहीं करते। मैं मित्र हूँ, मैंने उसके साथ पढ़ाई की, खेला हूँ और उसके घर सदैव आता-जाता रहता हूँ। मैं यदि एक ट्वीट भी न कर सकूँ तो मुझे स्वयं पर लज्जा आती है।
सच यह है कि रॉबिन्स कुमार मेडिकल, रिव्यू, ओपिनियन और ड्यूटी के कारण बहुत परेशान हो चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी आज तक, न एक व्हील चेयर मिला, न अच्छा प्रोस्थेटिक लेग। मैंने एक बार कहा कि क्राउड फंडिंग करते हैं तो स्वाभिमान के कारण मना कर दिया कि स्वयं कमा कर ले लूँगा।
मैंने पता किया कि ऐसे कृत्रिम पाँव की कीमत कितनी है, तो मेरा दिमाग हिल गया। ऑफिसर होता तो संभवतः अलग तरह से सब कुछ होता, पर जवान है, तो वह ड्यूटी पर दोनों पाँव गवा कर भी तंत्र की उपेक्षा झेल रहा है। मित्र के कटे पाँव देखता हूँ तो गौरव और पीड़ा दोनों ही होती है। फिर यह सब जान कर पूरे तंत्र को ले कर लज्जा होती है कि कहीं बुलाया गया हो तो बेसिक सुविधा तो दे दो!
मैं यहाँ @PIBHomeAffairs @AmitShahOffice @narendramodi @PMOIndia आदि को टैग कर रहा हूँ। यदि मेरे किसी पाठक की जान-पहचान किसी ऐसे जगह पर है, जहाँ से समाधान हो जाए, तो कृपया बात को वहाँ तक पहुँचा दें।
वो तंत्र से हार कर नौकरी छोड़ना चाहता है, पर सिस्टम उसे वह भी करने नहीं दे रहा। पिछली बार इन्हीं के लिए, हर डाकूमेंट होने के पश्चात भी एक डिसेबल फ्रेंडली कार लेने के लिए नाकों चने चबाने पड़े थे, वह भी आप सबको याद ही होगा। सहायता कीजिए।
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अतुल सौरभ की आत्महत्या पर
अतुल की आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया में जैसे चर्चा हो रही है, हम सब को लगता है कि इससे परिवर्तन हो जाएगा। मुझे ऐसा नहीं लगता।
अतुल सौरभ जैसे दर्जनों केस हर वर्ष होते रहते हैं। अतुल एक सुलझे हुए व्यक्ति थे जिन्होंने वीडियो और पत्र के माध्यम से अपनी पीड़ा और आत्महत्या के निर्णय पर प्रकाश डाला। हर पीड़ित के पास अभिव्यक्ति के साधन नहीं होते। वो बस तंत्र से हार कर मर जाते हैं।
तंत्र से जीतना असंभव है। अतुल की मृत्यु से कुछ नहीं बदलेगा। मैं आश्वस्त हूँ कि वही महिला किसी और से विवाह कर के, अपने बेटे को ग्रूम करते हुए, बाप के बारे में विषैली बातें करते हुए उसे पालेगी। संभवतः कोर्ट उसे अतुल की संपत्ति का पूरा हिस्सा भी दे देगी।
जहाँ तक जज की बात है, जजों को जज बचा लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से ले कर जिला न्यायालयों के परिसर में धूल फाँकते वकील को भी पता है कि कोर्ट हर स्तर पर घुसखोरी का अड्डा है। तो, इस पर भी कोई चर्चा तक नहीं होगी।
परसों तक यह विषय समाप्त हो जाएगा और हमारे पास नया विषय आ जाएगा। यही सत्य है।
मैं अतुल से सहानुभूति भी रख कर क्या करूँगा? वो तो चले गए। अतुल को मरने से पहले एक-दो को साथ ले कर जाना चाहिए था। मुझे ‘शूल’ फिल्म का अंतिम दृश्य याद आता है जहाँ मनोज बाजपेयी के पात्र को तंत्र ने विवश कर दिया कि वो विधानसभा में विधायक की कनपटी पर बंदूक रख दे।
समाज ऐसा ही न्याय चाहता है। संभवतः न्याय है भी वही। परंतु, कानून की पुस्तक में वो न्याय नहीं हत्या हो जाएगी। कानून की पुस्तक में अतुल ने आत्महत्या की है, पर समाज जानता है कि अतुल की हत्या की गई है।
न्यायपालिका के हाथ कानून से बँधे हो सकते हैं, पर जो पेशकार जज के नीचे बैठ कर पैसा लेता हो, और जो जज स्पष्ट रूप पाँच लाख माँग रही हो, उसे राह चलते कल को कोई गोली मार दे, तो वह अन्याय नहीं होगा। क्योंकि उस जज ने केवल घूस नहीं माँगा, उसने उस व्यक्ति की हत्या में अपना योगदान दिया है।
कई लोग कह रहे हैं कि जज को पैसे दे कर सेटलमेंट कर लेता, जीवन क्यों ले लिया अपना। यह बात आप इसलिए नहीं समझ सकते क्योंकि कुछ लोग अपने आदर्शों से इस सीमा तक समझौता नहीं कर पाते। पेशकार को सौ रुपए देना भी घूस ही है, पर पेशकार से न्याय की आशा नहीं है।
वहीं, कोई जज हर बात जानते हुए भी आपको विवश करने लगे, तो आप ट्रिगर हो जाते हैं कि ये कब तक चलेगा? भगत सिंह चाहते तो असेंबली से भाग सकते थे बम फेंकने के बाद। वो नहीं भागे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी फाँसी से आंदोलन को बल मिलेगा।
अतुल की आत्महत्या भगत सिंह के स्तर की नहीं है, पर सोच वही है कि उसकी मृत्यु से कोई परिवर्तन हो, कोई नोट करे कि यह अपवाद नहीं, उदाहरण है। अतुल को जब लगा कि पूरा सिस्टम, न केवल उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को टार्गेट करता रहेगा, उनके दिए पैसे ही उनकी पीड़ा का कारण बनेंगे तो उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया।
हम स्वयं को ले कर जितनी चिंता नहीं करते, उससे अधिक अपने माँ-बाप या पत्नी-बच्चे को ले कर चिंतित रहते हैं। यदि वैसी परिस्थिति आती है, तो हम अपने लिए नहीं, उनकी पीड़ा को ध्यान में रख कर कॉम्प्रोमाइज करते हैं।
अतुल की आत्महत्या उसके परिजनों के लिए कॉम्प्रोमाइज है। उसे लगा कि वह यदि इस समीकरण से हट जाता है, तो बाकी हर व्यक्ति चैन से रह लेंगे। पुत्र का चेहरा भी उसे याद नहीं था, वह छोटा है, बड़ा हो कर उसे कदाचित् पिता का पक्ष समझ में आ जाए, ऐसा अतुल ने सोचा।
पुलिस, न्यायपालिका आदि जितनी भ्रष्ट हो सकती है, हो जाएगी। इनके लिए अतुल उन सैकड़ों नामों में से एक नाम है, जिसे ये हर सप्ताह वसूली का वॉलेट समझते हैं। उन तक ये वीडियो पहुँचा भी होगा तो ‘चू#% साला’ बोल कर समोसे खा लेंगे।
यही सत्य है। यही दुर्भाग्य है।
#AtulSubhash #JusticeIsDue
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100 % correct
पुलिस वाले भी इंसान हैं, इनके भी घर परिवार हैं, jeene का हक इन्हें भी है ये कैसी व्यवस्था है कि पुलिस वाले अपनी safety में कुछ ना करे, बाकी apradhiyon के लिए manav अधिकार aayog और कौन कौन से बड़े वकीलों का फ्री में jamavda लग जाता है, पुलिस के support में कोई नहीं
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मानव अधिकार मानव के होते हैं दानवों के नहीं होते भाई साहब और पुलिस कोई गोली खाने के लिए नहीं बनी यदि पुलिस पर हमला हो सबक सिखाया जाना चाहिए
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पूरे दिन एक ही बात दिमाग में घूम रही है कि हुतात्मा तुकाराम जी ने आत्मसमर्पण का नाटक करने वाले कसाब के पास जाने पर जब उसे AK47 ले कर उठते देखा होगा, तो उनके मन में क्या चल रहा होगा?
फिर कसाब ने बंदूक से गोली दागने का मन बनाया और तुकाराम जी ने उसकी नाल कस कर पकड़ ली और गोली को सीने पर सहते रहे ताकि किसी और की जान न जाए। जिसे गोली न लगी हो, या जिसने गोली चलाने के बाद निशाने को क्षत-विक्षत होते न देखा हो, वो शायद गोली लगने की पीड़ा को नहीं जान सकता।
तुकाराम जी भारतीय सेना के पूर्व जवान भी थे जो बाद में ASI बन कर मुंबई पुलिस को सेवाएँ दे रहे थे। उन्हें उस गोली के मायने पता रहे होंगे। और तब कसाब 40 से ज़्यादा गोली दागता चला गया, और तुकाराम ने एक हाथ से बंदूक की नाल और दूसरे से कसाब का कॉलर पकड़े रखा।
ये कहानी सुबह दोबारा पढ़ी तब से दिमाग में वही चल रहा है। आखिर क्या सोचा होगा इस महावीर ने? क्या उसे यह अहसास भी होगा कि उनके इस दुस्साहसिक कार्य से हिन्दुओं का कितना भला होने वाला है? क्या वो जानते होंगे कि इस वीरोचित कृत्य ने कितनी लाशें बिछने से बचा ली होंगी?
दूसरी बात का तो उन्हें भान रहा होगा कि सारी गोलियाँ वही झेल लेंगे तो उनकी मृत्यु तो निश्चित ही होगी, पर कई लोग बच जाएँगे। क्या उनके सामने परिजनों के चेहरे याद नहीं आए होंगे?
पुलिस हमेशा गाली सुनती है इस देश में। अधिकतर संदर्भ में वह सही भी होता है। लेकिन एक तुकाराम ओंबले उसी पुलिस की वर्दी को इतना ऊँचा बना देती है कि वो पूरे देश में पूज्य हो जाती है।
मैं नहीं जानता कि तुकाराम जी के परिवार को मरणोपरांत दिए अशोक चक्र या सीएनजी पम्प से हमने क्या क्षतिपूर्ति की है, लेकिन जब तक तुकाराम जैसे महापुरुष जीवित हैं, यह भारतभूमि सुरक्षित है।
कुछ कार्य वीर करते हैं, कुछ दैवीय शक्तियाँ मदद करती हैं। वरना आँधियाँ तो बहुत आईं हैं, फिर भी सनातन भी बचा हुआ है, भारत भी।
प्रणाम आपको, आपके परिजनों को और मुंबई पुलिस को जिनका उपकार सैकड़ों सालों तक यह धरती याद रखेगी।
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Very interesting and informative video
सीधी बात नो बकवास 🫡 100 सैलूट सीओ अनुज साहब को जिन्होंने बड़ी बेबाकी से अपनी बात राखी I बाकी गोली कैसे लगी किसने चलाई जांच का विषय है होने दो जांच कि बिना जांच के फैसला कर लिया है और उसको सही भी मान लिया I पुलिस मरने को भर्ती ना हो रही ✔️
#Sambhal #SambhalPolice #SambhalRiots
Îñsp Prashant retweeted
बहुत अच्छा वक्तव्य दिया है सीओ अनुज जी ने यह हर पुलिस वाले की सोच है और यह हर हिंदुस्तानी की सोच है अपनी आत्मरक्षा के लिए बचाव कोई गैर कानूनी नहीं है अगर हमारे साथ भी ऐसी स्थिति होगी तो हमें भी मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ेगा हम उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ है जय हिंद
सीधी बात नो बकवास 🫡 100 सैलूट सीओ अनुज साहब को जिन्होंने बड़ी बेबाकी से अपनी बात राखी I बाकी गोली कैसे लगी किसने चलाई जांच का विषय है होने दो जांच कि बिना जांच के फैसला कर लिया है और उसको सही भी मान लिया I पुलिस मरने को भर्ती ना हो रही ✔️
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Îñsp Prashant retweeted
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बहोत ही बढीया मूहतोड जबाब दिया गया है ।
आशा करता हू की आने वाले समय मे दिल्लीपुलिस ऐसा ही जबाब गूनडो बदमासो को देती रहै ।
मीडीया का कीया है ।
ऐ थोडी ना मरते है ।
मरता हे हमारा जवान जो 18 से 24 घन्टे नोकरी करता हे घर को छोड कर
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Well said respected Co sir. They do have their family. Aise hi logo ki zaroorat hai.
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Sir ye co sahab bikul theek bol rahe h ..
Kon si kitab me likha h. .
Virodh krne ke liye pathar Maro ..
Police hmare raat din kaam aati ..h .
Bina police ke hum theek se so bhi nhi sakte ..
Or koi bhi unko pathar mare.
Bikul he galat h ..
Salute for our police .
Îñsp Prashant retweeted
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Police has every right to shoot the violent mob, doesn't matter who and how many die. Rule of law shall be maintained at every cost along with fear of consequences. Else , civility is done and dusted. Mob Violence attracts police Violence and it is perfectly fine. See the west

























