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ब्राह्मणों ने पढ़ने नहीं दिया ? अफीम पर चल रहा है देश !
#Nigrahacharya #Jagadguru #निग्रहाचार्य #UGC_काला_कानून_वापस_लो
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Jupiter conjunct Ketu in Leo, and already noticed a few influencers suddenly turning into Acharyas and Gurus, announcing their renunciation of worldly pleasures on social media. Apparently, the only thing they're not ready to renounce is the need to be recognised for it.
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भगवती को प्राप्त करने का मूल्य है वैराग्य।
वैराग्य का अर्थ घर-परिवार को छोड़ विचित्र वेश बना या भिक्षाटन करना नहीं है वरन यह है कि जिस राग-द्वेष की धूप-छाँव में सारा जगत हूँसता, रोता, अशांत और उद्विग्न रहता है, उस विडंबना से बचते हुए महान लक्ष्य
की ओर अनवरत गति से चलते जाना।
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हर युग के अपने गुणधर्म होते हैं. जो सतयुग में था वो त्रेता में नहीं था, त्रेता के गुणधर्म और आचरण द्वापर में नहीं मिलेंगे. राम का सिर्फ नाम पकड़ कर पैसा तो कमाया जा सकता है पर अगर राम के साथ जुड़े चरित्र की बात हो तो उस युग के गुणधर्म और आचरण पकड़े बिना राम का चित्रण असंभव है.
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अपने धर्मग्रन्थ पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन सब में देवताओं, यहां तक कि ईश्वर की भाषा तक सदैव सौम्य रही है. धर्मरत अगर राक्षस भी हो तो उसके साथ वार्तालाप का मूल तत्व सदैव नम्रता और आदर का रहा है. रामानंद सागर ने इस मूल तत्व को पकड़ कर रखा था. बाकी किसी में ये योग्यता नहीं दिखाई देती.
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मन्त्रविक्रयिणो मूढा देवद्रोहपरायणः।
रौरवं नरकं यान्ति यावदाभूतसम्प्लवम्॥
गुरु-द्रोह, देव-द्रोह और ऋषि-द्रोह के इस बहुस्तरीय विपणन को पहचानिए। अपने भय और लोभ के व्यापारी से बचिए तथा शुद्ध आम्नाय-परम्परा के पथ पर अडिग रहिए।
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कोई एक घर तो ज़रूर आज ढूंढिए जहां आप की थोड़ी सी मदद से दिवाली मन सके ।
जो मंगते हैं आलरेडी उन्हें देने की कोई ज़रूरत नहीं । उन्हें कोई न कोई दे देगा । उन्हें दीजिए जो मांग भी नहीं सकते, और जिन्हें दिवाली के दिन हर किसी के चेहरे पर देख कर मुस्कुराने का नाटक भी करना है ।
बहुत लोग होंगे आपकी सोसाइटी में- नौकरी छूट गई होगी, मोहल्ले में किसी को पता भी नहीं होगा । गांव घर के छूटे संबंधी । कोई न कोई नज़र दौड़ाएंगे तो मिल जाएगा ।
इस तरह का जेस्चर ज़ाया नहीं जाता । आप आपके वंशज कभी तकलीफ में होंगे तो कोई अंजानी मदद पहुंच जाएगी, जिसे आप ईश्वर कृपा समझेंगे ।
मैंने एक वक्त बहुत गरीबी देखी पर भोजन कहीं न कहां हो ही जाता था । मेरे नाना के बारे में फेमस है मेरे शहर में कि वो खाना खाने से पहले सड़क पर निकल कर देखते थे कि कहीं कोई भूखा तो नहीं, उसके बाद खाने पर बैठते थे । शायद उसी का परिणाम रहा कि बहुत विपरीत परिस्थिति में उनकी संतानों को उनका पुण्य मिलता रहा ।
ये घटना बस इसलिए बताई है कि पुण्य का कांसेप्ट क्लियर रहे ।
इमोशनल वेट कभी खत्म नहीं होता।
Shani in 12 Houses
1st → Heavy self, late maturity
2nd → Slow money, family duty
3rd → Hard courage, silent effort
4th → Emotional weight, home responsibility
5th → Delayed love, serious mind
6th → Enemy victory, work pressure
7th → Late marriage, karmic partner
8th → Long struggle, deep transformation
9th → Tested faith, distant luck
10th → Slow rise, lasting status
11th → Delayed gains, loyal circle
12th → Isolation, spiritual karma
Shani never denies; it gives late but permanent results.
#astrology
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हठपाकक्रमेणैव भावानां ग्रसनं भवेत्।
केवल हठपाक की उग्र और निर्मम प्रक्रिया के द्वारा ही भौतिक भावों, राग और ऋणानुबंधों का पूर्णतः दहन कर उन्हें विशुद्ध चेतना में विलीन किया जा सकता है।
यदि साधक का हठपाक असफल रह जाए/मोह पूर्णतः न पके, तो उसका परिणाम कोई साधारण हार नहीं होता। आगम विज्ञान का यह अटल नियम है कि अपक्व रस शरीर और चेतना के लिए तीव्र विष बन जाता है। यदि इस घर्षण से विशुद्ध वैराग्य उत्पन्न नहीं हुआ, तो वह अनसुलझा मोह और अधिक विकृत होकर गहरी मनोवैज्ञानिक ग्रंथियों और दैहिक व्याधियों का रूप ले लेता है!
प्रकृति की यांत्रिकी इतनी निर्मम है कि यदि हमारा हठपाक बीच में टूट जाए, तो ब्रह्मांडीय मैट्रिक्स हमें क्षमा नहीं करता, बल्कि एक लूप में डाल देता है। हमें तब तक उसी पैटर्न और उन्हीं विनाशकारी भावनाओं के जाल में बार-बार पटका जाता है, इसी जीवन में या अगले जन्मों में, जब तक कि उस विशिष्ट ऋण का पूर्णतः दहन न हो जाए। बिना इस अद्वैत अग्निपरीक्षा से गुज़रे, माया के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का कोई शॉर्टकट या निकास नहीं है!
Replying to @nirgunaady
निर्मम घर्षण और लौकिक हठ पाक में क्या साधनाएं भी आती हैं?
और अगर यह प्रयास असफल रहा तो उसका परिणाम क्या होता है? 🙏
चलो आज कम समय लगेगा जाने में 😎
आज गौर सिटी अंडरपास को ट्रायल के लिए खोल दिया गया है। यह ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों नागरिकों के लिए बेहद खुशी और राहत की बात है।
मैं, अभिषेक कुमार अध्यक्ष NEFOWA Foundation, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग और यातायात की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इस अंडरपास का निर्माण इतने कम समय में पूरा करवाया।
आपको जानकर खुशी होगी कि गौतम बुद्ध नगर में बने अंडरपासों में संभवतः यह सबसे कम समय में बनकर तैयार होने वाला अंडरपास है। यह प्राधिकरण की कार्यक्षमता और सकारात्मक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
मैं विशेष रूप से @OfficialGNIDA के CEO साहब का पूरे क्षेत्र के नागरिकों की ओर से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने यहां के लोगों की समस्या को समझा और उसके समाधान के लिए तत्परता दिखाई।
हालांकि, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अभी यातायात की कई चुनौतियां बाकी हैं। इसी क्रम में मैं CEO साहब से कुछ और महत्वपूर्ण मांगें रखना चाहता हूं:
1. राईज चौकी से हनुमान मंदिर के पास तक यातायात की समस्या के समाधान के लिए एक अंडरपास या फ्लाईओवर बनाने की दिशा में पहल की जाए।
2.रोजा गोलचक्कर ( सेक्टर 16 )पर भी भविष्य में जाम की समस्या गंभीर हो सकती है। सड़क चौड़ी होने से निश्चित रूप से कुछ राहत मिली है, लेकिन खासकर शाम के समय वहां अब भी जाम की स्थिति बन जाती है। इसलिए समय रहते यहां भी स्थायी समाधान की योजना बनाई जाए।
फिलहाल गौर सिटी अंडरपास को ट्रायल के लिए खोला गया है। इसका औपचारिक उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। अगले पांच-छह दिनों में उद्घाटन की तारीख भी तय होने की उम्मीद है। हमें आशा है कि दिवाली के आसपास या उसके तुरंत बाद माननीय मुख्यमंत्री जी इसका उद्घाटन करेंगे।
अंत में, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के समस्त नागरिकों को बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद। यह सिर्फ एक अंडरपास नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही जनता की मांग और सामूहिक प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि है।
जनता की आवाज जब जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचती है और उस पर सकारात्मक कार्रवाई होती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है।
धन्यवाद🙏
NEFOWA Foundation
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वास्तविक गरीबी: मन की संकीर्णता
बाहर की गरीबी गरीबी नहीं है, मन में निर्धनता आती है तब बाहर की गरीबी दुःख देती है।
बाहर जो गरीबी है, कहीं मन की क्षुद्रता के कारण तो नहीं है? विचार करना चाहिए।
मन में संकीर्णता आती है, तो बाहर भी निर्धनता ही जाएगी। मन में संकीर्णता नहीं हो तो----।
बागेश्वर से पहले ही पंडोखर में दरबार और पर्ची कल्चर शुरू हो चुका था बुंदेलखंड में; ये लोग हनुमानजी के नाम पर दरबार सजाकर बैठे हैं। कुछ अन्य जातियों के लोगों ने अपने अपने देवी देवता पकड़ रखे, उनके अपने दरबार चल रहे। कुल मिलाकर बुंदेलखंड अपनी निम्नतम स्थिति में जायेगा कुछ वर्ष में।
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ज्ञान बटोरा उम्रभर, बढ़ता गया गुमान।
जिस दिन खुद को पढ़ लिया, मिट गया अभिमान॥
#अतरंगी_दोहा
भीतर के उस शून्य में, जहाँ न कोई वाद।
शब्द सभी विलीन हों, जागे केवल नाद॥
#अतरंगी_दोहा
मजारों पीरों की दरगाह पर चाकर चादर चढ़ाने वाले और छद्म त्रिकालदर्शी गुरुओं की शरण में जाकर अपने रोगों, समस्याओं के निराकरण को जाने वाले हिन्दुओं की श्रेणी एक ही है। बस अपने अपने पक्ष चुन रखे हैं सबने, कोई धर्म निरपेक्ष बनना चाहता है तो कोई कट्टर हिन्दू - जा चमत्कार के लिए ही रहे।
मैंने गयाजी में खाया था, आज तक याद है। ऐसा पहले कभी नहीं खाया था जीवन में।
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जब वाणी पश्यन्ती हो जाती है तब मंत्र दिखते हैं। तब उनका सत्य भी उद्भासित होता है।
#यूंही
कोई ब्राह्मणवाद पर दोषारोपण करे तो समझ जाना चाहिए कि इनको ब्राह्मणों से भारी द्वेष है। सनातनधर्म का शास्त्रीय मार्ग ब्राह्मण धर्म ही है। ब्राह्मण न हों तो विधर्मी शास्त्रों को विकृत करके कुमार्ग का द्वार जन मानस के लिए खोलकर अंततः धर्म परिवर्तन करा दें और ये षड्यंत्र इसीलिए है।
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सामान्य धर्म की नींव समाज के भले पर टिकी है, किन्तु एक सच्चा अवधूत सांसारिक व किताबी नियमों से पूरी तरह स्वतंत्र रहता है, क्योंकि उसकी चेतना सदा ब्रह्मभाव में डूबी रहती है और यही अवधूत का असली रूप है!
अवधूत उपनिषद इस पारलौकिक अवस्था को बहुत बारीकी से समझाता है,
अक्षरत्वाद् वरेण्यत्वाद् धूतसंसारबन्धनात्।
तत्त्वमस्यादिलक्ष्यत्वाद् अवधूत इतीर्यते॥
जो अक्षर/कभी नष्ट न होने वाला है, वरेण्य/सबसे श्रेष्ठ है, जिसने संसार के बंधनों को धूत/हटा दिया है, और जो तत्त्वमसि का साक्षात रूप है, वही अवधूत है!
कौलाचार में भी यह स्पष्ट उवाच है कि अवधूत का बाह्य बर्ताव समाज को पागलपन या मर्यादा के खिलाफ लग सकता है, किन्तु अंतरंग से वह परम कल्याण और किसी भी वस्तु से लगाव न रखने की सबसे ऊंची अवस्था में होता है।
आजकल स्वयं को सिद्ध अवधूत बताने वाले रट्टामार छद्मी केवल अवधूतों के इसी बाहरी पागलपन की नकल करते हैं, क्योंकि उनके पास न तो अंतर्ज्ञान होता है और न ही तपस्या की शक्ति। कुलार्णव तंत्र में भगवान शिव ने ऐसे गुरुओं के बारे में साफ चेतावनी दी है:
गुरवो बहवः सन्ति शिष्यवित्तापहारकाः।
तमेकं दुर्लभं मन्ये शिष्यसन्तापहारकः॥
शिष्य का पैसा लूटने वाले गुरु तो बहुत हैं, लेकिन शिष्य के संताप यानी भीतर के अंधेरे को दूर करने वाले सद्गुरु बहुत दुर्लभ हैं!
यदि शिष्य में सच्ची पात्रता हो, तो सद्गुरु के अंतर्ध्यान होने पश्चात भी उसका रास्ते से भटकना नामुमकिन है क्योंकि सूक्ष्म शरीर के द्वारा मनोमय कोष का लगातार संपर्क कहा गया है।
शिव सूत्र-२.६ कहना है, गुरुरुपायः/गुरु ही उपाय है!
एक बार शक्तिपात के द्वारा चेतना जुड़ जाने पर, गुरु की सूक्ष्म ऊर्जा लगातार आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र के द्वारा अनुभवित होती रहती है। भौतिक शरीर का न होना ऊर्जा की इस सूक्ष्म नाड़ी के संपर्क को कभी नहीं तोड़ सकता!




















