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12 HARSH TRUTHS ABOUT PEOPLE:
1. The most honest - are alone.
2. The kindest - were broken by life.
3. The bravest - were once the most afraid.
4. The calmest - went through hell.
5. The loudest - are empty inside.
6. The most loving - know how to let go.
7. The smartest - doubt themselves.
8. The strongest - cry alone.
9. The most beautiful - don't see themselves that way.
10. The most free - expect nothing from others.
11. The most dangerous - smile.
12. The happiest - compete with no one.
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ईश्वर की तरह
अदृश्य ही रहना तुम
ताकि मेरा विश्वास बना रहे देवत्व में
और मैं उकेर लूँ एक मनचाही मूरत
तुम्हारी अनदेखी सूरत को शब्द देकर
करता रहूँ प्रेम
तुम्हारे ईश्वरीय स्वरूप से
और जीवित रखूँ अभिलाषा
तुम्हारे साकार दर्शन की
सुन रहे हो न मेरे अभीष्ट !
~नरेश गुर्जर 🌼💌
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रोने के बदले अपनी तबाही पे हँस दिया
'शाकिर' ने इस तरह गिला-ए-आसमाँ किया
~ शाकिर कलकत्तवी 🖤
"But the heart sometimes blindly seeks suffering."
~ Albert Camus 🤍
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अक्टूबर
रवि यादव
बहुत कुछ खोने के बाद भी
खोया हुआ-सा कुछ बचा रह जाता है हमारे पास
कुछ बचने के बाद भी
कितना खोया हुआ लगता है बहुत कुछ
तितली अपने रंग खो देती है
और आसमान नीला पड़ जाता है
खोए हुए तितली के रंग की तरह
खो जाती हैं स्मृतियाँ
और बस जाती हैं
एक गहरे रंग का दाग़ बनकर
तुमने आख़िरी बार आवाज़ क्यों दी थी!
उस आवाज़ में अगर शब्द होते
तो कितना कुछ जान पाता मैं
उस आवाज़ की ध्वनि में भटक रहा मैं
उन प्रश्नों के जवाब मैं ढूँढ़ता हूँ ख़ुद की नसों में
मेरी नसों में ख़ून के बजाय बहते हैं वे प्रश्न
एक जाना हुआ प्यार अनजाने में जीते हैं
अनजाने में जानते हैं सब कुछ
प्यार की भाषाओं के हरसिंगार झर नहीं पाते किसी सुबह!
वे अटके रह जाते हैं किसी टहनी
किसी पत्ते पर झरते-झरते
अनजाने में मैं जानता हूँ तुम्हारा प्यार
अनजाने में तुम जानती हो हमारा प्यार
अनजाने में ही छिपी होती है
जानने की सबसे बड़ी धुन
सब कुछ जानते हुए कितने अनजान रहे हम
फिर भी कैसे मान लूँ मैं कि अनजान थी तुम प्यार से
उस रात छत से गिरते वक़्त तुमने मेरा नाम क्यों लिया!
क्यों पूछा?
‘व्हेयर इज डैन!
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जिस स्त्री को
मैं कभी छू न सका,
अजीब बात है—
वही मेरी उँगलियों की
सबसे पुरानी स्मृति बन गई।
उसके पास
मैं कभी बैठ भी न सका,
मगर जाने क्यों
आज भी मेरी शामों में
उसकी चुप्पी मेरे पास बैठती है।
मैंने कभी
उसके बालों में उँगलियाँ नहीं फेरीं,
फिर भी बारिश की पहली गंध में
मुझे लगता है—
जैसे कोई अनदेखी लट
मेरे चेहरे को छूकर गुज़र गई हो।
उसके होंठों तक
मेरे होंठ कभी पहुँचे नहीं,
लेकिन उसकी कही हुई
एक अधूरी बात
आज भी मेरे भीतर
चुम्बन की तरह ठहरी है।
मैंने उसकी देह को
कभी अपनी बाँहों में नहीं भरा,
फिर भी रात के सबसे शांत पहर में
तकिए पर सिर रखते ही
उसकी अनुपस्थिति
मेरी बाँहों के बीच
एक स्त्री की आकृति बन जाती है।
शायद स्पर्श
सिर्फ हथेलियों से नहीं होता—
कभी किसी की आवाज़
त्वचा बन जाती है,
कभी किसी की आँखें
आलिंगन,
और कभी किसी की याद
पूरी देह में
धीरे-धीरे उतरती हुई
एक गर्म साँस।
मैं उसे पा नहीं सका,
इसलिए शायद
उसे खो भी नहीं सका।
वह मेरे भीतर
किसी बंद कमरे में रखी
वह खुशबू है
जिसे दरवाज़ा खोलने की जरूरत नहीं—
सालों बाद भी
मन उसे पहचान लेता है।
उम्र बढ़ती गई,
चेहरे बदलते गए,
मौसम आते-जाते रहे,
मगर उसके लिए
मेरे भीतर बची हुई जगह
वैसी ही रही—
जैसे किसी मंदिर में
एक दीपक बुझ जाने के बाद भी
पत्थरों में उसकी गर्मी बची रहे।
मैंने उसे छुआ नहीं,
लेकिन उसके होने की कल्पना ने
मुझे छुआ है—
इतनी गहराई से
कि अब लगता है,
कुछ स्त्रियाँ
हथेलियों पर नहीं,
पूरी उम्र की धड़कनों में
महसूस की जाती हैं।
और शायद
इसीलिए वह आज भी
मेरे पास नहीं होकर भी
मेरी सबसे करीब की स्त्री है।
रिश्ता रूह का
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था मगर ऐसा अकेला मैं कहाँ था पहले,
मेरी तन्हाई मुकम्मल तिरे आने से हुई
~शाहीन अब्बास🌻💌
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“When the soul suffers too much,
it develops the taste for misfortune.”
— Albert Camus
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Kim öğretti sana
her şeyi tek başına taşımayı?
Çocukluğundan mı kaldı,
kimseye yük olmama telaşı?
Mestûr
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“I would teach the stars your name,
so the sky could whisper it when I miss you.
And if eternity ever asked what love was,
I would simply point to you”
—Void with Verses
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“The more you understand this world, the more you destroy yourself. That's why fools are happy, and intelligent people live in loneliness.”
— Fyodor Dostoevsky



















