Air pollution is a problem
Let's admit it
DK Shivakumar is worst CM in all 36 states and UT of india
@grok justify this using below attached snap which says a2z hike and inflation in Karnataka @DKShivakumar
Mr. Chief Minister,
Since you don’t acknowledge nuances of federal cooperation, let me explain,
Bengaluru Metro follows a 20:20:60 funding model: 20% each from Centre and State, and 60% through loans from international agencies, backed by the Centre’s sovereign guarantee.
Without the Centre’s backing, these projects would not even take off.
Considering all the approved phases Bangalore Metro Phase 1, Phase 2, Phase 2A & 2B and Phase 3 Government of India has committed Rs 41,557 crores for construction of various metro projects in Bengaluru .
Whereas Government of Karnataka has committed Rs. 36,332 crores of rupees for the construction of Bangalore Metro.
Which international lender would fund a project based on the guarantee of your Pauper Sarkara?
Freebies government failed in Karnataka
Dear Congress,
35% hike in BMTC fares, 25% in KSRTC fares, costlier milk, and all this just as lakhs of Kannadigas gear up to celebrate Deepavali with their families. Some festive gift this is!
Kannadigas will not forget this. They will return the favour in 2028, at polling booths.
And when that happens, don't blame the EVMs, cry foul over SIR, or go looking for another excuse!
Vikrant retweeted
अभी-अभी स्टॉकहोम के एक खचाखच भरे हॉल में करीब पाँच सौ लोगों के साथ रामायण देखकर लौटा हूँ। मन प्रफुल्लित है। खुश हूँ। और गर्व से भरा हुआ हूँ कि हमारे भारत में ऐसी अद्भुत फिल्म बनी है! इस बात का भी सौभाग्य और गर्व है कि जटायु की भूमिका में और इस फ़िल्म के शुरू के नैरेशन के ज़रिए मैं इस फिल्म का एक हिस्सा हूँ। 🙏🏻
मेरे लिए यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। और दृश्यात्मक रूप से इतनी शानदार फिल्म मैंने आज तक नहीं देखी। सच में नहीं देखी!❤️
फिल्म खत्म हुई तो हॉल तालियों से गूँज उठा। लोग “जय श्री राम” के जयकारे लगा रहे थे। स्टॉकहोम में बैठकर उस उत्साह और उस भाव को महसूस करना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव था।इस साढ़े सात मिनट के वीडियो में उसी अनुभव को आपसे बाँट रहा हूँ। इसे मेरा रिव्यू कहने की जगह दिल से निकली प्रशंसा कहिए! जो महसूस किया, वही कहा है। बाकी आप सुन लीजिए। ❤️
इस फिल्म से जुड़े हर कलाकार, हर तकनीशियन और पूरी टीम को हृदय से बधाई! आपने गर्व करने का एक अद्भुत अवसर दिया है।
जय श्री राम! जय हिंद! 🚩🇮🇳❤️ @malhotra_namit @WorldOfRamayana
Vikrant retweeted
We’ve watched him rise, evolve and surprise us at every step.
And now, it’s time to witness Raghav Juyal in a never-seen-before avatar.
MEGHNATH IS COMING. AND THE WORLD IS NOT READY! 🔥⚔️
#TeamRaghavJuyal #ramayana #Raghavjuyal
This media is unavailable
Vikrant retweeted
Replying to @CMofKarnataka
@CMofKarnataka avare You are our CM. Please decide if you are ruling our state or these vigilantes are running the state @DKShivakumar @PriyankKharge @lkatheeq @rk_misra @kiranshaw @republic @RahulGandhi @INCIndia @DeccanHerald @BPACofficial @BCLIPAlumni @CPBlr @DgpKarnataka
#BREAKING
‘Mohandas Pai is Karnataka’s Shakuni, will be forced to leave the state’: KRV activist threatens IT veteran
"Mohandas Pai needs to be taught a lesson. He claims to be a Kannadiga but acts against the interests of Kannadigas. He is like Shakuni from the Mahabharata. He is Karnataka’s Shakuni, and that is not good for our people"
Vikrant retweeted
Leave B’lore saarrr. Need our roads empty saarrr!
Well saaarrr…where were you when IT companies were ending work from home forcing ‘outsiders’ to return to the city?
Why your activists didn’t go company to company then?
Richest MLA in India saying that government is bankrupt
Same government which took 11.2 lakh crore loan, half of them in last 3y
@PriyankKharge led it cell will do language war & enforce kannada in IT firms also instead of python, golang
Karnataka is a gone case 💀 #kannada
Vikrant retweeted
I bet none of them can even google the spelling Alphabet properly
Fake Kannadiga pride during AI era is hazardous for blr
Pro-Kannada organizations visited Google’s office and submitted a memorandum demanding jobs for Kannadigas.
#Karnataka #Kannadigas #Google #Bengaluru
Vikrant retweeted
हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री ( @samrat4bjp ) दिल्ली में बस अपने मालिक मोदी जी के कार्यक्रमों के साक्षी बनने जाते हैं। वहीं दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री दिल्ली से बड़ी-बड़ी परियोजनाएँ लेकर लौटते हैं, जबकि हमारे मुख्यमंत्री मोदी-शाह जी की चरण वंदना करके लौट आते हैं।
मैं लिखकर दे रहा हूँ, इस बार भी मुख्यमंत्री खाली हाथ बिहार लौटेंगे।
रक्षा मंत्री से मुलाकात तो होगी, लेकिन उनसे बिहार के लिए डिफेंस कॉरिडोर माँगकर लाने की हिम्मत नहीं है। अरे, छोड़िए डिफेंस कॉरिडोर की बात, इनके अंदर तो अपने ही राज्य के उन सांसदों से, जो दिल्ली में केंद्र सरकार में मंत्री बने हैं, और अपने ही दल तथा सहयोगी दल के मंत्रियों से बिहार के लिए कोई बड़ी परियोजना लाने की हिम्मत नहीं है।
क्योंकि इनके तथाकथित मालिकों का स्पष्ट आदेश है कि आप बिहार से वोट ले सकते हैं, लेकिन बिहार के लिए एक भी बड़ी परियोजना नहीं ला सकते।
भाजपा ने, खासकर मोदी जी और अमित शाह जी ने, भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक गुलाम बनाया है, जो उनके इशारों पर नाचता है।
फिलहाल, जिस तरह से मुजफ्फरपुर में गैस पाइपलाइन हादसा हुआ है और उसके बाद से मुख्यमंत्री के मुँह से एक शब्द तक नहीं निकला, यह साबित कर रहा है कि मुख्यमंत्री धृतराष्ट्र बन चुके हैं। उन्हें दिखाने के लिए कोई संजय नहीं है।
जय बिहार - जय बिहारवाद
🚩🙏🏻
Vikrant retweeted
A Bengali (now living in USA) coined the term Bimaru, now that West Bengal is poorer on PCI basis than few of BIMARU states.
Vikrant retweeted
Bangalore fall is ensured by so called language chauvinists
They can't protest 30rs milk hike in last 3y
So , kannada language war
Old script, repeat 😭
In the year 1999, I was running a large tech business out of Bangalore. Mr @ncbn invited me to move our venture to Hyderabad. He spoke to me directly. When our then CM Shri SM Krishna heard about this he sent the CS of Karnataka Mr Bhattacharya and IT Secretary Sanjay Dasgupta to take me out for lunch at the Bangalore Club. We discussed various matters at length and SMK ensured no one moved out of Karnataka. I don’t understand why the present Government is permitting such intimidation. Private sector runs on merit across the country and not just in Karnataka. Karnataka Government should put an end to such direct intimidation tactics.
@DKShivakumar
@CMofKarnataka
@PriyankKharge
@DgpKarnataka
@CPBlr
@TVMohandasPai
@naralokesh
Kaash itna focus aap bihar pe krte 😅
बिहार STF के DG कुंदन कृष्णन द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति के गंभीर एवं महत्वपूर्ण मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस:-
बिहार STF के DG कुंदन कृष्णन ने भोजपुर जिला के बिलौटी गाँव निवासी भरत तिवारी जी के फेक एनकाउंटर मामले में मुझे पाँच करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है । मेरा सवाल सीधा है—यदि मेरे द्वारा उठाए गए सवाल गलत हैं, तो उनका जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दीजिए । करोड़ों रुपये के मानहानि मुकदमे की धमकी देकर अपने किए गुनाह एवं भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
यह मामला किसी व्यक्ति विशेष से राजनीतिक या व्यक्तिगत लड़ाई का नहीं है । यह एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की घोषित संपत्ति, अघोषित संपत्ति, उनके परिवार के नाम पर अर्जित जमीन और इन संपत्तियों के वास्तविक स्रोतों की जाँच का मामला है ।
मेरे पास उपलब्ध वार्षिक संपत्ति विवरण, बिहार भूमि पोर्टल से प्राप्त जानकारियों, जमीन के खाता-खेसरा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कुंदन कृष्णन तथा उनके परिवार की संपत्ति को लेकर कई गंभीर सवाल हैं ।
घोषित संपत्ति और वास्तविक बाजार मूल्य का सवाल
कुंदन कृष्णन और उनका परिवार के वार्षिक संपत्ति विवरण में उनके नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियाँ घोषित हैं। इनमें नालंदा के बिंद और दरियापुर की पैतृक कृषि भूमि, पटना के नाला रोड स्थित मकान, नालंदा के बिंद में पैतृक आवास और गुरुग्राम स्थित तीन बेडरूम का फ्लैट शामिल हैं ।
नालंदा जिले के बिंद गांव में 7.5 एकड़ पैतृक कृषि भूमि का मूल्य 70 लाख रुपये दर्शाया गया है । दरियापुर गांव में 5.5 एकड़ पैतृक कृषि भूमि का मूल्य 65 लाख रुपये बताया गया है । दरियापुर में वर्ष 2020 में निर्मल सिन्हा से खरीदी गई 3.8 एकड़ जमीन का मूल्य मात्र 12 लाख रुपये दर्शाया गया है । बिंद गांव में दादा से प्राप्त 0.5 एकड़ आवासीय संपत्ति का मूल्य 80 लाख रुपये और पटना के लंगरटोली गली, नाला रोड स्थित बिंद कोठी में आधे हिस्से का मूल्य 80 लाख रुपये घोषित किया गया है । गुरुग्राम के पुरी डिप्लोमैटिक ग्रीन्स में A5-102 स्थित तीन बेडरूम के फ्लैट का मूल्य दो करोड़ रुपये दर्शाया गया है, जिसे पत्नी के साथ खरीदा गया है ।
सवाल यह है कि इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य क्या है? संपत्ति घोषणा में दर्शाए गए मूल्य और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच जमीन आसमान का अंतर है । इन सभी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की जाँच आवश्यक है ।
रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह से जमीन के लेन-देन का संबंध
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है ।पटना सिटी के मौजा सिमली मुरारपुर में कुंदन कृष्णन की पत्नी के जमीन के खाता/प्लॉट में रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह की जमीन है । इनके पत्नी द्वारा पटना के बैरिया में 2 बीघा जमीन खरीदा गया उसी प्लॉट में रितेश रंजन ने भी जमीन खरीदा । यह महज संयोग है या इन जमीनों के पीछे कोई साझा कारोबारी, पारिवारिक अथवा वित्तीय संबंध है? इन सभी लेन-देन की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए । यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि जमीन खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई धनराशि का वास्तविक स्रोत क्या था और संबंधित व्यक्तियों के बीच कोई वित्तीय लेन-देन हुआ है या नहीं ।
पटना सिटी के मौजा सिमली मुरारपुर, मालसलामी में कुंदन कृष्णन की माता विभा देवी, पत्नी अवध कुमार सिंह के नाम पर लगभग 7.81 डिसमिल जमीन खरीदे जाने का विवरण है । यह जानना जरूरी है कि इस जमीन की खरीद के लिए धन किसने उपलब्ध कराया? क्या खरीद की धनराशि का संबंध कुंदन कृष्णन अथवा उनके परिवार के वित्तीय लेन-देन से है? क्या इसका उल्लेख संबंधित आयकर और वित्तीय अभिलेखों में है? यह जमीन गया जी के नियाजुद्दीन से खरीदा गया । आश्चर्य वाली बात यह हैं कि इस जमीन के बगल में भी रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह का जमीन हैं । यह संयोग हो रहा है या प्रयोग इसका जांच जरूरी हैं । क्योंकि जहां तक हमको खबर हैं जमीन पहले रितेश रंजन के नाम से खरीदा जा रहा हैं जिसे बाद में हस्तांतरण कराने का योजना है ।
रवि शेखर नाम का व्यक्ति कौन हैं जो नई दिल्ली/ दिल्ली NCR में संपत्ति का निवेश देखते हैं । इनका भी जांच जरूरी हैं ।
धनौत की जमीन: घोषणा में बेची गई, लेकिन भूमि पोर्टल पर नाम बरकरार?
पटना जिले के रूपसपुर थाना अंतर्गत मौजा धनौत में जिसका खाता संख्या- 69, प्लॉट संख्या- 1986 में 15.5 डिसमिल जमीन का विवरण है । संपत्ति घोषणा के अनुसार इस जमीन को वर्ष 2021 में बेचा हुआ बताया गया है । लेकिन बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार जमीन अभी भी कुंदन कृष्णन के नाम पर दर्ज है । सवाल है कि यदि जमीन वास्तव में बेची जा चुकी है तो दाखिल-खारिज और जमाबंदी का अद्यतन विवरण क्या है? यदि बिक्री नहीं हुई है तो संपत्ति विवरण में इसे बेचा हुआ क्यों बताया गया? 2.69 डी0 शेष जमीन का विवरण घोषित संपत्ति में क्यों नहीं दिया गया इसका जांच जरूरी हैं ।
कैमूर जिले के भगवानपुर में जमीन का विस्तृत विवरण
कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के मकरी खोह में कुंदन कृष्णन के नाम से कई जमीनों का विवरण है । इनमें खाता संख्या 228, प्लॉट संख्या 1463 में पांच डिसमिल आवासीय जमीन का मूल्य 17 लाख 50 हजार रुपये दर्शाया गया है । इसी प्लॉट संख्या 1463 में पांच डिसमिल जमीन का एक अन्य विवरण भी उपलब्ध है, जिसमें मूल्य दो लाख 60 हजार रुपये बताया गया है । इसके अतिरिक्त खाता संख्या 228, प्लॉट संख्या 1467 में 810 डिसमिल कृषि भूमि, प्लॉट संख्या 1781/1824 में 108 डिसमिल कृषि भूमि और इसी प्लॉट संख्या से संबंधित 109 डिसमिल कृषि भूमि का विवरण भी सामने आया है । यहाँ कुल जमीन 16 एकड़ 88 डिसमिल हैं जिसका बाजार मूल्य 2 करोड़ से अधिक हैं ।
पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में 14 डिसमिल से अधिक जमीन
पटना सिटी के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित खाता संख्या 77, प्लॉट संख्या 1484 में 14.0624 डिसमिल जमीन का विवरण है । इस जमीन का सरकारी मूल्य 91 लाख 40 हजार 625 रुपये एवं बाजार मूल्य 7 करोड़ रुपये है । संपत्ति विवरण के अनुसार इसका जिक्र नहीं किया गया हैं । सवाल है कि इतनी महत्वपूर्ण शहरी संपत्ति का उल्लेख वार्षिक संपत्ति घोषणा में क्यों नहीं है? इस जमीन की खरीद कब हुई और इसके लिए धन कहाँ से आया? इसका जांच जरूरी हैं ।
नालंदा के बिंद गांव में अतिरिक्त जमीन
नालंदा जिले के बिंद गांव में खाता संख्या 316, प्लॉट संख्या 4884 में 4.1250 डिसमिल जमीन है । इसका मूल्य 21 लाख रुपये बताया गया है । यह संपत्ति भी उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार घोषित संपत्तियों में शामिल नहीं दिखाई गई है । सवाल है कि वर्ष 2018 में दिनेश राम से खरीदी गई इस जमीन का विवरण वार्षिक संपत्ति घोषणा में क्यों नहीं है? इसके भुगतान का स्रोत क्या था?
पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर करोड़ों की जमीन
कुंदन कृष्णन की पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर भी कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का विवरण है । पटना जिले के गोपालपुर थाना अंतर्गत मौजा बैरिया, खाता संख्या 687, प्लॉट संख्या 2970 में लगभग 1.25 एकड़ कृषि भूमि का मूल्य 1.20 करोड़ रुपये है । इसी प्लॉट में रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह द्वारा 1.8 एकड़ जमीन खरीदे जाने का भी उल्लेख है । वर्ष 2006 में इस जमीन की खरीद कीमत 18,58,000 रुपये बताई गई है ।
पटना सिटी के मालसलामी थाना अंतर्गत मौजा सिमली मुरारपुर में डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर लगभग 1.0763 एकड़ यानी करीब 34 कट्ठा कृषि भूमि है । इसका घोषित मूल्य 3.69 करोड़ रुपये है । इस जमीन का खाता संख्या- 272,283,31 प्लॉट संख्या- 410,411,41, 488 है ।
इसी मौजा सिमली मुरारपुर में खाता संख्या 280, प्लॉट संख्या 405 में 31.25 डिसमिल आवासीय जमीन का विवरण भी सामने आया है । इसका बाजार मूल्य 1.25 करोड़ रुपये है । यह संपत्ति उपलब्ध विवरण के अनुसार घोषित नहीं है । इस जमीन और इससे जुड़े अन्य भूखंडों के वास्तविक स्वामित्व, खरीद के स्रोत और संपत्ति घोषणा में किए गए उल्लेख की जाँच होनी चाहिए ।
भारती इंफ्राटेल को जमीन लीज पर देने का मामला
मालसलामी के सिमली मुरारपुर में डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर मौजूद जमीन का लगभग 94 डिसमिल हिस्सा Bharti Infratel Ltd. को लीज पर दिया गया है । इस लीज की शर्तें क्या हैं? कंपनी ने कितनी धनराशि का भुगतान किया? लीज से प्राप्त आय का उल्लेख आयकर रिटर्न और संपत्ति विवरण में किया गया है या नहीं? इसकी भी जाँच होनी चाहिए ।
नकदी, सोना, हीरा और कीमती रत्नों का सवाल
कुंदन कृष्णन के पास लगभग चार करोड़ रुपये के नकद, सोना, हीरा और पुखराज, रूबी जैसे कीमती रत्न होने की बात कही गई है । इसी प्रकार उनकी पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के पास भी लगभग चार करोड़ रुपये के नकद और कीमती आभूषण होने की जानकारी है । इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य, अधिग्रहण की तारीख, भुगतान का माध्यम और धन का स्रोत क्या है? इसकी भी जाँच होनी चाहिए ।
भूमि सीलिंग कानून और इतनी बड़ी जमीन का स्वामित्व
बिहार में भूमि सुधार एवं अधिकतम सीमा निर्धारण कानून लागू है । ऐसे में यह भी जाँच का विषय है कि संबंधित व्यक्ति और परिवार के नाम पर कुल कितनी कृषि भूमि है, उसका स्वामित्व किस आधार पर है और क्या भूमि सीलिंग कानून के प्रावधानों का पालन किया गया है ।
यदि अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जमीन खरीदी गई है, तो यह भी जाँचना आवश्यक है कि कहीं किसी एक वास्तविक लाभार्थी के हित में अलग-अलग नामों से संपत्ति तो अर्जित नहीं की गई ।
सरकार और जाँच एजेंसियों से जवाब चाहिए
मैं माँग करता हूँ कि कुंदन कृष्णन, उनकी पत्नी और संबंधित परिजनों के नाम पर मौजूद सभी चल-अचल संपत्तियों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए । वार्षिक संपत्ति घोषणा और बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान हो । सभी जमीनों की रजिस्ट्री, जमाबंदी, दाखिल-खारिज, खरीद की तारीख और भुगतान के स्रोत की जाँच हो । रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह सहित संबंधित व्यक्तियों के साथ जमीन के लेन-देन और वित्तीय संबंधों की पड़ताल की जाए ।
अघोषित संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान हो । पत्नी और अन्य परिजनों के नाम पर अर्जित संपत्तियों के धन के स्रोत की जाँच हो । भारती इंफ्राटेल को दी गई जमीन की लीज, उससे प्राप्त आय और आयकर विवरण की भी जाँच कराई जाए । पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से कराई जानी चाहिए । आखिर जवाबदेही से इतनी परेशानी क्यों?
एक सामान्य सरकारी कर्मचारी की संपत्ति में थोड़ी-सी वृद्धि होने पर भी उससे आय के स्रोत पूछे जाते हैं । फिर एक IPS नौकरशाह और उनके परिवार की इतनी बड़ी संपत्ति को लेकर सवाल उठने पर जाँच क्यों नहीं होनी चाहिए?
एक तरफ भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत के मामले में सवाल उठाने पर पाँच करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस भेजा जाता है, दूसरी तरफ संपत्ति के दस्तावेजों से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है ।
मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि पाँच करोड़ रुपये का नोटिस मुझे डरा नहीं सकता । जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के सवाल उठाना मेरा संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायित्व है । वर्दी कानून से ऊपर नहीं होती । पद किसी को जवाबदेही से मुक्त नहीं करता । सरकारी सेवा निजी संपत्ति का साम्राज्य खड़ा करने का लाइसेंस नहीं । यदि संपत्ति के संबंध में सभी दस्तावेज सही हैं, सभी अधिग्रहण वैध हैं और सभी स्रोत पारदर्शी हैं, तो स्वतंत्र जाँच से पीछे हटने की जरूरत क्या है?
मैं पाँच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस से नहीं डरता । मुझे संपत्ति के एक-एक दस्तावेज का हिसाब चाहिए । सवालों का जवाब दीजिए, जाँच कराइए और जनता के सामने सच्चाई रखिए ।
(सुधाकर सिंह)
I hardly find educated Kannadigas nowadays
Ajay is one of them
I have lived all my life in Bangalore. I am as Kannadiga as one can be. Complete Kannadiga roots on both sides of my parents family. And I am saying what I am saying next given my love for my State and the language.
1. Bangalore has not become what it has become due to any single Govt or Party. It has become this despite the Govts or with the help of all Govts!!
2. IT/ITES is not a function of our weather or the Cauvery water. This is not a sector dependent on natural resources like power or mining or ports. It is dependent on an ecosystem which has been built over the last 2 decades. It could have been built anywhere!
3. I have been working with IT/ITES companies for 2 decades now. Most of them admit the talent available in Bangalore is not comparable to anything anywhere in the country.
4. The ecosystem has been built and is thriving here because the sector placed importance on merit over anything else. They hired good people from everywhere and built the base here.
5. IT/ITES companies create 2-3 times the jobs of their head count. The number of cabs (drivers/owners), cafeterias, hospitality and the general increase in economic activity has created a lot of jobs.
So... looking at locals bein employed only in IT companies is a myopic view.
Own case: I have been able to build a good company with nearly 50 people now only due to what Bangalore has been in the last 20 years. If it was what it was in 90s... I would have had to go to Mumbai to do the kind of International tax work that I do here. So, as a local I may not have been employed by the IT Sector but I am employed and earning well due to the IT sector.
The sector that got impacted the least due to Covid was IT. In fact it expanded. The point being ... It is not a sector like automobiles or heavy industry for a factory to be fixed to a location for decades. They can work from anywhere WFH proved it. Which means that it can be relocated with greater ease than manufacturing.
We can lose the ecosystem quicker than it was built. I really hope we dont take an axe and cut the branch that we are sitting on. The people wanting IT sector to employ locals are not considering the indirect employment nor the impact of the sector on our State's Economy at large. Direct employment isnt everything. The Bangalore RE sector has so many large companies today due to the IT boom. Would we had a Ritz-Carlton and a Shangri-La and a Four Seasons opening here ahead of most other cities in India without the IT Sector feeding it? Would we have been the start up capital of the world in all new-age sectors without the IT boom of the early 2000s?? What about the people they employ? Helathcare. Retail. Entertainment. Multiple other sectors. We can go on discussing the second order impact.
In the 1990s... we had zero connectivity to the world from our airport. Even in early 2000s... most international travel was through Mumbai or Chennai. Remember? Today we have one of the busiest airport in the country with most important countries being a direct flight away!! What about the employment created due to this???
I hope better sense prevails. I too want my State to be the best. I too want Kannadigas to be thriving and doing well. But this method being employed now is not the way to go about it. Whatever hs to be done has to be done by an elected Govt alone. @DKShivakumar @PriyankKharge @MBPatil
Vikrant retweeted
Yes, I saw them at the office yesterday. They came in, sat under the AC, had some water, and stayed for about an hour. A lady asked them something in English, but they couldn't understand her. After that, they left.
































