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Atul Desai retweeted
अपने बिकने का आधे से ज़्यादा पैसा खुद IDBI बैंक मोदीजी के दोस्त को देगा !
कमाल का सौदा हुआ है!
जिस बैंक को खरीदना है, उसी बैंक से खरीद की आधी से ज्यादा रकम वापस मिल जाए—IDBI बैंक के प्रस्तावित सौदे में ऐसी ही योजना सामने आई है।
कनाडा के Fairfax समूह को सरकार और LIC की IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए चुना गया है। कीमत लगभग 52,878 करोड़ रुपये यानी 5.6 अरब डॉलर है।
इसके साथ IDBI को ख़रीद रहे Fairfax की योजना है कि उसके ग्रुप की Go Digit की दो बीमा कंपनियों और IIFL Capital में उसकी हिस्सेदारियाँ IDBI बैंक खरीद ले।
निवेशकों के साथ बातचीत में Fairfax के अधिकारियों ने इन हिस्सेदारियों की अनुमानित कीमत करीब तीन अरब डॉलर बताई। यह बैंक खरीदने की कुल रकम का लगभग 54 प्रतिशत है।
IDBI इसके लिए पैसा कहाँ से लाएगा? इसी सवाल पर Fairfax के प्रमुख प्रेम वत्स ने कहा कि IDBI बैंक के पास अतिरिक्त पूँजी है और बैंक नकद भुगतान करेगा।
यानी प्रस्ताव यह है कि Fairfax बैंक का नियंत्रण खरीदे और बैंक Fairfax की दूसरी कंपनियों में उसकी हिस्सेदारियाँ खरीदकर उसे रकम दे। Fairfax समूह हिस्सेदारियाँ बेचने वाला भी होगा और खरीदने वाले बैंक का नियंत्रक मालिक भी।
क्या कमाल का सौदा है न !
यहीं निष्पक्ष कीमत और हितों के टकराव का सवाल खड़ा होता है। कौन तय करेगा कि बैंक इन हिस्सेदारियों के लिए कितना भुगतान करे? क्या कीमत का स्वतंत्र मूल्यांकन होगा? क्या खरीद बैंक और उसके सभी शेयरधारकों के हित में होगी?
अभी यह योजना अंतिम नहीं है। Fairfax की 14 अक्टूबर की घोषणा के अनुसार बाध्यकारी समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं हुए थे। RBI, SEBI और बीमा नियामक IRDAI की जरूरी मंजूरियाँ भी मिलनी हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है: बैंक खरीदने की बोली की कीमत घोषित है। बैंक से अपनी हिस्सेदारियाँ खरिदवाकर Fairfax कितनी रकम लेगा, वह अभी तय नहीं है। इस प्रस्ताव की शर्तें और मूल्यांकन सार्वजनिक होने चाहिए।
फ़ेयरफैक्स के मालिक प्रेम वत्स का मोदी प्रेम विश्वविख्यात है और उन्हें 2020 में मोदीजी की सरकार की तरफ से पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है!
“मैं देश नहीं बिकने दूँगा “
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सुप्रीम कोर्ट के साथी वकीलों के फ़ोन आ रहे हैं जो आज की सुनवाई में शामिल थे। मौसम दिल्ली का ही नहीं कोर्ट रूम का भी बदला हुआ था। बाहर हल्की बारिश भीतर धुआँ धुआँ। आज वकीलों का समूह जैसे हूटिंग कर रहा था माननीय जजों को कई बार टोकना पड़ा कि शोर ना करें।ऐसा बरसों बाद हुआ है।
वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह शेरनी की तरह पत्रकारों, आंदोलनकारियों के साथ खड़ी थी। तुषार मेहता सरकार के पक्ष में और पत्रकारों के विरोध में उल्टे सीधे तर्क प्रस्तुत कर रहे थे। कपिल सिब्बल बार बार जजों के चेहरे को देखते हुए और बदलते मौसम को समझते हुए इंदिरा जय सिंह की ओर देखकर मन ही मन आह्लादित हो रहे थे।
दिल्ली पुलिस के वकील के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं था। तुषार मेहता के स्वर में स्वर मिलाते जज आज कोर्ट रूम में नहीं दिखे।हड़बड़ी में या कहें घबराहट में तुषार मेहता दो बार वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल एस को श्री गोपाल सुब्रमण्यम कह कर बुला रहे थे तो उन्होंने कहा मैं वो नहीं हूँ।
गौरव भाटिया ANI को विश्वसनीय न्यूज़ एजेंसी बता रहा था तो पीछे खड़े युवा वकीलों के समूह में खिलखिलाहट ने सीजेआई का ध्यान अपनी ओर खींचा।सुनवाई खत्म हुई। इंदिरा जय सिंह विजेताओं की तरह कोर्ट रूम से बाहर जा रही थीं युवा वकील उनके लिए रास्ता खाली कर रहे थे।
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What happens when a state begins treating peaceful protest as a security threat?
Delhi witnessed an extraordinary security crackdown over the weekend of October 10–11, with thousands of police personnel deployed, barricades erected across key roads, and thousands of people detained as protesters attempted to gather at Jantar Mantar. Opposition leaders, student activists were among those caught in the police action.
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हे अभय ओक सुप्रीम कोर्टाचे माजी न्यायाधीश असून त्यांनी आज कायदेशीर मुद्दे अधोरेखित करत सध्या निवडणूक आयोगाकडून राबवली जाणारी प्रक्रिया बेकायदेशीर असल्याचे सांगितले आहे. तसेच या बेकायदेशीर प्रकियेला प्रोटेक्ट करणाऱ्या CJI सूर्यकांत व जस्टीस बागची यांच्या आदेशांचाही फेरविचार झाला पाहिजे असे त्यांनी मत व्यक्त केले आहे. याआधी सुप्रीम कोर्टाचे विद्यमान न्यायाधीश भुयान यांनीही हेच सांगितले होते. न्यायसंगत आचरण व स्वच्छ प्रतिमा असा या दोन्ही आजी-माजी न्यायाधीशांचा लौकीक आहे. इतरांबद्दल कारवान मॅक्झिनमध्ये काय पब्लिश झाले होते हे आपल्याला माहितीच आहे. असो.. जस्टीस ओक यांच्या पूर्ण मुलाखतीची लिंक.👇
youtu.be/Quyg15tvYhw?si=T-tR…
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🚨BIG BREAKING : SC lawyer brutally EXPOSED CJI Surya Kant
CJI Surya Kant, your neutrality just got EXPOSED in one simple question
The Leader of Opposition went to the Supreme Court with a memorandum on SIR.
The CJI declined to meet the delegation. The message: the matter is pending, file a petition.
Fine. Rahul Gandhi filed the petition.
But a lawyer standing at the protest asked what crores of Indians are thinking:
"Agar neutrality rakhte hain toh neutrality unhe sabhi jagah rakhni chahiye."
He asked why the CJI, by his account, can go to dinner with Haryana CM Nayab Saini but can't take one memorandum from the opposition.
And everyone remembers 2024, when PM Modi walked into a sitting CJI's home for Ganesh puja.
So Milord, a simple question:
A BJP CM gets a dinner table.
The Leader of Opposition gets a "rule book".
Is that neutrality, or only distance from one side?
Bro, imagine the referee in your son's school final.
He has chai at the home team coach's house the night before.
Next day your son's coach goes to complain, and the referee says "procedure follow karo, form bharo."
Your boy may still win, but would you ever trust that match?
The cases are pending.
Voters' appeals are pending.
Journalists and protestors are knocking on the court's door.
Milord, trust in the court doesn't come from rules. It comes from looking equal to everyone.
Modi ji, your government knows that distance very well.
Gyanesh Kumar ji, now everyone is watching the court that has your file 🔥🔥🔥
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जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।
पूरी कविता पढ़िए
कृष्ण की चेतावनी (राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध काव्य-कृति 'रश्मिरथी' के तृतीय सर्ग)
वर्षों तक वन में घूम-घूम,
बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,
पांडव आये कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है।
मैत्री की राह बताने को,
सबको सुमार्ग पर लाने को,
दुर्योधन को समझाने को,
भीषण विध्वंस बचाने को,
भगवान हस्तिनापुर आये,
पांडव का संदेशा लाये–
"दो न्याय अगर तो आधा दो,
पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच ग्राम,
रखो अपनी धरती तमाम।
हम वही खुशी से खाएंगे,
परिजन पर असी न उठायेंगे।"
दुर्योधन वह भी दे न सका,
आशीष समाज की ले न सका,
उल्टे, हरि को बाँधने चला,
जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।
हरि ने भीषण हुँकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान कुपित होकर बोले–
"जंजीर बढ़ाकर साध मुझे,
हाँ-हाँ, दुर्योधन! बाँध मुझे।
यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
अमृत फूलता है मुझमें,
संघार झूलता है मुझमें।
उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
भूमंडल वक्षस्थल विशाल।
भुज परिबन्ध को घेरे हैं,
मैनाक-पग मेरे हैं।
दीप्ते जो ग्रह-नक्षत्र निकर,
सब हैं मेरे मुख के अंदर।
संहार देख, तो दृश्य अकांड देख,
मुझमें सारा ब्रह्मांड देख।
शतक कोटि सूर्य, शतक कोटि चंद्र,
शतक कोटि सरित् सर सिन्धु-मन्द।
शतक कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
शतक कोटि जलपति, धनेश।
शतक कोटि रुद्र, शतक कोटि काल,
शतक कोटि दंडधर लोकपाल।
जंजीर बढ़ाकर साध इन्हें,
हाँ-हाँ, दुर्योधन! बाँध इन्हें।
भूलोक, अतल, पाताल देख,
गत और अनागत काल देख,
यह देख जगत का आदि-सृजन,
यह देख महाभारत का रण,
मृतकों से पटी हुई भू है,
पहचान इसमें कहाँ तू है!"
अंबर में कुन्तल जाल देख,
पद के नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीन।... काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब जन्म मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।
जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
साँसों में पाता जन्म पवन,
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
हँसने लगती है सृष्टि उधर!
मैं जभी मूँदता हूँ लोचन,
छा जाता चारों ओर मरण।
बाँधने मुझे तो आया है,
जंजीर बड़ी क्या लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,
पहले तो बाँध अनंत गगन।
सूने को साध न सकता है,
वह मुझे बाँध कब सकता है?
हित-वचन नहीं तूने माना,
मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,
अंतिम संकल्प सुनाता हूँ।
याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन-जय या मरण होगा।
टकराएंगे नक्षत्र निकर,
बरसेगी ऊपर से प्रखर
फन शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुख खोलेगा।
दुर्योधन! रण ऐसा होगा,
फिर कभी नहीं जैसा होगा।
भाई पर भाई टूटेंगे,
विष्वण छूटेंगे-से छूटेंगे,
वायस-शियाल सुख लूटेंगे,
सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।
होगी हिंसा परसों की छय,
रण में तब होगी सिर्फ जय!
थी सभा सन्न, सब लोग डरे,
चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर ना अघाते थे,
धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे,
कर-जोड़ खड़े थे प्रमोदित,
निर्भय दोनों पुकारते थे- "जय! जय! जय!"
#poetry
#weekend
"लड़की के मुंह से खून निकल आया... उसके पेट पर लातें मारीं, वो बिलख-बिलख कर रो रही थी, फिर भी नहीं छोड़ा! और सामने खड़ी पुलिस कहती है, 'हमारे आगे तो कुछ हुआ ही नहीं'..."
"जो मार रहे हैं उन्हें पुलिस कुछ नहीं कह रही, और जो पिट रहा है उसे ही डिटेन किया जा रहा है!"
जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के पास CJP प्रोटेस्ट के दौरान आखिर क्या हुआ? देखिए चश्मदीदों के रोंगटे खड़े कर देने वाले दावे...
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To
𝗠𝗿 𝗚𝘆𝗮𝗻𝗲𝘀𝗵 𝗞𝘂𝗺𝗮𝗿 ,
Chief Election Commissioner (CEC) ,
@ECISVEEP -Election Commission of India,
"𝗪𝗲, 𝘁𝗵𝗲 𝗣𝗲𝗼𝗽𝗹𝗲 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮, 𝘁𝗵𝗲𝗿𝗲𝗳𝗼𝗿𝗲 𝘀𝗲𝗿𝘃𝗲 𝘁𝗵𝗶𝘀 𝗡𝗼𝘁𝗶𝗰𝗲 𝗼𝗳 𝗜𝗺𝗽𝗲𝗮𝗰𝗵𝗺𝗲𝗻𝘁 𝘂𝗽𝗼𝗻 𝘆𝗼𝘂. 𝗪𝗲 𝗵𝗼𝗹𝗱 𝘁𝗵𝗮𝘁 𝘁𝗵𝗲 𝗮𝗰𝘁𝘀 𝘀𝗲𝘁 𝗼𝘂𝘁 𝗮𝗯𝗼𝘃𝗲 𝗰𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗲 𝗽𝗿𝗼𝘃𝗲𝗱 𝗺𝗶𝘀𝗯𝗲𝗵𝗮𝘃𝗶𝗼𝘂𝗿 𝘄𝗶𝘁𝗵𝗶𝗻 𝘁𝗵𝗲 𝗺𝗲𝗮𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗼𝗳 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟰(𝟱) 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗮𝗻𝗱 𝗱𝗲𝗺𝗮𝗻𝗱 𝘆𝗼𝘂𝗿 𝗿𝗲𝗺𝗼𝘃𝗮𝗹 𝗳𝗿𝗼𝗺 𝘁𝗵𝗲 𝗼𝗳𝗳𝗶𝗰𝗲 𝗼𝗳 𝗖𝗵𝗶𝗲𝗳 𝗘𝗹𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗶𝘀𝘀𝗶𝗼𝗻𝗲𝗿."
The Charge Sheet and a Note of impeachment against the Chief Election Commissioner (CEC) is Attached .
Cc @rashtrapatibhvn , @VPIndia
@ombirlakota
Atul Desai retweeted
Can you raise this demand again @raghav_chadha or not allowed by your leaders
#stt
My Demand: Make Long Term Capital Gain TAX on Equities NIL for individual investor.
I welcome the hike in STT (security transaction tax) on derivatives as it can curb reckless speculation. Nearly 90% of retail investors lose money in F&O, turning markets into gambling.
When STT was originally introduced, LTCG was zero. But now with both STT and LTCG in place, investors are disincentivised.
I urge the govt to abolish LTCG on equities for individuals, as done in Switzerland, Singapore, UAE & others. This will boost household wealth, reduce speculation, and shift savings from gold & real estate into equities.
Atul Desai retweeted
बीजेपी समर्थित सोशल मीडिया के धुरंधर सुभाष चंद्रा के पक्ष में समर्थन दे रहे हैं कि उन्होंने लोन थोड़ी ना लिया था, वे तो बस गारंटर थे। देखिए बात तो सही है, मामला 170 करोड़ रुपए की देनदारी से शुरू हुआ था। लेकिन चंद्रा साहब ने इतना महीन खेला है कि ये बात तो आपको न मीडिया बताएगी, न तो ये पब्लिकली होगा। ये सब वेल प्लैंड था।
आपको थोड़ा डीप में ले चलते हैं। दरअसल जब मामले की सुनवाई NCLT के तहत हो रही थी तो तब Creditors ने अपना बहुमत सुभाष चंद्रा को दिया जो Insolvency process की लागत के पक्ष में था, मतलब 6 करोड़ 25 लाख रुपए चुकाने वाली बात। यानी Creditors को हर ₹100 के दावे पर करीब 3 पैसे मिलेंगे। इसका मतलब लगभग 99.97% Haircut। Haircut का मतलब है कि कर्जदाता अपनी मूल रकम का बड़ा हिस्सा छोड़ देता है और जितना मिल सकता है, उतना लेकर मामला खत्म करता है। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है। LIC Housing Finance ने इसका विरोध किया जिनका 1322 करोड़ रुपए फंस रहा था। लेकिन उनके ऑब्जेक्शन को दरकिनार कर दिया क्योंकि कर्ज वाली ज्यादातर कंपनियां चंद्रा के पक्ष में थीं। अब मजेदार बात देखिए और उन कंपनियों के बारे में जानिए जो करोड़ों रुपए का नुकसान सहने को तैयारी हो गईं। सोचिए सुनवाई के दौरान NCLT के सदस्य भी इस पक्ष में नहीं थे।
World Crest Advisors, Lemonade Capital Advisors, Corpcall Capital Advisors, Veena Investments और Direct Media Distribution Ventures जैसे Creditors ने सुभाष चंद्रा का साथ दिया। इन पांचों के claims मिलाकर करीब ₹13,406.57 करोड़ थे।
इन पांचों को लेकर कुछ बैंकों ने NCLT में गंभीर आपत्तियां उठाई थीं। उनका आरोप था कि ये कंपनियां सुभाष चंद्र से जुड़ी/associate entities हैं और इन्हें Creditor बनाकर वोटिंग में शामिल किया गया, जिससे Repayment plan को मंजूरी दिलाने में मदद मिली। इन पांचों के पास मिलाकर लगभग 61.78% वोटिंग शेयर था। एलआईसी हाउंसिंग के अलावा HDFC, RBL और IndusInd Bank ने इसका विरोध तो किया। लेकिन हुआ कुछ नहीं।
बसंत शर्मा कभी Veena Investments के डायरेक्टर थे जो पहले सुभाष चंद्रा कंपनी Essel Group entities की कंपनियों जैसे Direct Media Distribution और Pricomm Media Distribution के भी निदेशक थे। ऐसे में वे भला सुभाष चंद्रा के पक्ष में वोट क्यों नहीं देंगे। यही नहीं, अभी और देखिए, यही बसंत शर्मा World Crest Advisors LLP के पार्टनर भी थे। इसके दूसरे पार्टनर अभिषेक बंसल भी सुभाष चंद्र की कंपनी से जुड़े रहे हैं। 2018 में तो World Crest Advisors कंपनी Essel Group का हिस्सा थी।
Lemonade Capital Advisors और Corpcall Capital Advisors के भी संबंध Essel Group से रहे हैं। कैपिटल के पार्टनर रविंद्र और Corpcall के विजय भुजभल भी सुभाष चंद्रा की कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। सुभाष चंद्रा ने खुद से जुड़ी ही कंपनियों को कर्ज दिलाया, वे चुका नहीं पाईं, कंपनियाँ डिफॉल्ट हुईं। कर्ज देने वाली कंपनियों ने गारंटर को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन सत्ता की गोदी के लाडले सुभाष चंद्रा ने बड़ी चालाकी से ऐसा चक्रव्यूह बुना कि 22 हजार करोड़ रुपए घूमते-घूमते 6 करोड़ 25 लाख हो गया।
Atul Desai retweeted
जहां डाल डाल पर उल्लू बैठा
पिंजरे में बन्द है तोता 😂
बोलो ऐसा कहां है होता 😂
लो कल्लो बात अब WhatsApp अंकलों वाले पार्क में भी बदलाव...
Atul Desai retweeted
IT'S A VICTORY OF DEMOCRACY
direct democracy... straight from the streets.
It's a victory of peace, patience & persévérance.
Congratulations CJP, Gen Z of the nation and thank you all citizens for shedding fear and the fear of fear and rising up from every corner of the nation.
FROM ACCOUNTABILITY, NOW TO REFORMS – at Gurgaon, India
Atul Desai retweeted
Doctors serve the nation by saving lives—not by inviting violence. If any allegations of excessive force during a peaceful demonstration are true, they deserve an independent and transparent investigation. Respect the medical fraternity. Justice and accountability must prevail.
Delhi Police brutally attacked doctors. Doctors have exposed the Delhi Police's brutality. How could @DelhiPolice do this? Horrifying. 💔
#संसद_मार्च teapawt.net/ripper_dhruvaa/status/…
Atul Desai retweeted
RAF ने क्रूरता की सभी limits पार कर दी! कल दिलावर सिंह डिजिटल पत्रकारों को धमका रहे थे. ये देखिए! ये रक्षक हैं?
Atul Desai retweeted
MY CLARIFICATION...
to statements made by Lieutenant Governor of Ladakh regarding his warning to me to refrain from making comments on #CockroachJantaParty
The meeting and the LG's tweet happened on 26th evening, yet I avoided reacting to the post that evening. But next morning it dawned on me that it was more of a press statement than just a tweet as the absurd statement appeared in several newspapers. So I made this video but again restrained myself from posting...
Shayad unki aakhri ho yeh sitam, har sitam yeh soch kar hum seh gaye...
But this morning even more media channels carried this... and I kept getting calls from journalists for my comments.
So finally here it is...
Media house are welcome to use it... no copyright






























